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एनएचआरसी ने मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा पर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी
Wed, 26 Aug 2020 04:48 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 26 Aug 2020 04:48 AM IST
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NHRC
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा पर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पेश करने का आदेश दिया है। एनएचआरसी ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के वकील व मानवाधिकार कार्यकर्ता राधाकांत त्रिपाठी की तरफ से दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस याचिका में उन्होंने कोरोना महामारी के प्रकोप के साथ भारत में आत्महत्या की दर में वृद्धि और चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने में सरकार के विफल रहने की दलील दी है।
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वकील ने तर्क देते हुए कहा कि डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग पांच करोड़ भारतीय अवसाद से पीड़ित हैं। उन्होंने सरकार पर मानसिक रूप से बीमार और अस्वस्थ व्यक्तियों की पहचान करने और कोरोना वायरस के दौरान उनकी देखभाल करने या कोविड-19 की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इन लोगों के मानवाधिकारों की अवहेलना करने का आरोप लगाया।
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मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित आत्महत्या और अपराध के विभिन्न उदाहरणों का हवाला देते हुए, त्रिपाठी ने कहा कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश स्वास्थ्य मुद्दों पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 और स्वास्थ्य मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के प्रावधानों को लागू करने में विफल रहे हैं। एनएचआरसी ने त्रिपाठी द्वारा दायर पहले की याचिकाओं पर कार्रवाई करते हुए ट्रांसजेंडरों और यौनकर्मियों की दुर्दशा पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा था।
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