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महाराष्ट्र: हादसे के नौ घंटे बाद बस को जारी किया PUC सर्टिफिकेट, समृद्धि एक्सप्रेसवे पर हुई थी 25 लोगों की मौत

Tue, 04 Jul 2023 11:09 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 04 Jul 2023 11:09 PM IST
सार

Maharashtra: बुलढाणा जिले में एक जुलाई को देर रात करीब डेढ़ बजे MH29- BE1819 पंजीकरण संख्या वाली स्लीपर कोच बस सड़क के डिवाइडर से टकरा गई थी और उसमें आग लग गई। हादसे में 25 यात्रियों की मौत हो गई।

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Nine hours after accident on Samruddhi Expressway, bus was issued PUC certificate
Maharashtra Bus Accident - फोटो : PTI (File)

विस्तार

महाराष्ट्र के नागपुर-मुंबई समृद्धि एक्सप्रेसवे पर इसी सप्ताह एक निजी बस में आग लगने से 25 यात्रियों की मौत हो गई थी। इस भयावह हादसे के नौ घंटे बाद प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। स्थानीय क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।  

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प्राधिकरण ने अब इस संबंध में स्थानीय क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से रिपोर्ट मांगी है। बुलढाणा जिले में एक जुलाई को देर रात करीब डेढ़ बजे MH29- BE1819 पंजीकरण संख्या वाली स्लीपर कोच बस सड़क के डिवाइडर से टकरा गई थी और उसमें आग लग गई। हादसे में 25 यात्रियों की मौत हो गई।
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पीयूसी प्रमाण पत्र उसी पंजीकरण संख्या के साथ उसी दिन सुबह 10.37 बजे जारी किया गया था, जब बस का जला हुआ गोला दुर्घटनास्थल के पास पड़ा था।
प्रमाण पत्र केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के 'वाहन डाटाबेस' पर भी देखा जा सकता है।

परिवहन आयुक्त विवेक भीमनवार ने पीटीआई-भाषा को बताया कि अगर पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करने वाले केंद्र की गलती पाई जाती है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।उन्होंने यवतमाल उप क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से रिपोर्ट मांगी है। आरटीओ के सूत्रों ने कहा कि बस के पहले पीयूसी प्रमाण पत्र की अवधि 10 मार्च, 2023 को समाप्त हो गई थी।
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यवतमाल स्थित एक पीयूसी केंद्र ने दुर्घटना के बाद सुबह 30 जून, 2024 तक वैधता के साथ एक नया पीयूसी प्रमाण पत्र (कोड संख्या MH0290041)जारी किया, जो बताता है कि केंद्र ने कभी भी वाहन का निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठाई। 

एक अधिकारी ने कहा कि यवतमाल के उप आरटीओ कार्यालय ने पहले ही पीयूसी केंद्र और बस के मालिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रत्येक वाहन मालिक के लिए एक वैध पीयूसी प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है जो बताता है कि यह वाहन उत्सर्जन मानदंडों का अनुपालन करता है। पीयूसी के बिना वाहन, मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के लिए उत्तरदायी है।

अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एमसी मेहता बनाम भारत संघ और अन्य मामले में बीमा कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे वाहन का बीमा तब तक न करें जब तक कि उसके पास वैध पीयूसी प्रमाण पत्र न हो।


एक आरटीओ अधिकारी ने कहा कि यह संभव है कि बस मालिक ने दुर्घटना के बाद एक नया पीयूसी प्रमाण पत्र प्राप्त करने की कोशिश की हो, इस डर से कि उसका बीमा दावा खारिज कर दिया जाएगा, लेकिन किसी भी मामले में पीयूसी केंद्र को वाहन का शारीरिक निरीक्षण किए बिना कभी भी प्रमाण पत्र जारी नहीं करना चाहिए। पीयूसी केंद्र के लिए प्रदूषण का स्तर मापने के दौरान वाहन की नंबर प्लेट की लाइव तस्वीर लेना अनिवार्य है।

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