निर्भया के दरिंदे की फांसी की सजा बरकरार, चारों गुनहगारों को मिली 20 दिन की मोहलत
- सुप्रीम कोर्ट ने दोषी अक्षय ठाकुर की पुनर्विचार अर्जी खारिज कर कहा, दलीलों में नई बात नहीं
- पटियाला हाउस कोर्ट ने गुनहगारों की डेथ वारंट की अर्जी पर सुनवाई सात जनवरी तक टाली
- कोर्ट ने यह भी कह, दोषी तय समय में दया याचिका के विकल्प का इस्तेमाल कर सकता है
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के एक दरिंदे अक्षय ठाकुर की फांसी की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने बुधवार को उसकी पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कहा, इस मामले में दोषी के वकील को पूरा मौका दिया गया लेकिन उन्होंने कोई नई बात नहीं की है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषी तय समय में दया याचिका के विकल्प का इस्तेमाल कर सकता है।
वहीं, दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के चारों गुनहगारों को डेथ वारंट जारी करने के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई सात जनवरी तक के लिए टाल दी है। कोर्ट ने तिहाड़ जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि वे दोषियों को आज (बुधवार को) ही एक हफ्ते का नोटिस दें कि वे दया याचिका दाखिल करना चाहते हैं या नहीं? जेल प्रशासन ने बुधवार रात निर्भया के दोषियों को नोटिस जारी कर दिया।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दोषी के वकील एपी सिंह की दलीलों पर जस्टिस भानुमति की पीठ ने कहा, अक्षय की पुनर्विचार याचिका अन्य दोषियों की याचिकाओं के समान थी, जिन्हें शीर्ष अदालत 2018 में ही रद्द कर चुकी है। सजा की समीक्षा में हमें कोई आधार नहीं दिखा। पीठ ने उस तर्क पर उचित विचार किया, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने सुबूत जुटाने की मांग की थी और इसकी अनुमति नहीं दी गई।
पीठ ने कहा, इन तर्कों पर ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचार हो चुका है। जस्टिस भानुमति ने कहा, कोर्ट ने समीक्षा के लिए नियत नियमों के मानदंडों के तहत मामले की समीक्षा की और वह अब मामले पर दोबारा सुनवाई नहीं कर रही हैं। अन्य तीन दोषियों की याचिकाओं को खारिज करने का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा, उसके (दोषी) द्वारा जांच में कमियों और तर्कों को पहले खारिज की जा चुकी है।
कोर्ट में अक्षय के वकील एपी सिंह ने सुनवाई के दौरान केस की जांच और पीड़ित के बयानों पर सवाल उठाए। करीब 30 मिनट की दलीलों में सिंह ने कहा कि पीड़ित ने आखिरी बयान में अक्षय या किसी दोषी का नाम नहीं लिया। पीड़ित की मौत ड्रग ओवरडोज से हुई थी। मीडिया और राजनीतिक दबाव में अक्षय को सजा सुनाई गई।
‘उस दिन भगवान का भी सिर शर्म से झुक गया होगा’
अक्षय की पुनर्विचार याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में तुषार मेहता कहा, यह देरी करने का तरीका है। मेहता ने कहा, कुछ अपराध ऐसे होते हैं जिनसे मानवता भी रोती है। उस दिन भगवान का सिर भी शर्म से झुक गया होगा। पहली बात यह कि वह एक निर्दोष लड़की को बचा नहीं सके। दूसरा यह कि उसने पांच दैत्यों का बनाया ही क्यों। लिहाजा इस पुनर्विचार याचिका को बिना देरी के खारिज की जाए और कानून के तहत आगे का मार्ग प्रशस्त होने दिया जाए।
...तो दया याचिका के लिए हफ्ते भर का वक्त
अक्षय के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनका मुवक्किल राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करना चाहता है, इसके लिए तीन सप्ताह का समय दिया जाए। तब केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इसके लिए नियत समय सिर्फ एक सप्ताह है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका के लिए समयसीमा पर आदेश देने से इनकार करते हुए कहा, इस संबंध में दोषी कानून के अनुसार दिए गए समय में दया याचिका दायर कर सकते हैं।
कोर्ट के आदेश पर रोने लगीं निर्भया की मां, बोलीं, हमें बस तारीख पर तारीख
पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा, मैं आप लोगों (दोषियों) को पूरा वक्त दे रहा हूं, इसीलिए सात जनवरी तक समय दिया जा रहा है। दोषी जो भी कानूनी या दया याचिका जैसे विकल्प आजमाना चाहते हैं तो आजमा सकते हैं। डेथ वारंट जारी नहीं करने से निराश निर्भया की मां रोने लगीं। उन्होंने भरे गले से कहा, मुजरिमों के पास सभी अधिकार हैं, हमारा क्या? हमें तो बस तारीख पर तारीख मिल रही है।
कोर्ट ने निर्भया की मां से कहा, हमें आपसे पूरी सहानुभूति है। हमें मालूम है कि किसी की जान गई है लेकिन यहां किसी अन्य के अधिकारों की भी बात है। हम यहां आपको सुनने के लिए आए हैं लेकिन हम भी कानून से बंधे हैं। निर्भया के माता-पिता ने चारों दोषियों, मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को जल्द से जल्द फांसी देने की मांग के साथ कोर्ट से डेथ वॉरंट जारी करने की गुहार लगाई थी।
वकील बोले, 18-19 को देंगे क्यूरेटिव पिटीशन, दया याचिका भी
फैसले के बाद अक्षय के वकील ने मीडिया से कहा, हम 18 या 19 दिसंबर को क्यूरेटिव पिटीशन फाइल करेंगे। फिर राष्ट्रपति के पास दया याचिका भी लगाएंगे। हालांकि, पटियाला हाउस कोर्ट में मौजूद तिहाड़ के जेल ऑफिसर ने कहा कि अक्षय और मुकेश ने स्पष्ट कहा है कि वे दया याचिका दाखिल नहीं करेंगे। इस पर जज कहा कि हर दृष्टि से कानून का पालन किया जाएगा।
इधर, निर्भया जैसे मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म और हिंसा की वारदातों के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के मसले पर स्वत: संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ ने बुधवार को केंद्र, राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों और सभी हाईकोर्ट को नोटिस जारी कर सात फरवरी तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने कहा कि हमें देश की आपराधिक न्याय प्रणाली की समीक्षा और उसमें सुधार करने की जरूरत है। शीर्ष अदालत अब सात फरवरी, 2020 को इस मामले में सुनवाई करेगी।
एक दोषी ने 2012 में किशोर होने का किया दावा, दी याचिका
निर्भया के दरिंदों में से एक ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। गुनहगार पवन कुमार गुप्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि दिसंबर, 2012 में जब यह घटना हुई थी, उस वक्त वह नाबालिग था। इस मामले पर बृहस्पतिवार को जस्टिस सुरेश कुमार कैत की अदालत में सुनवाई होगी। उसका कहना है कि उसे किशोर न्याय कानून के तहत किशोर घोषित किया जाए।
निर्भया के दोषियों को नोटिस जारी
जेल प्रशासन ने बुधवार रात निर्भया के दोषियों को नोटिस जारी कर दिया। नोटिस में दोषियों को उनके पास मौजूद कानूनी विकल्पों के बारे में बताने के लिए कहा गया है। इसके लिए सात दिन का समय दिया गया है। दोषियों को इस बात की भी जानकारी देने के लिए कहा गया है कि वह अब तक किन कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर चुके हैं। सात दिन बाद दोषी जेल प्रशासन को सारी जानकारी मुहैया करवाएंगे। जेल के अतिरिक्त महानिरीक्षक व प्रवक्ता राजकुमार ने बताया कि सात दिन की अवधि बृहस्पतिवार सुबह से शुरू होगी। नोटिस का जवाब मिलने के बाद जेल प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।