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NFHS-5: 23 फीसदी महिलाओं की शादी 18 से पहले, 66 फीसदी महिलाएं परिवार नियोजन का कोई न कोई तरीका अपनाती हैं

Fri, 03 Dec 2021 07:11 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Fri, 03 Dec 2021 07:11 PM IST
सार

छह साल से अधिक उम्र की तकरीबन 71 फीसदी लड़कियों को स्कूल जाने का मौका मिल रहा है। हालांकि इस मामले में शहरी इलाकों की लड़कियां ज्यादा भाग्यशाली हैं। ग्रामीण इलाकों में जहां 66 फीसदी लड़कियां स्कूल जा रही हैं तो शहरी इलाकों में यह संख्या 82 प्रतिशत है।

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National Family Health Survey-5 23 percent of women marry before 18, 66 percent of women adopt some method of family planning
child marriage

विस्तार

पिछले महीने 25 तारीख को जब नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 (2019-21)  की रिपोर्ट आई तो देश की महिलाओं को लेकर कुछ अच्छी खबरें मिलीं। एक तरफ जहां देश में महिलाओं की संख्या पहली बार पुरुषों के मुकाबले ज्यादा हो गई यानी भारत में अब 1000 पुरुषों पर 1020 महिलाएं हैं। वहीं यह देखने को मिला कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के मामले में भी महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या 54 फीसदी हो गई है। जबकि 2015-16 में यह संख्या 45.9 प्रतिशत थी। जबकि बाल विवाह और एनीमिया जैसी समस्याएं अभी भी महिलाओं के सभी तरह के विकास में एक बाधा है। 
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23 फीसदी महिलाओं की शादी 18 से पहले
एनएफएचएस के सर्वे में आबादी, पोषण, स्वास्थ्य, औरतों और बच्चों के हालात को समझने के लिए जानकारी इकट्ठी की जाती है। इसी सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 20 से 24 साल की औरतों में तकरीबन 23 प्रतिशत ऐसी महिलाएं हैं जिनकी शादी 18 साल से पहले कर दी गई। ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 27 फीसदी और शहरी इलाकों में 14 फीसदी है। पश्चिम बंगाल और बिहार में, लगभग 41फीसदी ऐसी महिलाएं है जिनका बाल विवाह हुआ। जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में कम उम्र के विवाहों के अनुपात में कमी देखी गई।
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परिवार नियोजन
महिलाओं को परिवार नियोजन के तरीके पता हैं
15 से 49 साल की औरतों के बीच सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि करीब 66 फीसदी औरतें परिवार नियोजन का कोई न कोई तरीका अपनाती हैं। हालांकि इसी उम्र की 57.2 फीसदी महिलाएंखून की कमी की बीमारी से जूझ रही हैं। शहरी इलाकों में जहां ऐसी महिलाओं का आंकड़ा 54.1 फीसदी है तो ग्रामीण इलाकों में यह 58.7 प्रतिशत है। 

हरियाणा में मोबाइल का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में गिरावट
हालांकि कुछ ऐसे राज्य और शहर हैं जहां मोबाइल रखने वाली महिलाओं की संख्या घटी है। जैसे हरियाणा और चंडीगढ़ में अपना मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी में मामूली गिरावट देखी गई है। हरियाणा में 50.4 प्रतिशत महिलाएं मोबाइल फोन का उपयोग कर रही हैं, जबकि नेशनल फैमिल हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) में यह संख्या 50.5 प्रतिशत थी। इसी तरह केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में भी मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं के प्रतिशत में गिरावट देखी गई। 2015-16 यानी NFHS-4  में 74.2 प्रतिशत महिलाओं के पास अपना फोन था लेकिन अब यह संख्या 70 प्रतिशत है।
 
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बागपत महिला किसान - फोटो : SELF
घर और जमीन पर महिलाओं का मालिकाना हक बढ़ा
भारतीय महिलाओं को अब घर और जमीन पर मालिकाना हक भी मिलने लगा है। हालांकि यह स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं है लेकिन नेशनल फैमिल हेल्थ सर्वे-4 में जहां यह संख्या 38.4 फीसदी थी वो अब बढ़कर 43.3 फीसदी हो गई है। हालांकि पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि प्रधान राज्यों में महिलाओं को जमीन या घर का मालिकाना हक देने का ट्रेंड बढ़ा है। 

उदाहरण के लिए, पंजाब में, सर्वेक्षण में शामिल 63.5 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि वे (अकेले या संयुक्त रूप से) घर या जमीन की मालकिन है। जबकि 2015-16 में 32.1 प्रतिशत महिलाओं को ही घर या जमीन का स्वामित्व हासिल था। उत्तर प्रदेश जो और बड़ा कृषि प्रधान राज्य है यहां भूमि/ घर के मालिकाना हक में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ गई है। 2015-16 में यह आंकड़ा 34.2 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 51.9 प्रतिशत हो गया है।

मध्यप्रदेश और राजस्थान ने किया निराश
लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान जहां बड़े पैमाने पर खेती होती है  यहां इस मामले में ज्यादा विकास नहीं दिखा। मध्य प्रदेश में सर्वेक्षण में शामिल हुईं 39.9 प्रतिशत महिलाएं किसी भूमि या घर की मालकिन हैं जबकि 2015-16 में यह आंकड़ा 43.5 प्रतिशत था। इसी तरह राजस्थान की बात करें तो 2020-21 में ऐसी महिलाओं की संख्या 26.6 प्रतिशत थी।  2015-16 में यह आंकड़ा 24.1 प्रतिशत था। इस लिहाज से कह सकते हैं कि राजस्थान ने इसमें केवल मामूली सुधार किया है। 
 
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