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एनसीईआरटी की किताबें न पढ़ाने पर आईसीएसई बोर्ड के प्रमुख को समन, 14 अगस्त एनसीपीसीआर ने बुलाया

Wed, 08 Aug 2018 03:57 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Aug 2018 03:57 PM IST
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NCPCR summoned ICSE board chief on August 14 for not teaching NCERT books
NCERT
आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें नहीं पढ़ाने को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और आईसीएसई बोर्ड में ठन गई है। आईसीएसई बोर्ड चलाने वाली संस्था भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (सीआईएससीई) को आयोग ने नोटिस जारी किया है। आयोग ने बोर्ड के प्रमुख को 14 अगस्त को पेश होने का नोटिस दिया है। 
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एनसीईआरटी का सिलेबस जरूरी

आयोग के सीनियर अधिकारी के मुताबिक आयोग ने पिछली 18 जुलाई को सीआईएससीई के मुख्य कार्यकारी और सेक्रेटरी गैरी एराथून को नोटिस जारी करके कहा था कि वह अपने बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों में एनसीईआरटी का सिलेबस अनिवार्य कराएं। बोर्ड की तरफ से जवाब नहीं मिलने पर आयोग को समन का आदेश जारी करना पड़ा। आयोग ने उन्हें 14 अगस्त की सुबह 11 बजे सभी संबंधित रिकॉर्ड/दस्तावेज के साथ पेश होने को कहा है। 
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देशभर में भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (सीआईएससीई) से संबद्ध तकरीबन 2120 स्कूल हैं, साथ ही विदेश में संबद्ध स्कूलों की संख्या 988 है। वहीं सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों की संख्या तकरीबन 17,093 है। 
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पेरेंट्स पर बढ़ रहा था आर्थिक बोझ 

आयोग के सूत्रों का कहना है कि उनके पास लगातार ऐसी शिकायतें आ रही हैं, जिनमें एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने की अनिवार्यता न होने से आईसीएसई बोर्ड के कई मान्यता प्राप्त स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं। जिसके चलते बच्चों और पेरेंट्स पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। साथ ही उन्हें अतिरिक्त मानसिक दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है। 

समान मूल्यांकन नीति से है समस्या

उन्होंने बताया कि सीबीएसई में समान मूल्यांकन नीति को लेकर आयोग को जो समस्या मिली थी, तकरीबन वही समस्या आईसीएसई बोर्ड के तहत आने वाले कई स्कूलों में भी मिल रही है। हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने आयोग की आपत्ति के बाद कक्षा छह से आठ तक के लिए समान मूल्यांकन नीति वापस ले ली थी। आयोग ने समान मूल्यांकन नीति को शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून का उल्लंघन बताया था।

निजी स्कूल बढ़ा रहे बस्तों का बोझ

गौरतलब है कि हाल ही में आयोग ने अपने सर्वे में पाया था कि देश में कुल स्कूलों की संख्या में निजी स्कूल 23.7 फीसदी हैं, और ज्यादा कमीशन के चक्कर में सिलेबस से बाहर की किताबों की सिफारिश करते हैं, जिससे बस्तों का बोझ बढ़ता है। जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 29 के मुताबिक यह स्पष्ट है कि एनसीईआरटी एक शैक्षिक प्राधिकरण है, और मान्यता प्राप्त कोई भी स्कूल बच्चों और उनके पेरेंट्स को एनसीईआरटी से बाहर की किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। 
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