फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   NHRC issued conditional summons to top officials of Panchayati Raj and urban local bodies departments

NHRC: सरपंच पति की प्रथा पर एनएचआरसी सख्त, 32 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के अफसरों को पेश होने के निर्देश

Sun, 14 Dec 2025 10:40 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sun, 14 Dec 2025 10:40 PM IST
सार

 एनएचआरसी  ने पंचायत राज और शहरी स्थानीय निकाय विभागों में महिला प्रतिनिधियों के नाम पर परोक्ष रूप से सत्ता संचालन के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पहले जारी नोटिस का जवाब न देने पर 24 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के शीर्ष अधिकारियों को सशर्त समन जारी किया है। 

विज्ञापन
NHRC issued conditional summons to top officials of Panchayati Raj and urban local bodies departments
एनएचआरसी - फोटो : एक्स/एनएचआरसी

विस्तार

विज्ञापन

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 24 राज्यों और आठ केंद्र-शासित प्रदेशों के पंचायती राज एवं स्थानीय शहरी निकाय विभागों के शीर्ष अधिकारियों को सशर्त समन जारी किया है, जो इन संस्थानों में कथित ‘‘प्रॉक्सी गवर्नेंस’’ की प्रथा के संबंध में एनएचआरसी की ओर से पहले जारी किए गए नोटिस का जवाब देने में “विफल” रहे थे। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि यह मामला हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा की ओर से दायर शिकायत से जुड़ा हुआ है, जिस पर एनएचआरसी की एक पीठ ने सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता में 12 दिसंबर को विचार किया था।  यह समस्या खासतौर पर उन क्षेत्रों में सामने आ रही है, जहां पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, लेकिन असली कामकाज उनके पति या पुरुष रिश्तेदार कर रहे हैं, जिसे आमतौर पर सरपंच पति या प्रधान पति कहा जाता है। आयोग ने 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को 30 दिसंबर को पेश होने का निर्देश दिया है।

विज्ञापन


आयोग ने कहा कि सांविधानिक प्रावधानों और अदालतों के निर्देशों के बावजूद कई जगहों पर निर्वाचित महिलाएं केवल नाम की प्रमुख बनकर रह गई हैं। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें इस तरह की प्रथा को असांविधानिक और गैरकानूनी बताया गया है। आगोय के अनुसार, यह व्यवस्था संविधान के 73वें और 74वें संशोधन व महिला आरक्षण के उद्देश्य को कमजोर करती है और समानता व गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है।

विज्ञापन
विज्ञापन
पहले 9 सितंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन केवल कुछ राज्यों ने ही जवाब दिया। अब आयोग ने 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पंचायती और शहरी विकास विभागों के प्रमुख सचिवों को 30 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed