फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Niti Aayog: CMs speak on the situation of ground water in front of PM Modi

नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी के सामने भू-जल की स्थिति पर 5-5 मिनट बोलेंगे मुख्यमंत्री

Tue, 11 Jun 2019 05:54 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jitendra Bhardwaj Updated Tue, 11 Jun 2019 05:54 PM IST
विज्ञापन
Niti Aayog: CMs speak on the situation of ground water in front of PM Modi
नीति आयोग (फाइल फोटो)

नीति आयोग की 15 जून को होने जा रही गवर्निंग काउंसिल की बैठक में सभी मुख्यमंत्रियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष पांच-पांच मिनट तक बोलने का समय मिलेगा। खास बात है कि इस बार मुख्यमंत्रियों को अपने एजेंडे में भू-जल को अनिवार्य तौर पर शामिल करना होगा। साथ ही नीति आयोग अपनी एक रिपोर्ट पेश कर यह बताएगा कि किस राज्य ने 'गिरते भू-जल की स्थिति' में सुधार के लिए क्या कुछ किया है, उनकी रेटिंग क्या है और आने वाले समय में हालात कैसे होंगे, आदि।

विज्ञापन


बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल की यह पहली बैठक है। इसमें सभी मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच चल रही टकराहट को लेकर सीएम ममता बनर्जी ने इस बैठक में भाग लेने से मना कर दिया था। पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में ममता बनर्जी ने कहा, नीति आयोग के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं है। उसके पास राज्यों की योजनाओं का समर्थन करने के लिए भी अधिकार नहीं हैं। ऐसे में आयोग की बैठक एक बेकार की कवायद है। हालांकि नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने ममता बनर्जी के बैठक में भाग लेने की उम्मीद जताई है। 
विज्ञापन


बैठक की रूपरेखा तैयार करने वाले एक अधिकारी का कहना है कि सभी मुख्यमंत्री खुलकर अपनी बात रखेंगे। यह सही है कि एक मुख्यमंत्री को अपनी बात कहने के लिए पांच मिनट का समय दिया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि पांच मिनट पूरे होते ही किसी सीएम को बैठा दिया जाएगा।सभी मुख्यमंत्रियों से कहा गया है कि वे अपने राज्य में लगातार नीचे जा रहे भू-जल की भयावह स्थिति से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं, इस पर जरुर बोलें। चूंकि इस समस्या के साथ किसानों के कई हित एवं दूसरी योजनाएं जुड़ी हैं, इसलिए बैठक में पानी पर विशेष जोर रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

डे-जीरो के कगार पर पहुंच चुके इन शहरों में पानी बचाने के लिए कुछ हुआ है या नहीं...


नीति आयोग की बैठक में डे-जीरो यानी भू-जल खत्म होने की स्थिति वाले शहर दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, कानपुर, जयपुर, हैदराबाद, अमरावती, धनबाद, जमशेदपुर, मेरठ, आसनसोल, विशाखापत्तनम, चेन्नई, मदुरै, कोच्चि, बंगलुरु, कोयंबटूर, शिमला, सोलापुर, मुंबई और विजयवाड़ा में जल संरक्षण की कोई योजना लागू की गई है या नहीं, इस पर चर्चा होगी। अगर कुछ हुआ है तो उसका नतीजा बताना होगा।


तीन साल पहले नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि देश में जल संरक्षण को लेकर अधिकांश राज्यों का काम संतुष्टिजनक नहीं है। जिन राज्यों की रिपोर्ट अत्यंत कमजोर रही, उनमें छत्तीसगढ़, राजस्थान, गोवा, केरल, उड़ीसा, बिहार, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, झारखंड, सिक्किम, असम, नागालैंड, उत्तराखंड और मेघालय शामिल हैं। मध्यम स्तर की रिपोर्ट वाले राज्यों में त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश का नाम सामने आया था। मौसम विभाग के अनुसार, कई वर्षों से देश के कुछ राज्यों में औसत से भी कम बारिश दर्ज की गई है।कई राज्य सूखे की स्थिति से गुजर रहे हैं। यही वजह है कि भू-जल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।

करीब 450 नदियों को आपस में जोड़ने पर चर्चा होगी...


पानी के संकट से निपटने के लिए नीति आयोग ने देश की आधी, करीब 450 नदियों को आपस में जोड़ने का एक विस्तृत प्रपोजल तैयार किया है। बरसात में या उसके बाद बहुत सी नदियों का पानी समुंद्र में जा गिरता है। अगर समय रहते इस पानी को उन नदियों में ले जाया जाए, जहां साल के अधिकतर महीनों में सूखा दिखता है तो आसपास के क्षेत्रों में कषि हो सकती है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में करीब साठ नदियों को आपस में जोड़ने का काम शुरु भी हो गया था। बता दें कि अक्टूबर 2002 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने सूखे व बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए भारत की महत्वपूर्ण नदियों को जोड़ने संबंधी परियोजना का खाका तैयार किया था। हिमालयी हिस्से के तहत गंगा, ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों के पानी को इकट्ठा करने की योजना बनाई गई। 

पीएम मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में गंगा समेत देश की 60 नदियों को जोड़ने की योजना को मंजूरी दी थी। इसका फायदा यह होगा कि किसानों की मानसून पर निर्भरता कम हो जाएगी। पानी के अभाव में खराब हो रही लाखों हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो सकेगी। नदियों को जोड़ने से हजारों मेगावॉट बिजली भी पैदा होगी। ज्यादा पानी वाली नदियों मसलन गंगा, गोदावरी और महानदी को दूसरी नदियों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए इन नदियों पर डैम बनाए जाएंगे। बाढ़-सूखे पर काबू पाने के लिए यही एकमात्र रास्ता बताया गया है।

कुछ ऐसी है देश में भू-जल की स्थिति, एक रिपोर्ट...


-1951 में 14180 लीटर प्रतिदिन, प्रतिव्यक्ति भू-जल की उपलब्धता थी
-1991 में 6030 लीटर  
-2001 में 5120 लीटर
-2020 में 3670 लीटर
-2050 में 3120 लीटर रह जाएगी

इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट के मुताबिक, देश में औसतन 135 लीटर पानी प्रतिदिन प्रति व्यक्ति देने की बात कही जाती है, लेकिन यह औसत 69 लीटर पर ही अटक जाती है। भारत में करीब 54 फीसदी हिस्सा ऐसा है, जहां भू-जल तेजी से नीचे जा रहा है।



-वर्ल्ड रीसॉर्स इन्स्टिट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि 2030 में पानी की मांग 1.5 ट्रिल्यन क्यूबिक मीटर होगी, जबकि मौजूदा सप्लाई 740 ट्रिल्यन क्यूबिक मीटर है।
-2030 तक 40 प्रतिशत लोगों को पीने का पानी नहीं मिलेगा
-2050 तक यही स्थिति रही जीडीपी का छह फीसदी केवल पानी पर खर्च होगा

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed