हैंडलूम दिवस: बुनकरों को मुख्यधारा के फैशन में लाने की जरूरत
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बनारस की बनारसी साड़ी, तमिलनाडु की कांचीपुरम सिल्क साड़ी, आंध्रप्रदेश की पोचमपल्ली, असम की मोगा के अलावा पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, गुजरात और जम्मू-कश्मीर के शिल्प दुनिया भर में मशहूर हैं। आज पहले जैसी साड़ियां ढूंढने पर भी नहीं मिलतीं, अगर आप इसके पीछे की वजह नहीं जान पाये तो ,आप को बता दें कि खूबसूरत बुनाई और कढ़ाई करने वाले कारीगरों की जगह मशीनों ने ले ली। बदलते फैशन ने इन पारम्परिक वस्त्रों की मांग ना सिर्फ कम कर दिया बल्कि बुनकरों को बदहाली में धकेल दिया।
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब बनारस से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था तो काशी के पुनरोद्धार में बुनकर भी उनकी लिस्ट में थे। जीतने के एक साल बाद ही सात अगस्त 2015 को हर साल हस्तकरघा दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया गया। सरकार ने संकल्प दोहराया कि बुनकरों को फैशन जगत से यूं जोड़ा जायेगा की हैंडलूम में लाईफ स्टाइल की जरूरत बन जाये। बुनकरों को सही मुनाफा हो उसके लिए बिचौलिये को हटा सीधा बाजार उपलब्ध कराने की बात कही गई । 2017 में बुनकरों, थोकविक्रेताओं के लिये बाजार की शुरुआत कपड़ा मंत्री स्मृति इरानी ने की।
लोककसभा चुनावों के दौरान मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हथकरघा बुनकरों की स्थिति एक बड़ा मुद्दा था। मोदी ने उनकी स्थिति सुधारने का वादा किया था और उसी राह पर चलते हुए कपड़ा मंत्रालय ने कोशिशें शुरू कर दी हैं। हथकरघा क्षेत्र के पुनरोत्थान के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और एक समूह ने डिजाइन, नव प्रयोगों एवं युवाओं के बीच हथकरघे से बने कपड़े लोकप्रिय बनाने एवं मार्केटिंग सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की है जिससे बुनकरों की आय बढ़ाई जा सके।
लेकिन अब भी देश भर के बुनकर बदहाली की जिंदगी बिताने को मजबूर हैं।
देश के हैंडलूम सेक्टर को ग्लोबल पहचान दिलाने में यूथ का महत्वपूर्ण योगदान है। महिलाएं पहले ही हैंडलूम की सबसे प्रमुख खरीदार हैं, महिलाएं वैवाहिक और अन्य विशेष कार्यक्रमों में हैंडलूम प्रोडक्ट ही पहनती हैं। अब जरूरी है कि यूथ के बीच हैंडलूम प्रॉडक्ट को पॉपुलर बनाया जाए। इसके लिए हैंडलूम सेक्टर यूथ की पसंद को ध्यान में रखते हुए डिजाइनिंग पर फोकस करना होगा। नए डिजाइन और तकनीक विकसित कर देसी और विदेशी बाजार में नई संभावनाओं की तलाश करने की भी जरूरत है।
बॉलीवुड भी आये आगे
फिल्मों के जरिए हैंडलूम प्रोडक्ट का प्रचार सबसे ज्यादा हो सकता है। अपनी शादी के रिसेप्शन में जब अनुष्का शर्मा ने जब गाढ़े लाल रंग की बनारसी पहनी थी तो बनारस में साड़ियों की मांग में उछाल आ गया था। प्रधामंत्री ने भी कहा कि हमें कुछ कदम उठाने होंगे ताकि इसे फैशनेबल बनाया जा सके। हमें इसे भारत और दुनिया में फैशन का केंद्र बनाना होगा। फिल्म इंडस्ट्री का फैशन को बढ़ाने में अहम किरदार है और चैन्नई में बड़ी फिल्म इंडस्ट्री है, क्या फिल्म निर्माता अपनी 5 में से एक फिल्म में हैंडलूम का प्रचार नहीं कर सकते। अगर वो ऐसा करते हैं तो करोड़ों हैंडलूम वाले उन फिल्मों को देखने जाएंगे और इस तरह दोनों का फायदा होगा।
1905 के स्वदेशी आंदोलन के दिन
स्वदेशी उद्योग और विशेष रूप से हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करने के लिए सात अगस्त 1905 को चलाए गए स्वदेशी आंदोलन को सम्मान देते हुए सरकार ने हर साल सात अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के शुरु किये जाने के कई सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। पिछले एक साल में खादी प्रोडक्ट की सेल 60 फीसदी बढ़ गई है। अब यही कोशिश हैंडलूम सेक्टर के लिए भी करनी होगी। कपड़े, पर्दे, बैडशीट, टेबल कवर और अन्य घरेलू जरूरत के सामान में हैंडलूम प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसका फायदा हैंडलूम कारीगरों सहित पूरे सेक्टर को मिलेगा।