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नेपाल हिंसा: पीएम ओली और विपक्ष ने बुलाई अहम बैठक, राजशाही समर्थकों पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई
Sun, 30 Mar 2025 04:59 PM IST
राहुल कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 30 Mar 2025 04:59 PM IST
सार
यह बैठक हाल की राजनीतिक घटनाओं और संसद तथा सरकार के संचालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। यह बैठक प्रधानमंत्री ओली और सीपीएन (माओवादी केंद्र) के अध्यक्ष तथा मुख्य विपक्षी नेता पुष्प कमल दहल के बीच हुई टेलीफोन वार्ता के बाद आयोजित की जा रही है।
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नेपाल में हिंसा
- फोटो : PTI
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विस्तार
नेपाल में हाल ही में राजशाही समर्थकों ने राजधानी काठमांडू में जमकर उत्पात मचाया था। जिसके बाद नेपाल सरकार ने कई कड़े फैसले लिए हैं। इसी बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा करने के लिए आज शाम 6 बजे (स्थानीय समयानुसार) संसद में मौजूद दलों के साथ बैठक बुलाई है। प्रधानमंत्री सचिवालय के अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक में दक्षिणपंथी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) को आमंत्रित नहीं किया गया है।
नेपाली कांग्रेस के मुख्य सचेतक श्याम कुमार का कहना है कि यह बैठक हाल की राजनीतिक घटनाओं और संसद तथा सरकार के संचालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। यह बैठक प्रधानमंत्री ओली और सीपीएन (माओवादी केंद्र) के अध्यक्ष तथा मुख्य विपक्षी नेता पुष्प कमल दहल के बीच हुई टेलीफोन वार्ता के बाद आयोजित की जा रही है।
बैठक में शुक्रवार को हुई राजशाही समर्थक रैली के मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है। यह विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में आगजनी और तोड़फोड़ की थी। वे नेपाल में राजशाही की बहाली और इसे हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर रहे थे।
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इन प्रदर्शनों का नेतृत्व राजशाही समर्थक व्यक्तियों ने किया था। जिनमें नवराज सुबेदी, विवादास्पद मेडिकल उद्यमी दुर्गा प्रसाई और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल थे। गणतंत्र समर्थकों ने इस हिंसा की कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सरकार से इस घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की अपील भी की है।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसदों के बीच टकराव
नेपाल की प्रतिनिधि सभा में रविवार को सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सांसदों के बीच राजशाही और बिजली प्राधिकरण प्रमुख को हटाने के मुद्दे पर तीखी बहस हुई। रविवार को सुबह 11 बजे (स्थानीय समयानुसार) निर्धारित संसद सत्र दो घंटे की देरी से शुरू हुआ, लेकिन इन दो विवादास्पद मुद्दों पर बहस के कारण सत्र बाधित हो गया।
संसद अध्यक्ष देवराज घिमिरे ने सांसदों से अनुरोध किया कि वे अपनी सीटों पर बैठें ताकि कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके, लेकिन विपक्षी सांसदों ने उनकी बात नहीं मानी। इसके बाद सत्ता पक्ष के सांसद अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे सत्र को बाधित कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर था कि शुक्रवार की हिंसा की घटनाओं को संसद में उठाया जा सकता है।
संसद सचिवालय द्वारा जारी एक आंशिक रूप से म्यूट वीडियो में सत्तारूढ़ दलों के सांसदों को बैठक में "राजशाही" शब्द का उपयोग करने वालों को दंडित करने की मांग करते हुए देखा गया।
विपक्षी सांसद और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन को वीडियो में इशारा करते हुए देखा गया कि यदि राजशाही का नाम लेना अपराध है, तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए। आरपीपी राजशाही समर्थक प्रदर्शनों में सबसे आगे रहा है और कई बार नेपाल में राजशाही की पुनर्स्थापना की मांग करते हुए शक्ति प्रदर्शन कर चुका है। रविवार के सत्र का सीधा प्रसारण नहीं किया गया। संसद सचिवालय ने तकनीकी खामियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। बाद में हंगामे के कारण सत्र को स्थगित कर दिया गया।
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नेपाली कांग्रेस के मुख्य सचेतक श्याम कुमार का कहना है कि यह बैठक हाल की राजनीतिक घटनाओं और संसद तथा सरकार के संचालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। यह बैठक प्रधानमंत्री ओली और सीपीएन (माओवादी केंद्र) के अध्यक्ष तथा मुख्य विपक्षी नेता पुष्प कमल दहल के बीच हुई टेलीफोन वार्ता के बाद आयोजित की जा रही है।
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बैठक में शुक्रवार को हुई राजशाही समर्थक रैली के मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है। यह विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में आगजनी और तोड़फोड़ की थी। वे नेपाल में राजशाही की बहाली और इसे हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर रहे थे।
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इन प्रदर्शनों का नेतृत्व राजशाही समर्थक व्यक्तियों ने किया था। जिनमें नवराज सुबेदी, विवादास्पद मेडिकल उद्यमी दुर्गा प्रसाई और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल थे। गणतंत्र समर्थकों ने इस हिंसा की कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सरकार से इस घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की अपील भी की है।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसदों के बीच टकराव
नेपाल की प्रतिनिधि सभा में रविवार को सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सांसदों के बीच राजशाही और बिजली प्राधिकरण प्रमुख को हटाने के मुद्दे पर तीखी बहस हुई। रविवार को सुबह 11 बजे (स्थानीय समयानुसार) निर्धारित संसद सत्र दो घंटे की देरी से शुरू हुआ, लेकिन इन दो विवादास्पद मुद्दों पर बहस के कारण सत्र बाधित हो गया।
संसद अध्यक्ष देवराज घिमिरे ने सांसदों से अनुरोध किया कि वे अपनी सीटों पर बैठें ताकि कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके, लेकिन विपक्षी सांसदों ने उनकी बात नहीं मानी। इसके बाद सत्ता पक्ष के सांसद अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे सत्र को बाधित कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर था कि शुक्रवार की हिंसा की घटनाओं को संसद में उठाया जा सकता है।
संसद सचिवालय द्वारा जारी एक आंशिक रूप से म्यूट वीडियो में सत्तारूढ़ दलों के सांसदों को बैठक में "राजशाही" शब्द का उपयोग करने वालों को दंडित करने की मांग करते हुए देखा गया।
विपक्षी सांसद और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन को वीडियो में इशारा करते हुए देखा गया कि यदि राजशाही का नाम लेना अपराध है, तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए। आरपीपी राजशाही समर्थक प्रदर्शनों में सबसे आगे रहा है और कई बार नेपाल में राजशाही की पुनर्स्थापना की मांग करते हुए शक्ति प्रदर्शन कर चुका है। रविवार के सत्र का सीधा प्रसारण नहीं किया गया। संसद सचिवालय ने तकनीकी खामियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। बाद में हंगामे के कारण सत्र को स्थगित कर दिया गया।