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विमान हादसे में बच गए थे नेताजी, यही कहता है दस्तावेज
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 15 Mar 2016 03:23 PM IST
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नेताजी सुभाष चंद बोस की मौत को लेकर आमतौर पर आजादी के बाद से ज्यादातर सरकारें इस बात पर एकमत रही हैं कि विमान हादसे में उनकी मौत नहीं हुई थी। लेकिन अब इससे जुड़े कुछ दस्तावेज भी सामने आए हैं जो यह दावा करते हैं कि कथित विमान हादसे में नेताजी बच गए थे। यह दस्तावेज भी पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के दौर का है। इतिहासकार प्रतुल्ल चन्द्र गुप्ता की 1949-50 में आई किताब में यह दावा किया गया था कि विमान हादसे में नेताजी बच निकले थे।
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टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार यूपीए सरकार के दौरान 28.06.2011 को विदेश मंत्रालय की ओर से रक्षा मंत्रालय को भेजे गए गोपनीय नोट में भी इसका जिक्र था जिस पर NGO नॉट टू गो आउट ऑफ ऑफिस का मार्क लगा था। बताया जाता है कि नेहरू सरकार के समय रक्षा मंत्रालय के इतिहास विभाग की ओर से इस किताब को मंजूरी दी गई थी।
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इस साल बीते 23 जनवरी को जब मोदी सरकार ने नेताजी से जुड़े दस्तावेजों को लंबे इंतजार के बाद सार्वजनिक किया था तब आजाद हिंद फौज के एकमात्र अधिकारिक इतिहास ए हिस्ट्री ऑफ इंडियन नेशनल आर्मी 1942-45 पर कोई जिक्र नहीं किया गया। जिससे यह महत्वपूर्ण तथ्य बाहर नहीं आ सका।
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दस्तावेजों को नेहरू सरकार ने दी थी सहमति
इससे पूर्व दिल्ली हाइकोर्ट ने भी साल 2011 में भी मनमोहन सिंह सरकार को जुलाई 2011 से पहले इन दस्तावेजों को प्रकाशित करने का आदेश दिया था। सरकार इस पर सहमत भी थी लेकिन यह मामला दबा रह गया।
विदेश मंत्रालय ने साल 2011 में इसकी पांडुलिपी को मंजूरी देते हुए रक्षा मंत्रालय को भेज दिया था। विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी की थी कि ये दस्तावेज 1942-45 के दौरान के हैं इसलिए 60 साल बाद इनके प्रकाशन से किसी अन्य देश के साथ भारत के संबंधों पर असर नहीं पड़ना चाहिए। 22 जून 2011 को जारी हुए इन दस्तावेजों पर तत्कालीन पूर्वी एशिया मामलों के संयुक्त सचिव गौतम बांबवाले के हस्ताक्षर भी हैं।
विदेश मंत्रालय ने साल 2011 में इसकी पांडुलिपी को मंजूरी देते हुए रक्षा मंत्रालय को भेज दिया था। विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी की थी कि ये दस्तावेज 1942-45 के दौरान के हैं इसलिए 60 साल बाद इनके प्रकाशन से किसी अन्य देश के साथ भारत के संबंधों पर असर नहीं पड़ना चाहिए। 22 जून 2011 को जारी हुए इन दस्तावेजों पर तत्कालीन पूर्वी एशिया मामलों के संयुक्त सचिव गौतम बांबवाले के हस्ताक्षर भी हैं।