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एनसीआरबी की रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला खुलासा, ड्यूटी से ज्यादा हादसों में जान गंवा रहे जवान
Sun, 19 Jan 2020 07:53 PM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 19 Jan 2020 07:53 PM IST
सार
- 2014-18 में हादसों के चलते 1902 जवानों की गई जान, इसी दौरान अभियानों में 316 हुए थे शहीद
- खुदकुशी भी बन रही है मौतों की एक वजह, एनसीआरबी की रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला खुलासा
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विस्तार
सुरक्षा बल के जवान ड्यूटी से ज्यादा हादसों में जान गंवा रहे हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हाल ही में जारी गई रिपोर्ट में हुआ है। एनसीआरबी के मुताबिक, 2014 से 2018 तक पांच साल के दौरान केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के 2,200 जवानों ने हादसों और खुदकुशी के चलते अपनी जान गंवा दी। इनमें सिर्फ हादसों में ही कुल 1902 जवानों की मौत हो गई।
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वहीं, बीते साल जनवरी में लोकसभा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यह जानकारी दी थी कि 2014 से 2018 के दौरान कुल 316 जवानों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अभियानों के दौरान शहीद हो गए थे।
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एनसीआरबी आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में हादसों में सीएपीएफ के 104 जवानों की मौत हुई जबकि 28 लोगों ने आत्महत्या कर ली। इस साल कुल 132 लोगों की मौत हुई। एसीआरबी ने 2014 में पहली बार सीएपीएफ संबंधी ये आंकड़े जुटाए थे। उस साल दुर्घटना के कारण 1,232 जवानों की जान गई थी और 175 लोगों ने खुदकुशी कर ली थी। दुर्घटना के कारण 2015 में 193, 2016 में 260 और 2017 में 113 कर्मियों की मौत हुई जबकि 2015 में 60, 2016 में 74 और 2017 में 60 जवानों ने आत्महत्या की। 2014 से 2018 के बीच हादसों में 1902 और आत्महत्या के कारण 397 जवानों की मौत हुई, यानि कुल 2,199 जवानों की मौत हुई।
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सात बलों के जुटाए गए आंकडे़
एनसीआरबी ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अलावा असम राइफल्स (एआर) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के आंकड़ों को शामिल किया है।
2018 में ऑपरेशनों के दौरान 32 फीसदी की गई जान
एनआरसीबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एक जनवरी 2018 को सीएपीएफ के जवानों की वास्तविक संख्या 9,29,289 थी। एनसीआरबी के अनुसार सीएपीएफ के जवानों की हादसे में हुई मौत के कारणों के आकलन से पता चलता है कि 2018 में 31.7 प्रतिशत (104 में से 33 लोगों की) मौत ‘ऑपरेशन या मुठभेड़ या कार्रवाई के दौरान हुईं। इसके बाद 21.2 प्रतिशत (22 जवानों) की मौत अन्य कारणों से हुई। सड़क और रेल हादसों के कारण इनमें से 20.2 प्रतिशत जवानों की जान गई।
36 फीसदी मौतों की वजह पारिवारिक समस्या
2018 में ही आत्महत्या की वजहों का आकलन करने पर पता चलता है कि खुदकुशी के 35.7 फीसदी मामलों (28 में से 10 खुदकुशी) की वजह पारिवारिक समस्या थी। वहीं, 17.9 फीसदी (28 में से 5) खुदकुशी की वजह विवाह संबंधी मुद्दे और सेवा संबंधी मसले थे।
2018 में 1,34,516 ने की खुदकुशी
एनसीआरबी आंकड़ों के मुताबिक 2018 में 1,34,516 लोगों ने खुदकुशी की, जो 2017 के मुकाबले 3.6 फीसदी ज्यादा थी। 2017 के मुकाबले 2018 में खुदकुशी की दर (प्रति एक लाख पर मौतें) में भी 0.3 फीसदी का इजाफा देखा गया।