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डिजिटल इंडिया: खूब इंटरनेट इस्तेमाल कर रही भारतीय महिलाएं, दो साल में दोगुनी हुई संख्या; बैंक खाते भी बढ़े
Sat, 30 May 2026 02:35 AM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sat, 30 May 2026 02:35 AM IST
सार
भारत की महिलाएं तेजी से डिजिटल दुनिया से जुड़ रही हैं। NFHS-6 के अनुसार, इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत दो साल में 33.3% से बढ़कर 64.3% हो गया। बैंक खाते और मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है, जो उनके बढ़ते आर्थिक और डिजिटल सशक्तिकरण की तस्वीर दिखाती है।
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भारत में तेजी से डिजिटल हो रही हैं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश में महिलाओं की डिजिटल पहुंच और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में बड़ी प्रगति दर्ज की गई है। शुक्रवार को जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगभग दोगुनी हो गई है।
64% से ज्यादा महिलाएं अब इंटरनेट से जुड़ीं
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019-21 के दौरान केवल 33.3 प्रतिशत महिलाओं ने कभी न कभी इंटरनेट का इस्तेमाल किया था। वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 64.3 प्रतिशत पहुंच गया। यानी अब देश की लगभग दो-तिहाई महिलाएं इंटरनेट की दुनिया से जुड़ चुकी हैं। विशेषज्ञ इसे महिलाओं की बढ़ती डिजिटल भागीदारी और तकनीक तक आसान पहुंच का संकेत मान रहे हैं। सिर्फ इंटरनेट ही नहीं, महिलाओं की आर्थिक स्थिति में भी सुधार दिखाई दिया है।
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सर्वे के अनुसार, बैंक या बचत खाते रखने वाली महिलाओं की संख्या 78.6 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई है। वहीं खुद का मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 53.9 से बढ़कर 63.6 हो गया है। यह बदलाव बताता है कि महिलाएं अब वित्तीय और डिजिटल दोनों स्तरों पर पहले से अधिक आत्मनिर्भर बन रही हैं।
किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़ी सकारात्मक तस्वीर
रिपोर्ट में किशोरियों और युवतियों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई है। 15 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म उत्पादों के इस्तेमाल का प्रतिशत 77.6 से बढ़कर 79.2 हो गया है। सरकार का कहना है कि मासिक धर्म स्वच्छता योजना और जनऔषधि केंद्रों के जरिए सस्ते सैनिटरी उत्पाद उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट में इन बीमारियों को लेकर दी गई चेतावनी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सर्वे के नतीजे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच में लगातार सुधार को दर्शाते हैं। हालांकि रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियां, असंतुलित जीवनशैली और बढ़ता मोटापा नई चुनौतियों के रूप में उभर रहे हैं।
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सर्वे में देश के 715 जिलों के करीब 6.79 लाख परिवार शामिल
यह सर्वे 2023-24 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की देखरेख में किया गया। अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान इसकी नोडल एजेंसी रही। सर्वे में देश के 715 जिलों के करीब 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया, जिससे स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए गए। रिपोर्ट से साफ है कि डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन जैसी पहलों का असर अब देश की महिलाओं के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इंटरनेट, मोबाइल फोन और बैंकिंग सेवाओं तक बढ़ती पहुंच महिलाओं को नए अवसरों से जोड़ रही है और उन्हें पहले से अधिक सशक्त बना रही है।
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64% से ज्यादा महिलाएं अब इंटरनेट से जुड़ीं
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019-21 के दौरान केवल 33.3 प्रतिशत महिलाओं ने कभी न कभी इंटरनेट का इस्तेमाल किया था। वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 64.3 प्रतिशत पहुंच गया। यानी अब देश की लगभग दो-तिहाई महिलाएं इंटरनेट की दुनिया से जुड़ चुकी हैं। विशेषज्ञ इसे महिलाओं की बढ़ती डिजिटल भागीदारी और तकनीक तक आसान पहुंच का संकेत मान रहे हैं। सिर्फ इंटरनेट ही नहीं, महिलाओं की आर्थिक स्थिति में भी सुधार दिखाई दिया है।
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सर्वे के अनुसार, बैंक या बचत खाते रखने वाली महिलाओं की संख्या 78.6 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई है। वहीं खुद का मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 53.9 से बढ़कर 63.6 हो गया है। यह बदलाव बताता है कि महिलाएं अब वित्तीय और डिजिटल दोनों स्तरों पर पहले से अधिक आत्मनिर्भर बन रही हैं।
किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़ी सकारात्मक तस्वीर
रिपोर्ट में किशोरियों और युवतियों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई है। 15 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म उत्पादों के इस्तेमाल का प्रतिशत 77.6 से बढ़कर 79.2 हो गया है। सरकार का कहना है कि मासिक धर्म स्वच्छता योजना और जनऔषधि केंद्रों के जरिए सस्ते सैनिटरी उत्पाद उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट में इन बीमारियों को लेकर दी गई चेतावनी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सर्वे के नतीजे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच में लगातार सुधार को दर्शाते हैं। हालांकि रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियां, असंतुलित जीवनशैली और बढ़ता मोटापा नई चुनौतियों के रूप में उभर रहे हैं।
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सर्वे में देश के 715 जिलों के करीब 6.79 लाख परिवार शामिल
यह सर्वे 2023-24 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की देखरेख में किया गया। अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान इसकी नोडल एजेंसी रही। सर्वे में देश के 715 जिलों के करीब 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया, जिससे स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए गए। रिपोर्ट से साफ है कि डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन जैसी पहलों का असर अब देश की महिलाओं के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इंटरनेट, मोबाइल फोन और बैंकिंग सेवाओं तक बढ़ती पहुंच महिलाओं को नए अवसरों से जोड़ रही है और उन्हें पहले से अधिक सशक्त बना रही है।