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निकाह-हलाला पीड़िताओं को जान से मारने की धमकी, पीड़ित समीना ने मौलवी के खिलाफ जारी किया फतवा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 31 Jul 2018 07:41 PM IST
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बहुविवाह और निकाह-हलाला की पीड़िता को जान से मारने की धमकी मिल रही है। 27 वर्षीय फरजाना को उसके पति ने जान से मारने की धमकी दी है। एक और पीड़िता रानी शबनम को भी ऐसी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है। हलाला के खिलाफ आवाज उठाने वाली समीना को भी जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। वहीं आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ऐसी धमकियां देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
पति ने मुंह बोले पिता से हलाला करने को कहा
मंगलवार को इंडियन वूमेंस प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुलंदशहर की रहने वाली 27 वर्षीय फरजाना ने बताया कि 24 जुलाई को उसके पति का फोन आया, इस दौरान उसके पति ने उससे अपने मुंह बोले पिता से हलाला करने का सुझाव देते हुए, घर वापस आने को कहा। फरजाना का कहना है कि जब उसने हलाला के लिए इंकार किया, उसके पति ने उसे मार कर बोरे में बंद कर नदी में फेंकने की धमकी दी।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई
फरजाना के मुताबिक उसने यह बात अपने वकील को बताई, जिन्होंने उसे पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी। फरजाना के वकील और सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड विकास नारायण शर्मा ने बताया कि फरजाना ने बहु विवाह और निकाह-हलाला को असंवैधानिक करार देने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है, जिसकी 23 जुलाई को सुनवाई थी। शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संविधान बेंच को सौंप दिया है और अगर जरूरत पड़ी तो वे उसके पति के खिलाफ एप्लीकेशन लगाएंगे।
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पति ने मुंह बोले पिता से हलाला करने को कहा
मंगलवार को इंडियन वूमेंस प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुलंदशहर की रहने वाली 27 वर्षीय फरजाना ने बताया कि 24 जुलाई को उसके पति का फोन आया, इस दौरान उसके पति ने उससे अपने मुंह बोले पिता से हलाला करने का सुझाव देते हुए, घर वापस आने को कहा। फरजाना का कहना है कि जब उसने हलाला के लिए इंकार किया, उसके पति ने उसे मार कर बोरे में बंद कर नदी में फेंकने की धमकी दी।
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सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई
फरजाना के मुताबिक उसने यह बात अपने वकील को बताई, जिन्होंने उसे पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी। फरजाना के वकील और सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड विकास नारायण शर्मा ने बताया कि फरजाना ने बहु विवाह और निकाह-हलाला को असंवैधानिक करार देने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है, जिसकी 23 जुलाई को सुनवाई थी। शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संविधान बेंच को सौंप दिया है और अगर जरूरत पड़ी तो वे उसके पति के खिलाफ एप्लीकेशन लगाएंगे।
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आवाज उठाने वाली पीड़िता को मिल रही दुष्कर्म की धमकियां
सती प्रथा की तरह तीन तलाक, हलाला भी बंद हो
शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने फरजाना की याचिका को मुख्य मामले के साथ संलग्न किया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। उन्होंने सती प्रथा का उदाहरण देते हुए कहा कि राजा राम मोहन रॉय के अथक प्रयासों से चलते लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1829 में इस कुप्रथा को गैर-कानूनी और दंडनीय घोषित किया। शर्मा ने कहा कि जब हिन्दू धर्म में वक्त के साथ ऐसी कुप्रथा पर प्रतिबंध लग सकता है, तो मुस्लिम धर्म में हलाला जैसी कुरितियों पर अंकुश क्यों नहीं लग सकता। उन्होंने सरकार से तीन तलाक और हलाला पर जल्द से जल्द कानून पास करने की मांग की।
सामाजिक कार्यकर्ता को भी मिल रही धमकियां
वहीं तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. समीना ने बताया कि उन्हें भी दुष्कर्म और जान से मारने की धमकियां मिली हैं। जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। जिसके बाद इलाके के डीसीपी ने उन्हें पुलिस सुरक्षा देने की बात कही है। समीना ने बताया कि 27 जून को ओखला विहार में कुछ लोगों ने उनके कपड़े फाड़ने की कोशिश की थी और अपनी याचिका वापस लेने की बात कह कर उनके बच्चों को जिंदा जलाने की धमकी दी थी।
एक और पीड़िता की पानी सप्लाई काटी
समीना ने बताया कि एक और तीन तलाक और हलाला पीड़िता रानी शबनम के साथ भी बदसलूकी की जा रही है। उन्होंने बताया कि रानी को कोर्ट जाने से रोकने के लिए उसके ससुरालवालों ने उसके घर के पानी की सप्लाई काट दी है।
शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने फरजाना की याचिका को मुख्य मामले के साथ संलग्न किया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। उन्होंने सती प्रथा का उदाहरण देते हुए कहा कि राजा राम मोहन रॉय के अथक प्रयासों से चलते लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1829 में इस कुप्रथा को गैर-कानूनी और दंडनीय घोषित किया। शर्मा ने कहा कि जब हिन्दू धर्म में वक्त के साथ ऐसी कुप्रथा पर प्रतिबंध लग सकता है, तो मुस्लिम धर्म में हलाला जैसी कुरितियों पर अंकुश क्यों नहीं लग सकता। उन्होंने सरकार से तीन तलाक और हलाला पर जल्द से जल्द कानून पास करने की मांग की।
सामाजिक कार्यकर्ता को भी मिल रही धमकियां
वहीं तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. समीना ने बताया कि उन्हें भी दुष्कर्म और जान से मारने की धमकियां मिली हैं। जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। जिसके बाद इलाके के डीसीपी ने उन्हें पुलिस सुरक्षा देने की बात कही है। समीना ने बताया कि 27 जून को ओखला विहार में कुछ लोगों ने उनके कपड़े फाड़ने की कोशिश की थी और अपनी याचिका वापस लेने की बात कह कर उनके बच्चों को जिंदा जलाने की धमकी दी थी।
एक और पीड़िता की पानी सप्लाई काटी
समीना ने बताया कि एक और तीन तलाक और हलाला पीड़िता रानी शबनम के साथ भी बदसलूकी की जा रही है। उन्होंने बताया कि रानी को कोर्ट जाने से रोकने के लिए उसके ससुरालवालों ने उसके घर के पानी की सप्लाई काट दी है।
पीड़िता ने फतवा देनेवाले मौलवी के खिलाफ दिया ये फतवा
दाढ़ी काटने वाले को 21,786 रुपए का इनाम
वहीं समीना ने ऐलान किया कि जिन मौलवियों ने सामाजिक कार्यकर्ता निदा खान के खिलाफ फतवा जारी किया है, ऐसे मौलवियों के खिलाफ वे भी फतवा जारी कर रही हैं और उनकी दाढ़ी काट कर लाने वाले को 21,786 रुपए का इनाम देंगी। तीन तलाक, हलाल और बहुविवाह से पीड़ित महिलाओं की आवाज उठाने वाली बरेली की निदा खान के खिलाफ एक मौलवी ने फतवा जारी करके भारत छोड़ने और उनकी चोटी काट कर लाने वाले को 11,786 रुपए का इनाम देने का ऐलान किया है।
धमकी देना गलत, मुस्लिम समुदाय है साथ
उधर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में पदाधिकारी नियाज अहमद फारूखी ने ऐसी धमकियां देने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने कहा कि हलाला पीड़ितों को धमकी देना बिल्कुल गलत है और पूरा समुदाय उनके साथ है।
गौरतलब है कि पिछले तीन सालों से अपने माता-पिता के साथ रह रही फरजाना ने याचिका में मांग की है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत)-1937 की धारा-दो को असंवैधानिक करार दिया जाए। धारा-दो निकाह-हलाला और बहुविवाह को मान्यता देती है, लेकिन यह मौलिक अधिकारों (संविधान के अनुच्छेद-14, 15 और 21) के खिलाफ है।
निकाह-हलाला में तलाकशुदा महिला को अपने पति के साथ दोबारा शादी करने के लिए पहले किसी दूसरे पुरुष से शादी करनी होती है और शारीरिक संबंध बनाना होता है। दूसरे पति के तलाक देने के बाद ही वह महिला अपने पहले पति से निकाह कर सकती है।
वहीं समीना ने ऐलान किया कि जिन मौलवियों ने सामाजिक कार्यकर्ता निदा खान के खिलाफ फतवा जारी किया है, ऐसे मौलवियों के खिलाफ वे भी फतवा जारी कर रही हैं और उनकी दाढ़ी काट कर लाने वाले को 21,786 रुपए का इनाम देंगी। तीन तलाक, हलाल और बहुविवाह से पीड़ित महिलाओं की आवाज उठाने वाली बरेली की निदा खान के खिलाफ एक मौलवी ने फतवा जारी करके भारत छोड़ने और उनकी चोटी काट कर लाने वाले को 11,786 रुपए का इनाम देने का ऐलान किया है।
धमकी देना गलत, मुस्लिम समुदाय है साथ
उधर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में पदाधिकारी नियाज अहमद फारूखी ने ऐसी धमकियां देने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने कहा कि हलाला पीड़ितों को धमकी देना बिल्कुल गलत है और पूरा समुदाय उनके साथ है।
गौरतलब है कि पिछले तीन सालों से अपने माता-पिता के साथ रह रही फरजाना ने याचिका में मांग की है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत)-1937 की धारा-दो को असंवैधानिक करार दिया जाए। धारा-दो निकाह-हलाला और बहुविवाह को मान्यता देती है, लेकिन यह मौलिक अधिकारों (संविधान के अनुच्छेद-14, 15 और 21) के खिलाफ है।
निकाह-हलाला में तलाकशुदा महिला को अपने पति के साथ दोबारा शादी करने के लिए पहले किसी दूसरे पुरुष से शादी करनी होती है और शारीरिक संबंध बनाना होता है। दूसरे पति के तलाक देने के बाद ही वह महिला अपने पहले पति से निकाह कर सकती है।