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कोरोना: आंध्रप्रदेश में मिला वायरस का नया स्वरुप, 15 गुना ज्यादा घातक
Wed, 05 May 2021 07:58 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला रिसर्च टीम, अमरावती
अमर उजाला रिसर्च टीम, अमरावती
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 05 May 2021 07:58 AM IST
सार
- सीसीएमबी वैज्ञानिको का तो यहां तक कहना है कि भारत में मिलने वाले स्ट्रेन वी1.617 और वी1.618 से भी अधिक संक्रामक है
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कोरोना वायरस
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विस्तार
कोरोना से जूझ रहे आंध्रप्रदेश में वैज्ञानिकों ने वायरस के 15 गुना तक एन440के स्ट्रेन का पता लगाया है। सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड माइक्रोबायोलॉजी (सीसीएमबी) वैज्ञानिकों कहना है कि विशाखापत्तनम समेत प्रदेश के अन्य राज्यों में महामारी का प्रकोप बहुत तेज है।
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एन440के नाम के स्ट्रेन से राज्य के कई इलाकों में तेजी से फैला संक्रमण
सीसीएमबी वैज्ञानिको का तो यहां तक कहना है कि भारत में मिलने वाले स्ट्रेन वी1.617 और वी1.618 से भी अधिक संक्रामक है। विशाखापत्तनम जिले के कलेक्टर वी. विनय चंद का कहना है की अभी यह इस स्पष्ट नहीं है कि राज्य में किस तरह का स्ट्रेन है, लेकिन ये कयास लगाया जा रहा है कि विशाखापत्तनम में मिलने वाला स्ट्रेन दूसरे स्ट्रेन से पूरी तरह अलग है।
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4 दिन बिगड़ जाती है हालत
आंध्रप्रदेश मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डाक्टर पीवी सुधाकर का कहना है कि हमने देखा है कि नए स्ट्रेन की चपेट में आने वालों में इन्कुवेशन पीरियड कम है, लेकिन तकलीफ तेजी से बढ़ रही है। वे बताते हैं कि इस स्ट्रेन की चपेट में आने वाला व्यक्ति 3 से 4 दिन में ही शरीर में आक्सीजन की कमी के कारण बेहोशी और अचेतावस्था की अवस्था में चला जाता है।। पहले ऐसी स्थिति में जाने को रोगी को 7 दिन का वक्त लगता था।
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पहली बार करनूल में मिला था यह वैरिएंट
एन440के को पहली बार आंध्रप्रदेश के करनूल में पाया गया था। इसके बाद यह तेलंगाना, महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में भी मिला। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसी साल जनवरी माह तक यह वैरिएंट काफी मिल रहा था। लेकिन फरवरी से इसमें बदलाव देखने को मिल रहा है और मार्च व अप्रैल में मिले सैंपल की जांच से पता चला है कि यह अब गायब होने जा रहा है।
लेकिन विशेषज्ञ बोले अब कुंद पड़ी आंध्र प्रदेश के वेरिएंट की धार
आंध्र प्रदेश के नए वैरिएंट पर विशेषज्ञों का कहना है कि आप इस की धार कुंद पड़ रही है। जीनोम सीक्वेंसिंग से पता चल रहा है कि कोरोना वायरस का यह वैरिएंट कम सामने आ रहा है। हालांकि वी1617 और वी117 नामक वैरिएंट अब भी चिंता के कारण बने हुए हैं।
हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के निदेशक डॉ राकेश मिश्रा का कहना है कि एन440 के वैरिएंट को लेकर गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है। वर्तमान में इस वैरीएंट के मामले कम देखने को मिल रहे हैं। वहीं सीसीएमबी के ही दिव्य तेज सोपति ने बताया कि दूसरी लहर के पीछे एन440 के वैरिएंट को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। हालांकि ये वैरीएंट दक्षिणी राज्यों के लिए रोज जरूर चिंता का विषय है।
इस वैरिएंट में ज्यादातर राज्यों में स्वरूप बदल लिया है। अब भी 1617 और वी117 के रूप में देखा जा रहा है। अगर महाराष्ट्र से मिले सैंपल की स्थिति देखें तो वहां वी1617 वैरिएंट की बढ़ोतरी बीते मार्च की तुलना में महामारी में देखने को मिली थी। हमने दोबारा जब समीक्षा की तो पता चला कि एन440 के वैरिएंट के मामलों में वहां कमी आई है।