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Maharashtra: 'शिंदे सरकार नीतिगत पक्षाघात से पीड़ित', मराठा आरक्षण को लेकर NCP सांसद सुप्रिया सुले के तीखे बोल
Wed, 25 Oct 2023 06:20 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 25 Oct 2023 06:20 PM IST
सार
मराठा आरक्षण को लेकर एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने शिंदे सरकार को घेरा है। सरकार के खिलाफ बोलते हुए उन्होंने सरकार को नीतिगत पक्षाघात से पीड़ित बताया।
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सुप्रिया सुले
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मराठा आरक्षण के मुद्दे पर एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र पर बुधवार को जमकर हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार नीतिगत पक्षाघात से पीड़ित है। सुप्रिया सुले की यह टिप्पणी मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे द्वारा आरक्षण की मांग के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के बाद आई है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, जरांगे ने सितंबर माह के बीच अपना पहला अनशन खत्म करते समय सरकार को ओबीसी श्रेणी के तहत नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान करने के लिए 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। शिंदे सरकार ने तब आश्वासन दिया था कि मराठा आरक्षण 40 दिनों में होगा, लेकिन वह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। तीखा हमला करते हुए एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने राज्य सरकार को नीतिगत पुंग करार दिया।
बता दें मराठा आरक्षण लागू करने के लिए राज्य सरकार को दी गई 40 दिन की समय सीमा खत्म हुई। आंदोलनकारी मनोज जरांगे ने अपने समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए बुधवार सुबह जालना जिले की अंबाद तहसील के अंतर्गत अंतरवाली सरती गांव में अनिश्चितकालीन उपवास शुरू कर दिया। मनोज जरांगे (40) ने मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर अगस्त के अंत में अंतरवाली साराती गांव में भूख हड़ताल शुरू की थी। जरांगे ने 14 सितंबर को विरोध वापस ले लिया और समुदाय को कोटा देने के लिए सरकार के लिए 40 दिन की समय सीमा तय की (जो 24 अक्तूबर को खत्म हुई)।
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क्या है मांग
कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि राज्य भर में मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र दिया जाए। कुनबियों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिलता है। हालांकि राज्य के ओबीसी नेताओं ने इस मांग का विरोध किया है। सरकार ने निजाम युग के दस्तावेजों में कुनबी के रूप में संदर्भित मराठा समुदाय के सदस्यों को जाति प्रमाण पत्र देने के लिए कानूनी और प्रशासनिक ढांचे सहित मानक संचालन प्रक्रियाओं को निर्धारित करने के लिए न्यायाधीश संदीप शिंदे (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पैनल का गठन किया है।
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पत्रकारों से बातचीत के दौरान एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, जरांगे ने सितंबर माह के बीच अपना पहला अनशन खत्म करते समय सरकार को ओबीसी श्रेणी के तहत नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान करने के लिए 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। शिंदे सरकार ने तब आश्वासन दिया था कि मराठा आरक्षण 40 दिनों में होगा, लेकिन वह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। तीखा हमला करते हुए एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने राज्य सरकार को नीतिगत पुंग करार दिया।
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बता दें मराठा आरक्षण लागू करने के लिए राज्य सरकार को दी गई 40 दिन की समय सीमा खत्म हुई। आंदोलनकारी मनोज जरांगे ने अपने समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए बुधवार सुबह जालना जिले की अंबाद तहसील के अंतर्गत अंतरवाली सरती गांव में अनिश्चितकालीन उपवास शुरू कर दिया। मनोज जरांगे (40) ने मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर अगस्त के अंत में अंतरवाली साराती गांव में भूख हड़ताल शुरू की थी। जरांगे ने 14 सितंबर को विरोध वापस ले लिया और समुदाय को कोटा देने के लिए सरकार के लिए 40 दिन की समय सीमा तय की (जो 24 अक्तूबर को खत्म हुई)।
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क्या है मांग
कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि राज्य भर में मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र दिया जाए। कुनबियों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिलता है। हालांकि राज्य के ओबीसी नेताओं ने इस मांग का विरोध किया है। सरकार ने निजाम युग के दस्तावेजों में कुनबी के रूप में संदर्भित मराठा समुदाय के सदस्यों को जाति प्रमाण पत्र देने के लिए कानूनी और प्रशासनिक ढांचे सहित मानक संचालन प्रक्रियाओं को निर्धारित करने के लिए न्यायाधीश संदीप शिंदे (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पैनल का गठन किया है।