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NCERT किताब विवाद: न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाला हिस्सा हटाएगी सरकार, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद फैसला
Wed, 25 Feb 2026 04:18 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Wed, 25 Feb 2026 04:18 PM IST
सार
एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से जुड़ा एक खंड शामिल किया गया था। इस संशोधित खंड में लिखा गया है कि भ्रष्टाचार, लंबित मामलों का भारी बोझ और न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या की कमी न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों में से हैं।
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एनसीईआरटी किताब विवाद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
एनसीईआरटी की कक्षा आठ की एक किताब में न्यायपालिका से जुड़ी विवादित सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गंभीर आपत्ति जताई थी। सूत्रों ने बुधवार को बताया कि एनसीईआरटी की कक्षा आठ की किताब में न्यायिक भ्रष्टाचार से संबंधित विवादास्पद अंशों को हटाया जा सकता है, क्योंकि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। परिषद ने पुस्तक को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है।
इस बीच बताया जा रहा है कि एनसीईआरटी ने अध्याय से जुड़े विषय विशेषज्ञों और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की सिफारिशों की समीक्षा करने के लिए एक आंतरिक बैठक बुलाई है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एनसीईआरटी के अध्यक्ष दिनेश प्रसाद सकलानी ने इस मुद्दे पर फोन और संदेशों का जवाब नहीं दिया। परिषद के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
एनसीईआरटी विवाद पर क्या बोली सरकार?
सरकारी सूत्रों ने कहा कि एनसीईआरटी एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन अध्याय जोड़ने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि भ्रष्टाचार के मुद्दे को पाठ्यपुस्तक में शामिल करना ही था, तो इसे कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका - तीनों अंगों से संबंधित होना चाहिए था।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा प्रकाशित कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' के संदर्भों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी को भी इस संस्था को 'बदनाम या अपमानित' करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ये भी पढ़ें: Supreme Court: ‘बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते’, NCERT की किताब में न्यायपालिका पर सामग्री से सीजेआई नाराज
सुप्रीम कोर्ट में किसने उठाया मामला?
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने तब आया, जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने संशोधित पाठ्यपुस्तक की विषयवस्तु पर चिंता व्यक्त की। सिब्बल ने कहा कि कानूनी बिरादरी के सदस्य इस बात से बहुत चिंतित थे कि स्कूली बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा था। उन्होंने इसे पूरी तरह से निंदनीय बताया।
वरिष्ठ वकील ने शीर्ष अदालत को बताया, 'इस संस्था के सदस्य होने के नाते हमें यह जानकर गहरा दुख हुआ है कि कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। संस्था से हमारा गहरा संबंध है। हमारे पास पुस्तक की प्रतियां मौजूद हैं।'
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी- एक दिन रुकिए
इसके जवाब में, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वह पहले से ही इस विवाद से अवगत थे और उन्हें न्यायपालिका के सदस्यों से इस मामले पर चिंता व्यक्त करने वाले कई पत्र प्राप्त हुए थे। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुस्तक की सामग्री से कई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी परेशान थे। जब सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया, तो सीजेआई ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले ही कार्यवाही शुरू कर दी है।
ये भी पढ़ें: Supreme Court: 'भाषण या फिल्मों से किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाना चाहिए', घूसखोर पंडत पर अदालत की टिप्पणी
सीजेआई ने टिप्पणी की, 'एक दिन रुकिए। यह निश्चित रूप से पूरी संस्था के लिए चिंता का विषय है। मैं धरती पर किसी को भी इस संस्था की गरिमा को धूमिल करने और इसे बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। किसी भी कीमत पर मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा। चाहे वह कितना भी ऊंचा पद पर हो, कानून अपना काम करेगा। मुझे पता है कि इससे कैसे निपटना है।'
अन्य वीडियो
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इस बीच बताया जा रहा है कि एनसीईआरटी ने अध्याय से जुड़े विषय विशेषज्ञों और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की सिफारिशों की समीक्षा करने के लिए एक आंतरिक बैठक बुलाई है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एनसीईआरटी के अध्यक्ष दिनेश प्रसाद सकलानी ने इस मुद्दे पर फोन और संदेशों का जवाब नहीं दिया। परिषद के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
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एनसीईआरटी विवाद पर क्या बोली सरकार?
सरकारी सूत्रों ने कहा कि एनसीईआरटी एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन अध्याय जोड़ने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि भ्रष्टाचार के मुद्दे को पाठ्यपुस्तक में शामिल करना ही था, तो इसे कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका - तीनों अंगों से संबंधित होना चाहिए था।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा प्रकाशित कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' के संदर्भों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी को भी इस संस्था को 'बदनाम या अपमानित' करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट में किसने उठाया मामला?
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने तब आया, जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने संशोधित पाठ्यपुस्तक की विषयवस्तु पर चिंता व्यक्त की। सिब्बल ने कहा कि कानूनी बिरादरी के सदस्य इस बात से बहुत चिंतित थे कि स्कूली बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा था। उन्होंने इसे पूरी तरह से निंदनीय बताया।
वरिष्ठ वकील ने शीर्ष अदालत को बताया, 'इस संस्था के सदस्य होने के नाते हमें यह जानकर गहरा दुख हुआ है कि कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। संस्था से हमारा गहरा संबंध है। हमारे पास पुस्तक की प्रतियां मौजूद हैं।'
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी- एक दिन रुकिए
इसके जवाब में, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वह पहले से ही इस विवाद से अवगत थे और उन्हें न्यायपालिका के सदस्यों से इस मामले पर चिंता व्यक्त करने वाले कई पत्र प्राप्त हुए थे। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुस्तक की सामग्री से कई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी परेशान थे। जब सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया, तो सीजेआई ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले ही कार्यवाही शुरू कर दी है।
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