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NHRC: झारखंड में आदिवासी लड़की से मारपीट का मामला, एनएचआरसी ने राज्य सरकार और डीजीपी को भेजा नोटिस
Fri, 19 May 2023 07:20 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 19 May 2023 07:20 AM IST
सार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक बयान में कहा कि कथित घटना झारखंड के पलामू जिले में जोगिडीह ग्राम पंचायत के फरमान पर हुई।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गुरुवार को झारखंड सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख (डीजीपी) को नोटिस भेजा है। यह नोटिस मीडिया में प्रसारित उन खबरों को लेकर भेजा गया है जिसमें एक आदिवासी लड़की के अपने परिवार के पसंद के लड़के से शादी करने से मना करने के बाद उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई, सिर मुंडवाया और गले में जूते की माला डालकर गांव में घुमाया गया।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक बयान में कहा कि कथित घटना झारखंड के पलामू जिले में जोगिडीह ग्राम पंचायत के फरमान पर हुई। आयोग के मुताबिक, एनएचआरसी ने मीडिया की उन खबरों पर स्वत: संज्ञान लिया जिनमें कहा गया था कि आदिवासी लड़की पर शारीरिक हमला किया गया और जब उसने अपने परिजनों की पसंद के व्यक्ति से शादी करने से इनकार कर दिया तो उसका सिर मुंडवाने के बाद उसके गले में जूते की माला डालकर घुमाया गया। एनएचआरसी ने कहा कि इस तरह के एक अनैतिक और गैरकानूनी कृत्य करने वाले अपराधियों को कानून के शासन द्वारा शासित एक सभ्य समाज में बख्शा नहीं जा सकता है।
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आयोग का कहना है कि मीडिया रिपोर्ट में जिस बात का जिक्र किया गया है, अगर वह सच है, तो यह ग्राम पंचायत के इशारे पर पीड़िता के मानवाधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी की स्थिति, पीड़ित लड़की का उपचार और मुआवजा आदि के बारे में जानकारी मांगी गई है।
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आयोग पैनल ने कहा कि अधिकारियों से रिपोर्ट में पीड़ित को दिए गए मुआवजे की किस्त की स्थिति की व्याख्या करने की अपेक्षा की जाती है, जो अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इसके लिए पात्र है। उनसे यह भी उम्मीद की जाती है कि वे पीड़ित लड़की को प्रदान की जाने वाली किसी भी परामर्श की स्थिति के बारे में सूचित करेंगे, जिसने शारीरिक दर्द, अपमान और सामाजिक कलंक का आघात झेला है। आयोग इस दुःखद घटना के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में भी जानना चाहेगा।
बयान में कहा गया है कि 16 मई को मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पीड़िता 20 अप्रैल को शादी के दिन घर से भाग गई थी और 20 दिन बाद गांव लौटी तो उसे सजा दिलाने के लिए पंचायत की बैठक बुलाई गई।