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Subhas Chandra Bose: नेताजी के पोते ने की पीएम मोदी से अपील, जापान से उनके अवशेष को वापस लाने की मांग
Sat, 17 Aug 2024 03:26 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Sat, 17 Aug 2024 03:26 PM IST
सार
नेताजी के पोते ने बताया कि 1956 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने आईएनए के अनुभवी जनरल शाह नवाज खान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। सरकार द्वारा नियुक्त खोसला आयुक्त की 1974 की रिपोर्ट ने शाह नवाज के निष्कर्षों की पुष्टि की।
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चंद्र कुमार बोस
- फोटो : ANI
विस्तार
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्वतंत्रता सेनानी (नेताजी) के अवशेष को जापान से भारत वापस लाने की अपील की। नेताजी का अवशेष जापान के रेंकोजी मंदिर में रखा हुआ है। चंद्र कुमार बोस इससे पहले भी पीएम मोदी से नेताजी के अवशेष को जापान से भारत लाने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि नेताजी का जीवन अब दास्तां बन चुका है।
चंद्र कुमार बोस ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा, "नेताजी की पुण्यतिथि (18 अगस्त) के पूर्व संध्या मैं आपसे एकबार फिर उनके अवशेष को रेंकोजी मंदिर से भारत वापस लाने की अपील करता हूं। वह अपने व्यक्तित्व, प्रतिभा, साहस, निस्वार्थता और भारत की आजादी के लिए अटूट समर्पण के लिए न केवल भारत में बल्कि हर जगह स्वतंत्रता-प्रेमी लोगों के दिल में हमेशा के लिए नायक के रूप में बसे हुए हैं।"
उन्होंने कहा कि अगस्त 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के बाद एक जापानी सैन्य विमान से यात्रा करने के दौरान हवाई दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। उन्होंने आगे कहा, "उनके भाई शरत चंद्र बोस और विएना में विधवा एमिलि समेत परिवार के सदस्य नेताजी की वापसी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन 18 अगस्त 1945 के बाद उनके जिंदा होने की किसी को कोई जानकारी नहीं मिली।"
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नेताजी के अवशेष को भारत वापस लाने की अपील
नेताजी के पोते ने बताया कि 1956 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने आईएनए के अनुभवी जनरल शाह नवाज खान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। उन्होंने आगे कहा, "पहली बार इस हादसे को लेकर और नेताजी की मृत्यु पर 11 गवाहों समेत विस्तृत जानकारी एक आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज की गई। सरकार द्वारा नियुक्त खोसला आयुक्त की 1974 की रिपोर्ट ने शाह नवाज के निष्कर्षों की पुष्टि की। तीसरे और अंतिम सरकार द्वारा नियुक्त मुखर्जी जांच आयोग 2005 ने दावा किया था कि नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में नहीं थी। उनके निष्कर्ष में त्रुटियां पाई गई, जिसके बाद भारत सरकार ने इसे खारिज कर दिया।"
चंद्र कुमार बोस ने अपनी चिट्ठी में कहा, "अब समय आ गया है। आपके (पीएम मोदी) नेतृत्व में भारत सरकार ने नेताजी से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक कर उसे बंद करने की पहल की। सभी फाइलों के जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि नेताजी का निधम 18 अगस्त 1945 को हुआ था। यह जरूरी है कि भारत सरकार की तरफ से एक अंतिम बयान दिया जाए, जिससे नेताजी की मृत्यु को लेकर अफवाह फैलाने वालों पर लगाम लगाया जा सके।" उन्होंने पीएम मोदी से अनुरोध किया कि अब नेताजी के अवशेष को भारत लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
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चंद्र कुमार बोस ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा, "नेताजी की पुण्यतिथि (18 अगस्त) के पूर्व संध्या मैं आपसे एकबार फिर उनके अवशेष को रेंकोजी मंदिर से भारत वापस लाने की अपील करता हूं। वह अपने व्यक्तित्व, प्रतिभा, साहस, निस्वार्थता और भारत की आजादी के लिए अटूट समर्पण के लिए न केवल भारत में बल्कि हर जगह स्वतंत्रता-प्रेमी लोगों के दिल में हमेशा के लिए नायक के रूप में बसे हुए हैं।"
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उन्होंने कहा कि अगस्त 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के बाद एक जापानी सैन्य विमान से यात्रा करने के दौरान हवाई दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। उन्होंने आगे कहा, "उनके भाई शरत चंद्र बोस और विएना में विधवा एमिलि समेत परिवार के सदस्य नेताजी की वापसी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन 18 अगस्त 1945 के बाद उनके जिंदा होने की किसी को कोई जानकारी नहीं मिली।"
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नेताजी के अवशेष को भारत वापस लाने की अपील
नेताजी के पोते ने बताया कि 1956 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने आईएनए के अनुभवी जनरल शाह नवाज खान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। उन्होंने आगे कहा, "पहली बार इस हादसे को लेकर और नेताजी की मृत्यु पर 11 गवाहों समेत विस्तृत जानकारी एक आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज की गई। सरकार द्वारा नियुक्त खोसला आयुक्त की 1974 की रिपोर्ट ने शाह नवाज के निष्कर्षों की पुष्टि की। तीसरे और अंतिम सरकार द्वारा नियुक्त मुखर्जी जांच आयोग 2005 ने दावा किया था कि नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में नहीं थी। उनके निष्कर्ष में त्रुटियां पाई गई, जिसके बाद भारत सरकार ने इसे खारिज कर दिया।"
चंद्र कुमार बोस ने अपनी चिट्ठी में कहा, "अब समय आ गया है। आपके (पीएम मोदी) नेतृत्व में भारत सरकार ने नेताजी से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक कर उसे बंद करने की पहल की। सभी फाइलों के जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि नेताजी का निधम 18 अगस्त 1945 को हुआ था। यह जरूरी है कि भारत सरकार की तरफ से एक अंतिम बयान दिया जाए, जिससे नेताजी की मृत्यु को लेकर अफवाह फैलाने वालों पर लगाम लगाया जा सके।" उन्होंने पीएम मोदी से अनुरोध किया कि अब नेताजी के अवशेष को भारत लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
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