भाजपा का सामना करने के लिए देश को एक मजबूत विपक्ष की जरूरतः आनंद शर्मा
कांग्रेस में अंतर्कलह का दौर अभी थमा नहीं है। ट्वीट का सिलसिला अभी भी जारी है। पार्टी नेताओं के ट्वीट से मनभेद व मतभेद साफ झलकते हैं। इसी बीच मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने चिठ्ठी विवाद पर पहली बार चु्प्पी तोड़ी है। उन्होंने मंगलवार को ट्वीट कर कहा है कि भाजपा का सामना करने के लिए देश को एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है। उन्होंने ये भी कहा कि सुझाव देने का मतलब पार्टी से मतभेद नहीं। ईमानदारी से पार्टी के नवीनीकरण के सुझाव असहमति नहीं हैं। काश, सभी साथियों ने इसे पढ़ा होता।
दरअसल, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के ट्वीट का जवाब देते हुए आनंद शर्मा ने लिखा कि पत्र हमारे दिलों में पार्टी के सर्वोत्तम हित के साथ लिखा गया था और उसमें देश में वर्तमान माहौल पर साझा चिंताओं को व्यक्त किया। ऐसे समय में जब संविधान के मूलभूत मूल्यों पर निरंतर हमला किया जा रहा है। बता दें कि तनखा ने अपने ट्वीट में लिखा था, 'पत्र नेतृत्व के लिए चुनौती नहीं है, लेकिन पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्रवाई की एक बानगी है।'
India needs a strong opposition to confront the BJP. Suggestions for party's renewal made in sincerity is not dissent. Wish all colleagues had read it.
विज्ञापन विज्ञापन— Anand Sharma (@AnandSharmaINC) August 25, 2020
पटेल ने लगाया था आनंद शर्मा पर पत्र लिखने का आरोप
बता दें कि सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने आनंद शर्मा पर पत्र लिखने का आरोप लगाया था और खेद व्यक्त किया था कि गुलाम नबी आजाद, मुकुल वासनिक और आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता उस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों में शामिल थे। कांग्रेस कार्यसमिति में सर्वसम्मत से निर्णय लिया गया था कि सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के पद पर बनी रहेंगी। अध्यक्ष पद के लिए चुनाव अगले चार पांच महीने में होगें। वहीं, बैठक में यह भी तय किया गया कि अब कांग्रेस का सदस्यता अभियान भी शुरू किया जाना चाहिए। इससे पहले बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने पत्र को दुर्भाग्यपूर्ण बताया जबकि एके एंटनी ने पत्र को क्रूर कहा।
गुलाम नबी आजाद समेत कांग्रेस के 23 नेताओं ने लिखी थी चिट्ठी
बता दें कि गुलाम नबी आजाद समेत कांग्रेस के 23 नेताओं ने सोनिया को संगठन में बदलाव के लिए एक पत्र लिखा था। इसमें सीडब्ल्यूसी के सदस्य, यूपीए सरकार में मंत्री रहे नेता और सांसद शामिल थे।