लापरवाही: कोरोनाकाल में हिल स्टेशन पर क्यों बढ़ रही भीड़, क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान का स्वभाव होता है कि वह जो करना चाहता है वही महसूस करता है। वह दूसरों की देखा-देखी भी करने लगता है। हिल स्टेशन पर भीड़ बढ़ने की वजह भी यही है।
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कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच जिस तरह हिल स्टेशन और पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ जमा हो रही है, उससे एक बार फिर गंभीर स्थिति पैदा होने का खतरा मंडराने लगा है। लोग कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर जिस तरह पहाड़ों और पर्यटन स्थलों पर घूमने निकल पड़े हैं उसके पीछे का मनोविज्ञान यही कहता है कि लोगों को लगने लगा है कि अब सब ठीक है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि लोग एक-दूसरे की देखादेखी घूमने के लिए घरों से निकल पड़े हैं जबकि ऐसा करना न केवल उन्हें कोरोना संक्रमित कर सकता है बल्कि देश को एक बार फिर उसी स्थिति में ढकेल सकता है जैसा हमने दूसरी लहर के दौरान देखा था।
कोरोना की दूसरी लहर के कम होते ही लोग भारी संख्या में लोग नैनीताल, मसूरी, शिमला और कुल्लू-मनाली पहुंचने लगे हैं। लोग न केवल भीड़ इकट्ठा कर रहे हैं बल्कि बिना मास्क के घूम रहे हैं। उत्तराखंड के मसूरी के मशहूर केम्पटी फॉल का वीडियो बीते दिनों वायरल हुआ था, जहां झरने के नीचे सैकड़ों लोग एक साथ नहा रहे थे। इस वीडियो ने केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक को चिंता में डाल दिया। सरकार लोगों को बार-बार एहतियात बरतने की हिदायत दे रही है। महामारी टास्क फोर्स के प्रमुख ने भी फिर से चेतावनी दी है कि कोविड -19 की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है, और इस मामले में अगर लोग लापरवाही से व्यवहार करना जारी रखते हैं तो विस्फोट हो जाएगा।
इस बारे में हमने कुछ मनोवैज्ञानिकों से बात करके यह जानने की कोशिश है कि लोगों ने इस तरह का व्यवहार क्यों शुरू कर दिया है और अचानक इस तरह घूमने क्यों निकल पड़े हैं? जबकि लोगों ने हाल तक कोरोना की दूसरी लहर में गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना किया है।
क्या कहते हैं एम्स के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ राजेश सागर
डॉ राजेश सागर का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण लोग अपने घरों में बंद होने को मजबूर रहे, उनकी इच्छाएं दबी हुई थीं, जिसका असर लोगों की मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगा। इससे लोगों में बेचैनी, घबराहट और तनाव बढ़ने की शिकायतें मिलनी लगीं। अब जब अचानक सब कुछ खुल गया है, तो लोग अब खतरा उठाने को भी तैयार दिख रहे हैं। वे कहते हैं कि लोगों से मिलना-जुलना, समाज में सब के बीच रहना यह इंसान का स्वभाव है और इसी जरुरत को पूरा करने के लिए लोग इस तरह घरों से निकल पड़े हैं।
हालांकि उनका मानना है कि अभी जब कोरोना का खतरा टला नहीं है लोगों का इस तरह का व्यवहार सबको भारी परेशानी में डाल सकता है। उनके मुताबिक कोरोना के कारण पूरी दुनिया जिस तरह की स्थिति का सामना कर रही है ऐसे में हमें बहुत संयम और धैर्य से काम लेने की जरुरत है और बाहर घूमने के बजाए अपने परिवारवालों के साथ वक्त बिताना ज्यादा अच्छा है।
डॉ समीर पारिख की क्या है राय?
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक और मेंटल हेल्थ और बिहेवियरल साइंसेज के निदेशक डॉ समीर पारिख का मानना है कि इंसान का स्वभाव होता है कि वह जो करना चाहता है वही महसूस करता है। वह दूसरों की देखा-देखी भी करता है। हिल स्टेशन पर भीड़ बढ़ने की वजह भी यही है।
उनके मुताबिक कल तक लोग बहुत तनाव और दबाव में थे, अब सामान्य महसूस करना चाहते हैं, सामान्य जिंदगी में लौटना चाहते हैं। टीकाकरण चलने और केस कम होने से उन्हें कुछ लोगों के इस दावे में दम नजर आता है कि अब कोरोना चला गया है, बाहर खतरा टल गया है, हमें कुछ नहीं होगा। जबकि यही मानना और समझना हमारी सबसे बड़ी गलती है और हम एक बार फिर कोरोना के गंभीर खतरे को आवाज पुकार रहे हैं।