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हिमालय में जल प्रलय की आहट: ग्लेशियर झीलों के बढ़ते आकार पर एनजीटी ने जताई चिंता, केंद्र व अन्य को नोटिस जारी

Tue, 26 Nov 2024 03:17 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 26 Nov 2024 03:17 PM IST
सार

एनजीटी ने बढ़ते तापमान के कारण पिछले 13 वर्षों में ग्लेशियर झीलों में लगभग 10.81 प्रतिशत की वृद्धि दिखाने वाली एक समाचार रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया। 

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NGT issues notice to Centre and others on Rapid increase of Himalayan glacial lakes
ग्लेशियर पर लगातार संकट मंडरा रहा - फोटो : Istock

विस्तार

हिमालय में मौजूद ग्लेशियर पर लगातार संकट मंडरा रहा है। जहां ग्लेशियर तेजी से तो पिघल ही रहे हैं यानी साल दर साल पीछे जा रहे हैं, वहीं हिमालयी क्षेत्र में मौजूद झीलों का आकार भी तेजी से बढ़ रहा है। अब प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते जोखिम पर चिंता जताते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ग्लेशियर झीलों के विस्तार से जुड़े एक मामले में केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया है। 

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नदियों में अचानक पानी बढ़ने से होगा बड़ा खतरा
एनजीटी ने बढ़ते तापमान के कारण पिछले 13 वर्षों में ग्लेशियर झीलों में लगभग 10.81 प्रतिशत की वृद्धि दिखाने वाली एक समाचार रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया। रिपोर्ट के अनुसार, तापमान में वृद्धि के कारण ग्लेशियरों के पिघलने से बड़ी हिमनद झीलों का निर्माण हुआ है, जिनमें अधिक पानी जमा हो गया है। नदियों में पानी अचानक बढ़ने पर बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ गया है। इसलिए भविष्य की चुनौती को अभी से देखकर हम सभी को सतर्क हो जाना चाहिए।
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हिमनद झीलों का सतह क्षेत्र बढ़ा
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 19 नवंबर को जारी एक आदेश में कहा, 'रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में हिमनद झीलों का सतह क्षेत्र 2011 से 2024 तक 33.7 प्रतिशत बढ़ गया है।'
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कहा कि रिपोर्ट ने इन झीलों में अचानक पानी बढ़ने के खतरे को सामने रखा है, जिससे हिमनद झील के बाढ़ (जीएलओएफ) का खतरा बढ़ गया है, जो निचले इलाकों के समुदायों, बुनियादी ढांचे और जैव विविधता के लिए विनाशकारी हो सकता है।

67 झीलों में वृद्धि दर्ज
रिपोर्ट में भारत में 67 झीलों की पहचान की गई है, जिन्होंने सतह क्षेत्र में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी है। इन्हें संभावित जीएलओएफ के लिए उच्च जोखिम श्रेणी में रखा गया है। सबसे उल्लेखनीय विस्तार लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में देखा गया है।

अधिकरण ने कहा कि रिपोर्ट में संभावित नुकसान को कम करने के लिए निगरानी बढ़ाने, पूर्व चेतावनी प्रणाली और बाढ़ प्रबंधन रणनीतियों में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। उसने कहा कि यह मामला जैव विविधता अधिनियम, जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन का संकेत देता है।


इन लोगों को नोटिस जारी
एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान के निदेशक और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया। अदालत ने प्रतिवादियों या पक्षों को 10 मार्च को अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले अपने जवाब या जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

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