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एक और परीक्षा रद्द: देश में पेपर के लीक का क्या इतिहास, शिक्षा के दुश्मनों पर क्या हो सकती है कार्रवाई?

Tue, 12 May 2026 07:43 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 12 May 2026 07:43 PM IST
सार

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की तरफ से आयोजित कराई जाने वाली नीट-यूजी 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई है। सामने आया है कि नीट की तीन मई को हुई परीक्षा से पहले ही इसके पेपर के अधिकतर सवाल लीक हो गए थे। इसके बाद जो जांच हुई, उसके नतीजों को मद्देनजर रखते हुए न सिर्फ मेडिकल की इस सबसे बड़ी परीक्षा को रद्द किया गया, बल्कि इसकी जांच सीबीआई को भी सौंप दी गई।

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NEET UG 2026 Exam Cancelled after Paper Leak Questions Out NTA Know History of Paper Leak in India and states
नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट-अंडरग्रैजुएट (नीट-यूजी) 2026 को रद्द कर दिया गया है। इस परीक्षा में कई दिनों से धांधली के आरोप लग रहे थे। इसके बाद केंद्र सरकार के आदेश पर एनटीए ने मंगलवार (12 मई) को इस प्रवेश परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया। अब भारत में प्रवेश परीक्षाओं के लिए जिम्मेदार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) नीट की परीक्षा को दोबारा आयोजित करेगी। 
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इस बीच सरकार ने इस मामले की जांच को सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है, ताकि इस पूरी घटना की हर परत की ठीक ढंग से जांच की जा सके। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पहली बार नहीं है, जब भारत की किसी अहम परीक्षा को पेपर लीक के कारण रद्द करना पड़ा है। इससे जुड़ा एक पूरा इतिहास रहा है। यहां तक कि खुद नीट की परीक्षा एक बार इससे पहले भी धांधली के आरोपों के चलते विवादों में आ गई थी। हालांकि, तब इसे रद्द नहीं किया गया था। 
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इस घटनाक्रम के बीच यह जानना अहम है कि आखिर नीट-यूजी 2026 में पेपर लीक का खुलासा कैसे हुआ? भारत में पेपर लीक को लेकर अलग-अलग जगहों के आंकड़ों में क्या दावा है? पहले कौन-कौन सी अहम परीक्षाएं कब रद्द हुई हैं? जब किसी परीक्षा में इस तरह की धांधली सामने आती है तो इसके लिए कानूनी तौर पर किस तरह की कार्रवाई के प्रावधान हैं? आइये जानते हैं...
 

पहले जानें- नीट-यूजी 2026 में पेपर लीक का खुलासा कैसे हुआ?

नीट-यूजी 2026 में पेपर लीक का खुलासा मुख्य रूप से राजस्थान में एक गेस पेपर के वायरल होने और उसके आधार पर छात्रों की ओर से की गई शिकायतों से हुआ। इसकी टाइमलाइन कुछ इस तरह की रही...

 
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अब तक जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक, 6 मई को परीक्षा की आंसर की आने के बाद, छात्रों और कोचिंग संस्थानों के बीच ऑनलाइन चर्चाएं शुरू हुईं कि सर्कुलेट हुआ गेस पेपर असली प्रश्नपत्र से बहुत ज्यादा मिलता-जुलता था। वहीं, 7 मई 2026 को परीक्षा आयोजक एनटीए को राजस्थान और उत्तराखंड से परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के औपचारिक इनपुट मिले। 11 मई आते-आते कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि गेस पेपर के 120 से 150 सवाल (मुख्यतः बायोलॉजी और केमिस्ट्री के) असली पेपर से पूरी तरह मेल खाते थे। इस खुलासे के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरा।

गौरतलब है कि एसओजी की जांच जब सार्वजनिक हुई थी, तब दबाव बढ़ने पर 20 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। इससे पहले एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने पुष्टि की कि वायरल गेस पेपर में 410 सवाल थे, जिनमें से लगभग 120 सवाल असली परीक्षा से हूबहू मिलते थे।

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भारत में पेपर लीक को लेकर आंकड़े क्या कहते हैं? 


1. सरकारी आंकड़े
पेपर लीक के आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार का स्पष्ट रूप से कहना है कि शिक्षा मंत्रालय की तरफ से परीक्षा-विशिष्ट घटनाओं (जैसे पेपर लीक) का कोई भी डाटा केंद्रीय स्तर पर नहीं रखा जाता है। राज्यसभा में बीते साल किए गए एक सवाल, जिसमें पिछले पांच वर्षों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर की परीक्षाओं में हुए पेपर लीक की संख्या और उन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया था, का जवाब देते हुए, शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि अलग-अलग निकाय राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रवेश और भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करते हैं, इसलिए मंत्रालय इन घटनाओं का कोई केंद्रीकृत आंकड़ा नहीं रखता है।

दूसरी तरफ नीट जैसी परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने पेपर लीक की घटनाओं का कोई विस्तृत डाटा जारी नहीं किया है। इसके उलट नीट के 2024 के पेपर लीक को भी एनटीए ने आधिकारिक तौर पर पेपर लीक नहीं माना था और इसे अनुचित साधनों (अनफेयर मीन्स) का मामला बताया। 

2. मीडिया रिपोर्ट्स के आंकड़े
भारत में कई मीडिया संस्थानों ने पेपर लीक के जो आंकड़े रखे गए हैं वो चौंकाने वाले हैं। इंडिया टुडे की तरफ से 2024 में नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के बाद किए गए एक डाटा विश्लेषण के मुताबिक, 2019 से 2024 के बीच भारत के 19 राज्यों में कम से कम 65 से 70 बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। इन 7 वर्षों में हुए पेपर लीक के कारण देश भर के 1.7 करोड़ से अधिक उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा तीन लाख से अधिक सरकारी पदों की भर्ती प्रक्रिया भी बाधित हुई है। 

इसके अलावा द इंडियन एक्सप्रेस की जांच की एक और रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 से 2024 में 15 राज्यों में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक होने के 41 मामले सामने आने का दावा किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि इसका सीधा असर 1.04 लाख पदों के लिए आवेदन करने वाले करीब 1.4 करोड़ युवाओं पर पड़ा।

इसके अलावा द न्यूजलॉन्ड्री की एक और रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में 2014 से 2024 में पेपर लीक के मामलों की स्थिति बहुत गंभीर रही है। इस दौरान पेपर लीक के 89 मामलों की पुष्टि होने का दावा किया गया। 21 मामले ऐसे थे जो केंद्रीय संस्थानों (जैसे-एनटीए) की निगरानी में आयोजित की गई परीक्षाओं से संबंधित थे। दावा किया गया कि इन 89 मामलों में या तो एफआईआर दर्ज की गई या फिर परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इतना ही नहीं, इन पेपर लीक से करीब 6.5 करोड़ परीक्षार्थियों के भविष्य और समय पर सीधा असर पड़ा।

ये भी पढ़ें: NEET UG Cancelled: नीट रद्द; गेस पेपर में आए 410 में से 120 सवाल परीक्षा में आए थे, लीक की जांच अब CBI करेगी

3. राजनीतिक दावे
नीट-यूजी 2026 की परीक्षा के दौरान जब पेपर लीक होने की चर्चाएं शुरू हुईं तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मसले को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने दावा किया है कि पिछले 10 वर्षों में देश में 89 पेपर लीक हुए और इसके चलते 48 बार दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ी हैं। 

बीते वर्षों में कौन-कौन सी अहम परीक्षाएं कब रद्द हुई हैं?

भारत में पिछले कुछ वर्षों में लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाली कई अहम परीक्षाएं पेपर लीक के कारण रद्द की गईं। इनमें राष्ट्रीय से लेकर राज्य स्तर तक की परीक्षाएं शामिल हैं।  
 

राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक के बाद रद्द हुई प्रमुख परीक्षाएं

एआईपीएमटी (2015): अखिल भारतीय प्री-मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी), जो कि नीट का पूर्ववर्ती प्रारूप था, को साल 2015 में बड़े पैमाने पर पेपर लीक होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह रद्द कर दिया था।

सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं (2018): पेपर लीक होने के कारण सीबीएसई को कक्षा 12 के अर्थशास्त्र और कक्षा 10 के गणित की परीक्षाएं रद्द कर दोबारा आयोजित करानी पड़ी थीं।

यूजीसी-नेट (जून 2024): 18 जून 2024 को आयोजित इस परीक्षा का पेपर डार्कनेट पर लीक होने की पुष्टि के बाद शिक्षा मंत्रालय ने 19 जून 2024 को यह परीक्षा रद्द कर दी थी।

अन्य: 2021 में भारतीय सेना की कॉमन एंट्रेंस परीक्षा, नीट-यूजी 2021, जेईई मेन्स 2021 और 2023 में सीटीईटी में भी पेपर लीक के मामले देखे गए थे। इसके अलावा, एसएससी सीजीएल-2017 की परीक्षा भी पेपर लीक के आरोपों और बड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण विवादों में रही थी। 

राज्य स्तर पर पेपर लीक के बाद रद्द हुईं कुछ प्रमुख परीक्षाएं

उत्तर प्रदेश: 2024 में यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा, जिसमें लगभग 48 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे और यूपीपीएससी आरओ-एआरओ परीक्षा पेपर लीक के कारण रद्द कर दी गईं। इससे पहले 2021 में यूपीटीईटी परीक्षा भी लीक के कारण रद्द हुई थी।

राजस्थान: 2021 में शिक्षकों की भर्ती के लिए हुई रीट परीक्षा को बड़े स्तर पर लीक के कारण रद्द कर दिया गया था, जिससे 12.67 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। दिसंबर 2022 में वरिष्ठ सरकारी स्कूल शिक्षक (आरपीएससी) की सामान्य ज्ञान परीक्षा भी लीक के कारण रद्द हुई थी।

बिहार: 2022 में आयोजित 67वीं बीपीएससी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रद्द कर दिया गया था।

तेलंगाना: 503 पदों के लिए अक्तूबर 2022 में हुई टीएसपीएससी ग्रुप-1 प्रारंभिक परीक्षा पेपर लीक के कारण मार्च 2023 में रद्द की गई। इसके बाद जून 2023 में कराई गई पुनर्परीक्षा भी अनियमितताओं के आरोपों के कारण रद्द करनी पड़ी। इसके अलावा जनवरी-फरवरी 2023 में आयोजित एकाउंट्स ऑफिसर और एईई की परीक्षाएं भी रद्द हुई थीं।

असम: मार्च 2025 में कई केंद्रों से लीक की रिपोर्ट के बाद कक्षा 11वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी गईं। इससे पहले सितंबर 2020 में असम पुलिस सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद व्हाट्सएप पर पेपर लीक होने के कारण रद्द की गई थी।

उत्तराखंड: यहां यूकेएसएसएससी स्नातक स्तर की भर्ती परीक्षा पेपर लीक के कारण दो बार रद्द की गई।

झारखंड: 20 फरवरी 2025 को निर्धारित झारखंड बोर्ड कक्षा 10वीं की हिंदी और विज्ञान की परीक्षाएं प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर लीक होने के कारण रद्द हुई थीं।

ओडिशा: 2025 में परीक्षा से कुछ घंटे पहले पेपर लीक होने के कारण एएनएम (ऑक्जिलरी नर्स मिडवाइफरी) परीक्षा रद्द की गई। इसके अलावा अक्तूबर में आयोजित होने वाली पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा भी लीक की वजह से रद्द कर दी गई।

हरियाणा: जनवरी 2023 में पशु चिकित्सा सर्जन परीक्षा पेपर लीक की आशंका पर और 2025 में सहायक प्रोफेसर (हिंदी) की परीक्षा पेपर लीक व सुरक्षा खामियों के कारण रद्द कर दी गई।

गुजरात: नवंबर 2019 में लगभग 4,000 पदों के लिए हुई क्लर्क और ऑफिस असिस्टेंट भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया गया था, जिसमें लगभग 6 लाख उम्मीदवार बैठे थे।

पेपर लीक पर कानूनी तौर पर किस तरह की कार्रवाई के प्रावधान हैं?

  • भारत में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 2024 में नीट-यूजी और कुछ अन्य परीक्षाओं पर सवाल उठने के बाद एक नया और सख्त कानून लागू किया। इसे सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 कहा जाता है। यह कानून 21 जून 2024 से देशभर में प्रभावी हो चुका है। इस कानून के तहत पेपर कानूनी कार्रवाई और सजा के प्रावधान रखे गए हैं।
  • इस कानून के तहत दर्ज किए गए सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती रखे गए हैं। इसका मतलब यह है कि पुलिस आरोपी को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है, आरोपी को सीधे तौर पर पुलिस से जमानत का अधिकार नहीं होगा और जमानत देना या न देना मजिस्ट्रेट तय करेगा। इसके अलावा पक्षों के बीच समझौते के आधार पर केस वापस नहीं लिया जा सकेगा। 
  • परीक्षा में अनुचित साधन (अन्फेयर मीन्स) इस्तेमाल करने वाले, जैसे पेपर या आंसर-की लीक करने वाले, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ करने वाले, अवैध रूप से पेपर हासिल करने वाले या कंप्यूटर नेटवर्क हैक करने वाले किसी भी व्यक्ति को तीन से पांच साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान बनाया गया है। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस, 2023) के तहत जेल की अवधि और बढ़ाई जा सकती है। 

  • इसके अलावा पेपर लीक जैसी घटना को अगर कोई संगठित गिरोह, शिक्षा माफिया या व्यक्तियों का समूह मिलकर आर्थिक लाभ के लिए पेपर लीक को अंजाम देता है, तो ऐसे मामलों में 5 से 10 साल तक की जेल और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
  • परीक्षा आयोजित करने में मदद करने वाली निजी कंपनियों, कंप्यूटर रिसोर्स प्रोवाइडर्स या प्रिंटिंग प्रेस जैसी संस्थाओं को अगर पेपर लीक या किसी गलत तरीके से जुड़ा पाया जाता है तो उन पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा परीक्षा दोबारा कराने का पूरा खर्च भी उसी सर्विस प्रोवाइडर से वसूला जाएगा और उन पर चार साल तक का प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। 

  • इस अधिनियम में परीक्षा देने वाले छात्रों या उम्मीदवारों को आपराधिक कार्रवाई के दायरे से बाहर रखा गया है। अनुचित साधनों का उपयोग करते पकड़े जाने पर उम्मीदवारों के खिलाफ संबंधित परीक्षा प्राधिकरण, जैसे एनटीए, यूपीएससी, आदि के प्रशासनिक नियमों के तहत ही कार्रवाई की जाएगी। यह सजा कुछ वर्षों के लिए परीक्षा देने से प्रतिबंधित करने से लेकर जुर्माने तक की हो सकती है। 
  • यह कानून यूपीएससी, एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ओर से आयोजित की जाने वाली सभी केंद्रीय परीक्षाओं पर लागू होता है। इसके अलावा केंद्र सरकार के स्तर की परीक्षाओं पर भी यह कानून लागू होता है। हालांकि, राज्य स्तरीय परीक्षाएं इसके दायरे से बाहर हैं।

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