Mahua Moitra Row: निशिकांत दुबे ने महुआ पर किया जुबानी हमला, कहा-भ्रष्टाचार के लिए तीन साल की जेल है
तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने रविवार को कहा कि भाजपा सांसद निशिकांत के लगाए आरोप बेबुनियाद हैं। मोइत्रा पर एक्स पर एक पोस्ट में कहा, भाजपा के पास फर्जी आरोप को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है।
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तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ कथित आरोपों के बीच, भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने फिर उन पर निशाना साधा है। दुबे ने कहा, भ्रष्टाचार के लिए तीन साल की जेल है। दुबे ने एक्स पर पोस्ट किया, महुआ जी के कई साक्षात्कार देखे और पढ़े। आईटी अधिनियम के अनुसार, कंप्यूटर, डाटा, सिस्टम या पासवर्ड के बारे में जानकारी सिस्टम के मालिक की अनुमति से सचिव या उसके कर्मचारियों को दी जा सकती है। कौन है यहां के सिस्टम के मालिक लोकसभा अध्यक्ष या एनआईसी, क्या आपने पूछा, यदि नहीं तो राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने के अलावा, भ्रष्टाचार के लिए 3 साल की जेल भी है।
जानकारी के लिए यह संपत्ति संसद की है, यदि हम सांसद नहीं हैं तो इसे जमा करना होगा। इससे पहले दिन में, भाजपा सांसद ने कहा कि तृणमूल सांसद के पास मीडिया साक्षात्कार के लिए समय है, लेकिन लोकसभा आचार समिति के सामने पेश होने के लिए नहीं, जिसने शुरू में उन्हें 31 अक्तूबर को बुलाया था।
भाजपा के पास फर्जी आरोपों का कोई सबूत नहीं
तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने रविवार को कहा कि भाजपा सांसद निशिकांत के लगाए आरोप बेबुनियाद हैं। मोइत्रा पर एक्स पर एक पोस्ट में कहा, भाजपा के पास फर्जी आरोप को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है।
आचार समिति को महुआ को बुलाने की इतनी जल्दबाजी क्यों : तृणमूल
एक उद्योगपति से पैसे और उपहार लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोपों में घिरी तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा मामले में अब पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने सवाल उठाए हैं कि आखिर लोकसभा की आचार समिति (एथिक्स कमेटी) को महुआ को बुलाने की इतनी जल्दबाजी क्यों है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को नहीं बुलाए जाने पर भी सवाल उठाए। हालांकि घोष ने कहा, पार्टी आचार समिति की जांच के बाद ही आधिकारिक रूप से कुछ टिप्पणी करेगी।
घोष ने आचार समिति द्वारा दोबारा नोटिस भेजकर दो नवंबर को तलब किए जाने पर यह सवाल उठाया है। घोष ने सवाल किया कि अगर आचार समिति को महुआ मामले में इतनी जल्दी है तो केंद्रीय जांच एजेंसियां भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के मामले सालों से क्यों सोई हुई है। शुभेंदु को कभी क्यों नहीं बुलाया गया, जिनका नाम सारदा चिटफंड व नारद स्टिंग कांड में सीबीआई की एफआईआर में है।