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NDRF: 5 साल में चक्रवाती तूफानों का कहर, राज्यों ने मांगे 149857 करोड़ रुपये, केंद्र ने जारी किए 29272 करोड़
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केंद्रीय गृह मंत्रालय
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अमर उजाला
विस्तार
देश में हर साल 'बाढ़' और 'चक्रवाती तूफान', कहर बनकर लोगों पर टूटते हैं। पहले इस तरह की राष्ट्रीय आपदाओं पर होने वाला खर्च काफी अधिक रहता था। अब पांच वर्ष से इस खर्च में कमी आ रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की अचूक रणनीति और राज्यों का भरपूर सहयोग, इन सबने प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान और माल के नुकसान को कम कर दिया है। पिछले पांच साल की बात करें तो केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ के माध्यम से राज्यों को प्राकृतिक आपदाओं के दौरान 29272.886 करोड़ रुपये जारी किए हैं। हालांकि राज्य सरकारों ने उक्त अवधि में राहत कार्यों के लिए 149857.788 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया था।केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, विभिन्न राज्यों ने पांच वर्ष के दौरान बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना और चक्रवात, इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं में केंद्र सरकार से मदद का अनुरोध किया था। 2019-20 में 16 प्रदेशों ने प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 47284.32 करोड़ रुपये देने का अनुरोध किया था। इस राशि की मांग की एवज में एनडीआरएफ से 12862.25 करोड़ रुपये जारी किए गए।
साल 2020-21 में 21 प्रदेशों ने प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 57965.527 करोड़ रुपये देने का अनुरोध किया था। इस राशि की एवज में केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ के माध्यम से 8401.64 करोड़ रुपये जारी कराए थे। साल 2021-22 में 16 प्रदेशों ने प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से 25337.527 करोड़ रुपये देने का अनुरोध किया था। इस राशि की एवज में केंद्र सरकार ने विभिन्न प्रदेशों को एनडीआरएफ के माध्यम से 5464.53 करोड़ रुपये जारी कराए थे।
साल 2022-23 में 9 प्रदेशों ने प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से 10596.156 करोड़ रुपये देने का अनुरोध किया था। इस राशि की एवज में केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ के माध्यम से 1429.936 करोड़ रुपये जारी कराए थे। साल 2023-24 में 7 प्रदेशों ने प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से 8673.8 करोड़ रुपये देने का अनुरोध किया था। केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ के माध्यम से 1114.53 करोड़ रुपये जारी कराए थे।
2019-20 में चक्रवात फानी ने उड़ीसा में तबाही मचाई थी। राज्य सरकार ने 5227.61 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की मांग की थी। एनडीआरएफ से 3114.46 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। मध्यप्रदेश में बाढ़ आई तो राज्य सरकार ने 6619 करोड़ रुपये मांगे थे। एनडीआरएफ ने 1712.14 करोड़ रुपये दिए। कर्नाटक में बाढ़ और भूस्खलन के चलते राज्य सरकार ने 3894.57 करोड़ रुपये देने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ के माध्यम से 1652.54 करोड़ रुपये प्रदान किए थे।
गोवा में 2021-22 के दौरान चक्रवात तौकते ने तबाही मचाई थी। इसके लिए वहां की राज्य सरकार ने 13.55 करोड़ रुपये मांगे थे। राज्य सरकार को कोई राशि नहीं दी गई। गुजरात में तौकते ने कहर बरपाया तो उसे 1000 करोड़ रुपये 'खाता आधार पर अग्रिम' की राशि जारी की गई, जबकि राज्य सरकार ने 2448.83 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया था।
पश्चिम बंगाल में चक्रवात 'यास' आया तो राज्य सरकार ने 4474.95 करोड़ देने का अनुरोध किया। केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ के माध्यम से 350 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। बिहार में बाढ़ के चलते राज्य सरकार ने 4913.54 करोड़ रुपये की राशि देने का अनुरोध किया था। इसकी एवज में 1038.96 करोड़ रुपये जारी किए गए।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति के अनुसार, आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी, राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के प्रयासों के लिए अपेक्षित रसद और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। राज्य सरकारें, बाढ़ और भूस्खलन सहित 12 अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में प्रभावित लोगों को भारत सरकार द्वारा अनुमोदित मदों और मानदंडों के अनुसार, पहले से ही अपने उनके पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन निधि से वित्तीय राहत प्रदान करती है। हालांकि गंभीर प्रकृति की आपदा की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, एनडीआरएफ से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसमें अंतर मंत्रालयी केंद्रीय टीम के दौरे के आधार पर मूल्यांकन शामिल होता है। इसके बाद राशि जारी की जाती है।
एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के तहत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता राहत के रूप में होती है, न कि मुआवजे के लिए। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, पहले की बजाए अब प्राकृतिक आपदा के दौरान त्वरित गति से कार्य किया जाता है। खासतौर से चक्रवात आदि का पहले से ही अलर्ट जारी कर दिया जाता है। सैन्य बलों की मदद से लोगों को आपदा से पहले सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर देते हैं।
एयरपोर्ट पर उड़ानें रद्द होती हैं तो वहीं प्रभावित क्षेत्रों में ट्रेनों को भी रोक दिया जाता है। गाड़ियों का रूट बदल देते हैं। तूफान या चक्रवात के बाद फौरन राहत एवं बचाव कार्य शुरु हो जाता है।
इन सबके चलते प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान माल के नुकसान में काफी कमी आ रही है। चक्रवाती तूफान 'दाना', जो पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आया था, उसमें काफी हद तक जान एवं माल के नुकसान को कम किया गया। 'दाना' से पहले रेमल, तितली, गाजा, बुलबुल व बिपरजॉय जैसे चक्रवाती तूफान भारी तबाही मचा चुके हैं।
चक्रवाती तूफान 'रेमल' ने बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया था। रेमल का असर, पूर्वोत्तर राज्यों में भी देखा गया। रेमल' से पहले 'तौकते', 'यास', 'फनी', 'तितली', 'गाजा', 'बुलबुल' व 'बिपरजॉय' भारी तबाही मचा चुके हैं। चक्रवाती तूफानों ने सरकार के खजाने में अरबों रुपये की चपत लगाई है। वजह, तूफान से हुई बर्बादी के बाद जीवन को सामान्य करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों को अरबों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।