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निर्भया फंड : महिला सुरक्षा के लिए प्राप्त धन से आठ साल में आधा भी नहीं हुआ खर्च 

Mon, 13 Aug 2018 10:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Aug 2018 10:06 PM IST
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Nirbhaya Fund: half the cost not spent in eight years with money received for women's protection

अब देश के चार राज्यों पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में डीएनए जांच की सुविधा सरकारी फोरेंसिक साइंस लैब में मिलेगी। उच्च अधिकार समिति ने इसकेलिए निर्भया फंड से 99.76 करोड़ रूपयों के बजट को मंजूरी दे दी है। ये बात और है कि निर्भय कांड के छह साल बाद भी अब तक देश की 7 और 33 राज्यों की फोरेंसिंक लैब अत्याधुनिक नहीं बन पाई है। यूपी ने तो फंड की कमी के चलते जांच न हो पाने की शिकायत भी गृहमंत्रालय से की थी।  

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कहना है कि इस शुरूआत से प्रयोगशालाएं आधुनिक होंगी जांच में भी तेजी आएगी। क्योंकि डीएनए जैसी जांच अभी बाहर करानी पड़ती हैं। जिन पर लगभग 30 हजार से 40 हजार प्रति टेस्ट कर खर्चा आता है। निर्भया कांड के बाद तब की यूपीए सरकार ने 2013 में महिला सुरक्षा और संसधानों को अत्याधुनिक बनाने के लिए लगभग एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया था। 
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इसे हर साल बजट में करना अनिवार्य किया गया। यह राशि महिला एवं बाल विकास के साथ गृह मंत्रालय तथा संबधित विभागों को खर्च करनी थी। इस पैसे से देश भर में महिला सुरक्षा को सुनिश्चित करना। अपराधों की रोकथाम और कार्रवाई के लिए संसाधनों को अत्याधुनिक बनाना इसमें केंद्रीय तथा राज्यों के फोरेंसिक लैब को अत्याधुनिक बनाने के लिए भी एक मुश्त रकम का प्रावधान रखा गया था। इससे राज्य और केंद्र सरकार के मताहत आने वाली प्रयोगशालाओं को  हाईटेक बनाना था।   
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लेकिन पिछले चार साल में इस मद में न के बराबर खर्च हुआ। प्रयोगशालाओं की हालात सुधरना तो दूर आगरा, जयपुर, दिल्ली में व्यवस्था जर्जर हो गई है ।  जिसका खामियाजा एम्स तक झेल रहा है। प्रयोगशालाओं के लचर रवैये  और अभी की स्थिति की बात करें तो आल इंडिया मेडिकल साइंसेस के फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ अभिषेक यादव कहते हैं कि प्रयोगशालाओं को हाईचेर बनाने के साथ अस्पताल के साथ उनका समन्वय भी ठीक करना होगा। 

अभी के हालात यह है कि एम्स से जनवरी 2013 से दिसंबर तक जांच के लिए भेजे गए बिसरा में केवल 6.2 फीसदी बिसरा जांच रिपोर्ट तय मानक समय यानि छह माह में आई बाकि 45 फीसदी की रिपोर्ट 2017 तक आ रही थी। जबकि मानक है कि गुणवत्ता बिसरा जांच  मेडिको लीगल मृत्यु के केस में छह माह के भीतर आ जानी चाहिए।  

इसी तरह उत्तर प्रदेश ने गृहमंत्रालय के साथ हुई बैठक में बकायदा संसाधनों की कमी की वजह से पाक्सो के संवेदनशील मामलों की जांच में हो रही देरी का हवाला भी दिया था। इन सबके बीच उच्च अधिकार समिति ने यूपी आगरा पश्चिम बंगाल कोलकाता महाराष्ट्र मुंबई और तमिलनाडु चेन्नई में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में डीएनए सुविधाओं के साथ अत्याधुनिक बनाने का फैसला लिया है। 


इसके लिए 99.76 करोड़ रूपये का बजट निर्धारित कर दिया गया है। इससे केन्द्रीय फोरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं को मॉडल फोरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं में तब्दील करने में सहायता मिलेगी।       

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