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लश्कर-ए-तैयबा की साजिश का खुलासा, 22 साल की 'तानिया' से कराना चाहता था सुरक्षा बलों की जासूसी
Fri, 11 Sep 2020 03:40 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 11 Sep 2020 03:40 PM IST
सार
जांच एजेंसी ने कोलकाता स्थित एनआईए की स्पेशल कोर्ट में दस सितंबर को मुख्य आरोपी तानिया के खिलाफ यह 750 पेजों की चार्जशीट दाखिल की है। आरोप है कि तानिया प्रवीण उर्फ इसरानूर, गांव मलयापुर, पीएस बदुरिया, जिला नॉर्थ 24 परगना, पश्चिम बंगाल की रहने वाली है...
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Tania Parveen, NIA
- फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 'तानिया' के मामले में पेश अपनी चार्जशीट में एक बड़ा खुलासा किया है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद ने भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने व आतंक के रास्ते पर ले जाने के लिए एक बड़ी साजिश रची थी। सईद के साथ इस नापाक साजिश में पाकिस्तानी सीक्रेट एजेंसी 'आईएसआई' भी शामिल रही है। ये दोनों संगठन मिलकर भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए अपने साथ जोड़ते हैं।
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वहीं जब वे युवक कट्टरपंथी बन जाते हैं तो उन्हें टारगेट दिया जाता है। उन्हें फर्जी नाम से फेसबुक आईडी बनाने और केंद्रीय सशस्त्र बलों के सदस्यों के साथ दोस्ती करने के लिए कहा जाता है।' 22 वर्षीया तानिया' इसी साजिश का हिस्सा रही है। उसे कहा गया कि वह सोशल मीडिया पर दूसरे ऐसे युवाओं को अपने साथ जोड़े, जो कट्टरपंथी बनने की राह पर चलने के लिए तैयार हों। तानिया जो कि अब सलाखों के पीछे हैं, वह फिलिस्तीनी और सीरियाई जिहादी सोशल मीडिया समूहों में भी सक्रिय थी।
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जांच एजेंसी ने कोलकाता स्थित एनआईए की स्पेशल कोर्ट में दस सितंबर को मुख्य आरोपी तानिया के खिलाफ यह 750 पेजों की चार्जशीट दाखिल की है। आरोप है कि तानिया प्रवीण उर्फ इसरानूर, गांव मलयापुर, पीएस बदुरिया, जिला नॉर्थ 24 परगना, पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। भरोसेमंद सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने गत 18 मार्च को तानिया को गिरफ्तार किया था।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद से जुड़ी हुई है। इस संगठन के कई दूसरे सदस्यों से वह मिल चुकी थी। भारत में इस आतंकी संगठन ने युवाओं को बरगलाने के लिए सोशल मीडिया का जो जाल बुन रखा है, उसे तानिया ही देखती थी।
चूंकि यह केस सीधे तौर पर आतंकवाद से जुड़ा था, इसलिए एनआईए ने पांच अप्रैल को दोबारा से मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में पता चला कि आरोपी दिल्ली के एक कालेज की छात्रा थी और अरबी भाषा में एमए कर रही थी। वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज मुहम्मद सईद के संपर्क में आ गई।
तानिया, धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर लगभग 70 जिहादी समूहों का हिस्सा बन गई। ये सभी वे समूह थे, जिन्हें आतंकी संगठन के अलावा पाकिस्तानी आईएसआई ने भी ट्रेनिंग दी थी। मकसद था कि भारत में आतंकवादी विचारधारा का प्रचार करते हुए इस्लामी जिहाद को आगे ले जाना।
तानिया के समूह को मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उनकी भर्ती में तेजी लाने के लिए कहा गया था। एनआईए के मुताबिक, आरोपी तानिया दूसरे देशों में चल रही शाखा के साथ भी जुड़ चुकी थी। फिलिस्तीनी और सीरियाई जिहादी सोशल मीडिया समूहों में भी बराबर सक्रिय रही है।
तानिया इतना आगे बढ़ चुकी थी कि लाहौर स्थित लश्कर के सदस्यों ने उसे पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों से मिलवाया था। उसे कहा गया कि वह भारत में रह कर सैन्य ठिकानों की संवेदनशील एवं रणनीतिक जानकारी हासिल करे। फर्जी फेसबुक प्रोफाइल के जरिए सशस्त्र बल के सदस्यों से दोस्ती कर अहम सूचनाएं एकत्रित करे।