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नेपाल सरकार का दावा, एवरेस्ट पर ट्रैफिक जाम’ पर्वतारोहियों की मौत का अकेला कारण नहीं
Fri, 14 Jun 2019 04:20 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 14 Jun 2019 04:20 AM IST
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नेपाल सरकार ने माउंट एवरेस्ट पर गए पर्वतारोहियों की मौत के कारण की जांच शुरू कर दी है। हालांकि सरकार ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर ट्रैफिक जाम के कारण पर्वतारोहियों की मौत का एकमात्र कारण नहीं है। सरकार कहना है कि मौत की और कई वजहें हो सकती हैं, जैसे उच्च ऊंचाई की बीमारी, रक्त चाप का बढ़ जाना, अन्य स्वास्थ्य कारण और मौसम का प्रतिकूल होना। गौरतलब है कि इस सीजन माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पर्वतारोहियों की मौत ज्यादा हुई हैं, जिनमें कुछ की मौत चढ़ाई के दौरान हुईं और कुछ की मौत यात्रा के दौरान ट्रैफिक जाम में हुईं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस सीजन माउंट एवरेस्ट पर मौत की संख्या 11 बताया है, जो 2015 के बाद से सबसे ज्यादा घातक है। हालांकि नेपाल पर्यटन मंत्रालय ने अब तक 9 पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि की है, जिनमें 8 भारतीय हैं। पर्यटन विभाग (डीओटी) के महानिदेशक दांडू राज घिमिरे ने कहा कि ‘माउंट एवरेस्ट पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा बताई गई मौतों की संख्या के बारे में गलत जानकारी को लेकर हम सकते हैं। ‘ट्रैफिक जाम’ मौत का कारण नहीं है।
ट्रैफिक जाम तब होता है जब कई पर्वतारोहियों का जत्था एक ही समय एक साथ 8000 मीटर की खतरनाक शिखर पर चढ़ने का अभियान चलाते हैं। यह क्षेत्र ‘डेथ जोन’ के रूप में जाना जाता है। पर्वतारोहियों के मौत के कई कारण हो सकते हैं, जैसे उच्च ऊंचाई की बीमारी, रक्त चाप का बढ़ जाना, अन्य स्वास्थ्य कारण और मौसम का प्रतिकूल होना।’ डीओटी के अनुसार 2017 में 366 परमिट जारी किए गए थे जबकि 2018 में 346 पर्वतारोहियों को परमिट दिए गए थे। पिछले साल की तुलना में इस साल दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने के लिए 381 परमिट जारी किए गए हैं।
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अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस सीजन माउंट एवरेस्ट पर मौत की संख्या 11 बताया है, जो 2015 के बाद से सबसे ज्यादा घातक है। हालांकि नेपाल पर्यटन मंत्रालय ने अब तक 9 पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि की है, जिनमें 8 भारतीय हैं। पर्यटन विभाग (डीओटी) के महानिदेशक दांडू राज घिमिरे ने कहा कि ‘माउंट एवरेस्ट पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा बताई गई मौतों की संख्या के बारे में गलत जानकारी को लेकर हम सकते हैं। ‘ट्रैफिक जाम’ मौत का कारण नहीं है।
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ट्रैफिक जाम तब होता है जब कई पर्वतारोहियों का जत्था एक ही समय एक साथ 8000 मीटर की खतरनाक शिखर पर चढ़ने का अभियान चलाते हैं। यह क्षेत्र ‘डेथ जोन’ के रूप में जाना जाता है। पर्वतारोहियों के मौत के कई कारण हो सकते हैं, जैसे उच्च ऊंचाई की बीमारी, रक्त चाप का बढ़ जाना, अन्य स्वास्थ्य कारण और मौसम का प्रतिकूल होना।’ डीओटी के अनुसार 2017 में 366 परमिट जारी किए गए थे जबकि 2018 में 346 पर्वतारोहियों को परमिट दिए गए थे। पिछले साल की तुलना में इस साल दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने के लिए 381 परमिट जारी किए गए हैं।
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