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WB: IIT खड़गपुर में प्रशासन और शिक्षकों के बीच निदेशक को लेकर बवाल; फैकल्टी के सैकड़ों सदस्य कर रहे विरोध

Fri, 06 Dec 2024 11:49 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 06 Dec 2024 11:49 AM IST
सार

आईआईटी-खड़गपुर प्रशासन और आईआईटी-खड़गपुर टीचर्स एसोसिएशन (आईआईटीटीए) के बीच तनाव सितंबर में शुरू हुआ, जब एसोसिएशन ने कई शिकायतों को रेखांकित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को एक पत्र भेजा था।

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Nearly 100 faculty at IIT-Kharagpur protest as rift with director deepens News update
IIT Kharagpur - फोटो : https://www.iitkgp.ac.in/

विस्तार

सबसे पुराने आईआईटी में से एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर में आजकल प्रशासन और शिक्षकों के बीच भारी मतभेद देखा जा रहा है। दरअसल, शिक्षकों ने आईआईटी खड़गपुर के निदेशक वीके तिवारी पर भाई-भतीजावाद, मनमाने ढंग से फैकल्टी भर्ती और परिसर में अस्पताल न बनाने का आरोप लगाया। आरोप सामने आने के बाद करीब 90 संकाय सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इससे प्रशासन और शिक्षकों के बीच और विवाद गहरा गया है।

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क्या है मामला?
आईआईटी-खड़गपुर प्रशासन और आईआईटी-खड़गपुर टीचर्स एसोसिएशन (आईआईटीटीए) के बीच संघर्ष सितंबर में शुरू हुआ, जब एसोसिएशन ने कई शिकायतों को रेखांकित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को एक पत्र भेजा था। पत्र में निदेशक के खिलाफ कई आरोप लगाए गए थे। यहां तक कि मांग की गई थी कि मंत्रालय जनवरी 2025 में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक नया निदेशक नियुक्त करे। इसके जवाब में संस्थान ने आईआईटीटीए के चार पदाधिकारियों-अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी आरोपों को साबित करने को कहा। सूत्रों के मुताबिक, पदाधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने एक महीने का समय मांगा। नोटिस जारी करने के प्रशासन के फैसले से तनाव और गहरा गया है।
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सामूहिक याचिका लिखी तो मामले ने पकड़ी तूल
हालांकि, इस मुद्दे ने तूल तब पकड़ ली, जब 86 फैकल्टी सदस्यों ने संस्थान को एक सामूहिक याचिका लिखी, जिसमें चेतावनी दी गई कि अगर आईआईटीटीए के चार पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस वापस नहीं लिया गया तो वे भूख हड़ताल पर चले जाएंगे। लेकिन संस्थान ने और सख्त कदम उठाया और इन 86 को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। यहां तक कि संस्थान ने तीन विभागाध्यक्षों को बदलने का आदेश भी जारी किया है, जिन्होंने सामूहिक याचिका पर हस्ताक्षर किए थे।
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काली पट्टी पहनकर किया विरोध
प्रशासन के सख्त रवैये के खिलाफ करीब 100 फैकल्टी सदस्यों ने बुधवार और गुरुवार को काली पट्टी पहनी और परिसर में एक मौन विरोध मार्च निकाला। सूत्रों का कहना है कि फैकल्टी के सदस्य और आईआईटीटीए इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि संस्थान के खिलाफ अदालत में जाना है या नहीं।

इन लोगों पर भी कसा शिंकजा 
प्रशासन ने बुधवार को तीन विभागाध्यक्षों - गणित, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी को भी बदल दिया। ये सभी उन संकाय सदस्यों में शामिल हैं जिन्हें नोटिस दिया गया था। अधिकारियों ने हालांकि यह नहीं बताया कि उन्हें उनके पदों से हटाया जाना हालिया तनाव से जुड़ा है या नहीं और न ही कार्यालय के आदेश में इस कदम की वजह बताई गई है। सूत्रों का कहना है कि निदेशक को विभागों में बदलाव करने का अधिकार है, लेकिन इन तीनों ने तीन साल पूरे नहीं किए हैं, जो आमतौर पर विभागाध्यक्ष का कार्यकाल होता है। इसके अलावा, यह कदम ऐसे समय में आया है जब सेमेस्टर परिणाम आ रहे हैं और पीएचडी प्रवेश चल रहे हैं ऐसे में फैकल्टी व्यस्त है।'

पत्र में दी थी ये शिकायत
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखे गए आईआईटीटीए के पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि वर्तमान निदेशक तिवारी का कार्यकाल जनवरी 2025 में समाप्त हो रहा है। उनके कार्यकाल के दौरान पक्षपात की गई। यहां तक कि एक ही व्यक्ति को बार-बार पदोन्नत करने के लिए कई अच्छे और अधिक विवेकशील वरिष्ठ शिक्षकों को दरकिनार किया जा रहा है।


पत्र में आगे दावा किया गया कि संस्थान के सभी नियमों और कानूनों का उल्लंघन करते हुए डीन, विभागाध्यक्ष और विभिन्न समितियों के अध्यक्ष जैसे प्रमुख प्रशासनिक पदों का चयन मनमाने ढंग से किया गया है। फैकल्टी में मनमानी तरीके से भर्ती की जा रही। साथ ही बदला लेने की भावना से परेशान होकर कई मौजूदा सदस्य संस्थान छोड़कर चले गए हैं।

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