जिला कलेक्टरों को संविदा नियुक्ति का अधिकार दें राज्य सरकारें - नीति आयोग
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आंकक्षी जिलों में तेजी से विकास के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से जिला कलेक्टरों को संविदा पर शिक्षकों, चिकित्सकों और नर्सों समेत अन्य की नियुक्ति का अधिकार देने को कहा है। उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार ने इस सिफारिश पर कदम भी आगे बढ़ा दिए हैं, ताकि पिछड़े जिलों को तेजी से मुख्यधारा में लाया जा सके।
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने आकांक्षी जिलों पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि उनके नेतृत्व में गठित उच्चाधिकार समिति ने राज्य सरकारों को जिला कलेक्टरों को संविदा पर नियुक्ति के अधिकार देने को कहा है। केंद्र द्वारा चुने गए 111 आकांक्षी जिलों को अगर राज्य सरकारें वास्तविकता में पूरी तरह से विकसित करना चाहती हैं तो यह कदम वह जरूर उठाएंगी। जैसे उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने इस पर अमल करते हुए शासनादेश भी जारी कर दिए।
उन्होंने कहा कि 30 प्रतिशत स्वास्थ्य और पोषण, 30 फीसद शिक्षा, 20 फीसद पेयजल व कृषि तथा 20 प्रतिशत वित्तीय समावेशन के आधार पर हुए विकास पर अंक देकर प्रतिस्पर्धा कायम की जा रही है। कांत ने कहा कि हम किसी पर दबाव नहीं बना रहे, बस सही रास्ता कायम करने के लिए कह रहे हैं। चूंकि आकांक्षी जिलों की पूरी जिम्मेदारी जिला कलेक्टरों को दी गई है। इसी वजह से उन्हें संविदा पर शिक्षकों, चिकित्सकों, नर्सों समेत अन्य क्षेत्र में कर्मचारियों की नियुक्ति करने को कहा गया है।
जो आकांक्षी जिला अच्छा प्रदर्शन करेगा उसे ज्यादा कोष जारी किया जाएगा
नीति आयोग के सीईओ कांत ने कहा कि मानव केंद्रित सभी योजनाओं के लिए यह सिफारिश हमारी ओर से की गई है। इसमें फ्लैक्सी फंड के तहत जिला कलेक्टर संविदा पर नियुक्ति कर अपने जिले को सुविधाएं देंगे। उन्होंने कहा कि समिति के पास यह अधिकार है कि जो आकांक्षी जिला अच्छा प्रदर्शन करेगा उसे ज्यादा कोष जारी किया जाएगा।
जबकि खराब प्रदर्शन वाले जिला कलेक्टरों को इस प्रतिस्पर्धा में शर्म का सामना करना पड़ेगा। कांत ने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में इन जिलों की रैंकिंग में हरियाणा के मेवात जिले का नाम जैसे ही नीचे आया, हरियाणा के मुख्यमंत्री ने अधिकारयिं को कड़ी फटकार लगाई। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, लेकिन आकांक्षी जिलों के मामले में आए दिन रैंकिंग जारी की जाएगी और जो अधिकारी काम नहीं करेंगे उनके खाते में फटकार के सिवा कुछ नहीं आएगा। उन्हें केंद्र और राज्य, दोनों ही इस मामले में नहीं बख्शेंगी।
कांत ने कहा कि हमारा इरादा बिल्कुल स्पष्ट है और पूर्ण सकारात्मकता के साथ हम राज्यों के अधिकारियों से विचार-विमर्श कर आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन आकांक्षी जिलों के मामले में कोई बहानेबाजी केंद्र की ओर से बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गौरतलब है कि हाल ही में देश में सबसे खराब प्रदर्शन वाले जिले हरियाणा का मेवात एवं तेलंगाना का आसिफाबाद और मध्यप्रदेश का सिंगरौली आया था।