{"_id":"590274f94f1c1be959c0cf94","slug":"ngt-will-decide-the-future-of-10-year-old-diesel-vehicles","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनजीटी जल्द तय करेगा 10 वर्ष पुराने डीजल वाहनों का भविष्य ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
एनजीटी जल्द तय करेगा 10 वर्ष पुराने डीजल वाहनों का भविष्य
amarujala.com- Presented by: संदीप भ्ाट्ट
Updated Fri, 28 Apr 2017 04:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) दिल्ली-एनसीआर में 10 वर्ष से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों का भविष्य जल्द ही तय करेगा। एनजीटी में केंद्र अपनी इस दलील पर टिका है कि वायु प्रदूषण में पुराने डीजल वाहनों की हिस्सेदारी बेहद कम है।
साथ ही प्रदूषण में सिर्फ डीजल वाहन ही जिम्मेदार नहीं हैं। ऐसे में उन्हें सिर्फ उम्र के आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए। एनजीटी ने इस अंतिम निष्कर्ष और दलीलों को सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने वर्धमान कौशिक बनाम भारत सरकार मामले में बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। एनजीटी में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से पेश एडीशनल सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद ने कहा कि डीजल वाहनों को लेकर एक प्रकार का मिथक तैयार किया गया है कि वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ वही जिम्मेदार हैं।
विज्ञापन
डीजल के अलावा सीएनजी व पेट्रोल भी वायु प्रदूषण करते हैं। एएसजी ने कहा कि पेट्रोल के मुकाबले में डीजल कई मामलों में बेहतर है। मसलन डीजल से पर्टिकुलेट मैटर (हवा में मौजूद बारीक धूल कण) और नाइट्रोजन ऑक्साइट पेट्रोल के मुकाबले कम निकलते हैं।
एएसजी ने अपनी दलील में 10 साल से ज्यादा पुराने वाहनों के प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि सिर्फ डीजल प्रदूषण फैलाने वाला ईंधन नहीं है। पेट्रोल वाहनों के मुकाबले डीजल वाहनों की वजह से कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन 10 से 15 फीसदी कम होता है। सालाना हिसाब से कार्बन उत्सर्जन कटौती में डीजल वाहन अहम साबित हो सकते हैं।
एएसजी पिंकी आनंद ने दिल्ली सरकार के सम-विषम योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में इस योजना की वजह से प्रदूषण में कोई कमी नहीं आई। सीपीसीबी की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है। वाहनों की संख्या सड़क पर घटाए जाने से प्रदूषण स्तर में कोई कमी नहीं आई है। मालूम हो कि एनजीटी ने 26 नवंबर 2014 को दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
विज्ञापन
साथ ही प्रदूषण में सिर्फ डीजल वाहन ही जिम्मेदार नहीं हैं। ऐसे में उन्हें सिर्फ उम्र के आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए। एनजीटी ने इस अंतिम निष्कर्ष और दलीलों को सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।
विज्ञापन
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने वर्धमान कौशिक बनाम भारत सरकार मामले में बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। एनजीटी में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से पेश एडीशनल सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद ने कहा कि डीजल वाहनों को लेकर एक प्रकार का मिथक तैयार किया गया है कि वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ वही जिम्मेदार हैं।
विज्ञापन
डीजल के अलावा सीएनजी व पेट्रोल भी वायु प्रदूषण करते हैं। एएसजी ने कहा कि पेट्रोल के मुकाबले में डीजल कई मामलों में बेहतर है। मसलन डीजल से पर्टिकुलेट मैटर (हवा में मौजूद बारीक धूल कण) और नाइट्रोजन ऑक्साइट पेट्रोल के मुकाबले कम निकलते हैं।
एएसजी ने अपनी दलील में 10 साल से ज्यादा पुराने वाहनों के प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि सिर्फ डीजल प्रदूषण फैलाने वाला ईंधन नहीं है। पेट्रोल वाहनों के मुकाबले डीजल वाहनों की वजह से कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन 10 से 15 फीसदी कम होता है। सालाना हिसाब से कार्बन उत्सर्जन कटौती में डीजल वाहन अहम साबित हो सकते हैं।
एएसजी पिंकी आनंद ने दिल्ली सरकार के सम-विषम योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में इस योजना की वजह से प्रदूषण में कोई कमी नहीं आई। सीपीसीबी की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है। वाहनों की संख्या सड़क पर घटाए जाने से प्रदूषण स्तर में कोई कमी नहीं आई है। मालूम हो कि एनजीटी ने 26 नवंबर 2014 को दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।