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GRSE: स्वदेशी तकनीक से बने जहाजों से तटीय क्षेत्रों की करेगी निगरानी नौसेना, कोलकाता में बनाए जाएंगे 11 जहाज
सार
जीआरएसई में जहाजों को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से तैयार किया जाएगा। इनमें 12.7 मिमी एसआरएमजी (मशीन गन) और एके-63 जैसे हथियार होंगे। जहाजों में कैमरे भी लगाए जाएंगे।
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जीआरएसई में जहाज निर्माण कार्य की शुरुआत करते राज्यपाल आनंद बोस।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय नौसेना अब स्वदेशी तकनीक से बनी अत्याधुनिक जहाजों का उपयोग अपने तटीय क्षेत्रों की निगरानी के लिए करेगी। इसके लिए गार्डनरीच शिप बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) कंपनी चार अत्याधुनिक 'नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल' (एजियोपीवी) बनाने जा रही है। मंगलवार को इस निर्माण की शुरुआत (किल्स लायन समरोह) कोलकाता के गार्डनरीच में हुई। इस मौके पर राज्यपाल सीवी आनंद बोस मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
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कार्यक्रम में जीआरएसई के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कमोडोर पीआर हरी (सेवानिवृत्त), भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी), भारतीय वायु सेना (आईएएफ), भारतीय सेना और जीआरएसई के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। ये चारों आधुनिक जहाज भारतीय नौसेना को 2026 में सौंप दिए जाएंगे। इन जहाजों से नौसेना तटीय निगरानी करेगी।
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इस मौके पर राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस ने जीआरएसई को बधाई दी और भारत के शिपबिल्डिंग क्षेत्र में विश्वस्तरीय शक्ति बनने की यात्रा पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने इसे भारत के दृष्टिकोण और क्रियावली का एक बेहतरीन उदाहरण बताया और इसे इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक करार दिया। उन्होंने कहा कि जीआरएसई की उपलब्धियां भारत की प्रगति और संभावनाओं की मिसाल हैं। कमाेडोर पीआर हरी ने कहा कि हम वर्तमान में 43 समुद्री प्लेटफार्मों का निर्माण कर रहे हैं। इनमें युद्धपोत, विशेष अनुसंधान जहाज, स्वायत्त प्लेटफार्म और ग्रीन एनर्जी वेसल्स शामिल हैं।
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उल्लेखनीय है कि 2023 में केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने आधुनिक जहाजों के निर्माण का निर्णय लिया। मुख्य रूप से तटीय क्षेत्रों में निगरानी के लिए मंत्रालय ने 11 'नेक्स्ट जेनरेशन' और 6 मिसाइल जहाज बनाने का निर्णय लिया। इन 11 'नेक्स्ट जेनरेशन' वेसलों में से चार का निर्माण गार्डनरीच शिप बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) कर रहा है। इन 11 जहाजों को बनाने पर लगभग 9,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इनका उपयोग तटीय क्षेत्रों में निगरानी, जल सीमा पर गश्त, तस्करी रोकने, आतंकवाद का मुकाबला करने और आपदा के समय बचाव कार्यों में किया जाएगा।
यह 'एजियोपीवी' वेसल भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। जीआरएसई में इन जहाजों को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से तैयार किया जाएगा। इनमें 12.7 मिमी एसआरएमजी (मशीन गन) और एके-63 जैसे हथियार होंगे। इसके अलावा इन जहाजों में कैमरे भी लगाए जाएंगे। पिछले 'ओपीवी' की तुलना में ये नए 'नेक्स्ट जेनरेशन' जहाज आकार में बहुत बड़े और मजबूत होंगे।
ये तूफानी परिस्थितियों में भी बहुत कम नुकसान पहुंचाते हैं। इनकी लंबाई लगभग 113 मीटर होगी और चौड़ाई 14.6 मीटर। ये जहाज 23 नॉट्स (लगभग 42 किलोमीटर प्रति घंटा) की गति से चल सकते हैं और 14 नॉट्स की गति से 8,500 समुद्री मील तक यात्रा कर सकते हैं। एक जहाज में 24 अधिकारी और 100 नाविक सवार हो सकते हैं।
आधुनिक जहाज 2026 में भारतीय नौसेना के सुपुर्द कर दिए जाएंगे, जिसके बाद भारतीय नौसेना की ताकत और भी मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। मंगलवार को कोलकाता के जीआरएसई में इन जहाजों के निर्माण की शुरुआत की गई। उल्लेखनीय है कि 1960 में भारत सरकार ने जीआरएसई का अधिग्रहण किया था। इससे पहले, जीआरएसई द्वारा निर्मित कई अत्याधुनिक जहाजों को मॉरीशस और सेशेल्स जैसे देशों को निर्यात किया जा चुका है।