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कोरोना का नया रूप: ब्रिटेन से आने वाले हर शख्स के सैंपल की होगी जीनोम सीक्वेंसिंग

Wed, 23 Dec 2020 06:04 AM IST
Kuldeep Singh परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Wed, 23 Dec 2020 06:04 AM IST
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New Coronavirus strain, every person coming from Britain will be genome sequencing
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

कोरोना वायरस का नया रूप मिलने के बाद ब्रिटेन से आने वाले सभी लोगों के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। नए स्ट्रेन के बारे में पता लगाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि भारत में अब तक 16 करोड़ से ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है। लेकिन इनमें से केवल 4000 सैंपल की ही जीनोम सीक्वेंसिंग हो पाई है।

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राज्यों से समय पर सैंपल नहीं मिलने से अब तक सीक्वेंसिंग का काम चल रहा था धीमा
जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए यह पता चलता है कि सैंपल में मौजूद कोरोना वायरस का स्ट्रेन कौन सा है। जिन 4000 सैंपल की सीक्वेंसिंग की गई थी उनमें 10 तरह के कोरोना वायरस भी मिले, जिनमें से एक ए3आई रूप है जो भारत में सबसे ज्यादा तेजी से प्रसारित होने वाला रूप है। हैदराबाद स्थित सीसीएमबी की लैब में जून से ही सीक्वेंसिंग चल रही है।
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सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने कहा ब्रिटेन में जो नया रूप मिला है वह भारत आने वालोें में है या नहीं? इसका पता आरटी-पीसीआर या किसी अन्य जांच से नहीं लगाया जा सकता इसका पता तभी चलेगा जब सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग होगी।
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सभी देश ऑनलाइन पोर्टल पर दे रहे जानकारी
डॉ. मिश्रा ने बताया कि लोक डाउन के वक्त ही दुनियाभर में जिनोम सीक्वेंसिंग पर काम हो शुरू हो चुका है। एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है जिस पर दुनिया के सभी देश अपने अपने यहां के जिनोम सीक्वेंसिंग की जानकारी दे रहे हैं। दुनिया भर से करीब तीन लाख सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग हो चुकी है। इनमें अब तक 17 तरह के रूप का पता चल चुका है। इसमें से 10 भारत में हैं जो अलग-अलग देश से भारत लौटने वालों के जरिए देश में आया है। ब्रिटेन में जो नया रूप सामने आया है वह 18वां स्ट्रेन है।

राज्यों को होना होगा गंभीर तभी होगा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि जीनोम सीक्वेंसिंग के प्रति राज्यों को भी गंभीर होना पड़ेगा। ज्यादा से ज्यादा संख्या में सैंपल की सीक्वेंसिंग होने से कोरोना वायरस की सही स्थिति का पता चल सकता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो कोरोना संक्रमण को समझना मुश्किल होगा। अभी तक की स्थिति यह है कि ज्यादातर राज्य जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल लैब तक नहीं भेज पा रही हैं या फिर जो राज्य ऐसा कर रहे हैं वह काफी कम सैंपल भेज रहे हैं।

दिल्ली में मिला सबसे तेज फैलने वाला स्ट्रेन
महाराष्ट्र से 1218 सैंपल की सीक्वेंसिंग हुई है जिनमें से 1134 में ए2ए रूप मिला है। तेलंगाना में 672 में 564 और गुजरात में 622 में से 588 मरीजों में ए2ए रूप मिला है। लेकिन दिल्ली में अब तक 418 सैंपल की जिनोम सीक्वेंसिंग हुई है और इनमें से 245 में ए3ए ट्रेन पाया गया है। वायरस का यह रूप तेजी से फैलता है। इसलिए दिल्ली में कोरोना की तीन लहर देखने को मिल चुकी है।

कर्नाटक के 258 में से 59 मरीजों में ए3आई और 138 में ए2ए स्ट्रेन मिला है जबकि यहां 48 मरीजों के सैंपल में स्ट्रेन का पता नहीं चला। पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में अभी ए2ए स्ट्रेन सबसे ज्यादा है। लेकिन ओडिशा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां कोरोना मरीजों में बी4 स्ट्रेन भी काफी है। यह स्ट्रेन अन्य की तुलना में ज्यादा घातक है। हरियाणा के 118 में से 99 सैंपल ए2ए ग्रस्त हैं। उत्तराखंड के 115 में से 106 स्ट्रेन हैं।


20 राज्यों में 4118 सैंपल की सीक्वेंसिंग
देश के 20 राज्यों से अब तक 4118 सैंपल की सीक्वेंसिंग हो चुकी है। 35 लैब से आए इन सैंपल में 66.12 प्रतिशत पुरुष और 33.6 प्रतिशत महिलाओं के सैंपल हैं। अभी तक यह पता चला है कि भारत के कोरोना वायरस में सबसे ज्यादा ए2ए रूप है जिसकी मारक क्षमता अन्य रूपों की तुलना में कम है। लॉकडाउन से पहले तक की बात करें तो देश में बी4, बी, ए3ए, ए1ए, बी1 रूप संक्रमितों में आ चुके थे।

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