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Rajya Sabha: देश के 11% भूजल क्षेत्र जरूरत से ज्यादा दोहन का शिकार, सरकार ने बताया अबतक कितना हुआ सुधार?
Mon, 20 Jul 2026 10:18 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क ,अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क ,अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 20 Jul 2026 10:18 PM IST
सार
देश में भूजल का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने बताया कि करीब 11 प्रतिशत भूजल आकलन इकाइयों में जरूरत से ज्यादा भूजल निकाला जा रहा है। हालांकि 2017 के मुकाबले 2025 में देश की कुल भूजल दोहन स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है। आखिर किन राज्यों में सबसे ज्यादा भूजल निकाला जा रहा है और सरकार इसे बचाने के लिए क्या कर रही है? आइए, विस्तार से जानते हैं...
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भूजल बचाने के लिए केंद्र सरकार कौन-कौन सी योजनाएं चला रही
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
देश में भूजल का लगातार बढ़ता इस्तेमाल अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार ने राज्यसभा में बताया कि देश की करीब 11 प्रतिशत भूजल आकलन इकाइयों में जितना भूजल हर साल दोबारा जमीन में पहुंचता है, उससे अधिक पानी निकाला जा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि पिछले आठ वर्षों में देश की कुल भूजल स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है। सरकार का कहना है कि जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कई अभियान इसके पीछे बड़ी वजह हैं।
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि देश में कुल 6,762 भूजल संसाधन आकलन इकाइयां हैं, जिनमें ब्लॉक, तालुक और मंडल शामिल हैं। इनमें से 730 इकाइयों यानी 10.8 प्रतिशत को ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इन इलाकों में हर साल जितना भूजल प्राकृतिक रूप से दोबारा भरता है, उससे अधिक पानी निकाला जा रहा है। इसके अलावा 201 इकाइयां क्रिटिकल, 758 सेमी-क्रिटिकल, 4,946 सुरक्षित और 127 खारे पानी वाली श्रेणी में हैं।
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केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि देश में कुल 6,762 भूजल संसाधन आकलन इकाइयां हैं, जिनमें ब्लॉक, तालुक और मंडल शामिल हैं। इनमें से 730 इकाइयों यानी 10.8 प्रतिशत को ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इन इलाकों में हर साल जितना भूजल प्राकृतिक रूप से दोबारा भरता है, उससे अधिक पानी निकाला जा रहा है। इसके अलावा 201 इकाइयां क्रिटिकल, 758 सेमी-क्रिटिकल, 4,946 सुरक्षित और 127 खारे पानी वाली श्रेणी में हैं।
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किन राज्यों में सबसे ज्यादा भूजल निकाला जा रहा?
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पंजाब में भूजल दोहन का स्तर सबसे अधिक 156.36 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद राजस्थान 147.11 प्रतिशत और हरियाणा 136.75 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। वहीं दिल्ली में स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। राजधानी में भूजल दोहन का स्तर 2017 में 119.61 प्रतिशत था, जो 2024 में 100.77 प्रतिशत और 2025 में घटकर 92.10 प्रतिशत रह गया। हिमाचल प्रदेश में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जहां यह आंकड़ा 2017 के 86.37 प्रतिशत से घटकर 2025 में 38.50 प्रतिशत हो गया।
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