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NAT Test: दान के रक्त की नहीं हो रही एनएटी जांच, केवल तीन राज्य ही संजीदा
Thu, 15 Jun 2023 06:22 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 15 Jun 2023 06:22 AM IST
सार
रॉश इंडिया के चिकित्सा प्रमुख डॉ. संदीप सेवलिकर ने कहा, एनएटी जांच को लेकर ज्यादातर राज्यों को गंभीर होने की आवश्यकता है। देश में पहली बार एनएटी परीक्षण ओडिशा में शुरू हुआ। यहां नियम है कि एनएटी जांच के बाद रक्त रोगियों को प्रदान किया जाता है।
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एनएटी जांच (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत में हर साल दान में लगभग सवा करोड़ यूनिट रक्त मिलता है, लेकिन इनमें से केवल 10 से 12 फीसदी रक्त की संक्रमण को लेकर बेहतर जांच हो पाती है। वर्तमान में केवल तीन राज्य मध्य प्रदेश, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर रक्त की जांच के लिए न्यूक्लिक एसिड परीक्षण (एनएटी) का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस परीक्षण से रक्त में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और सी का पता लगाया जाता है।
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विश्व रक्त दान दिवस पर बुधवार को रॉश इंडिया के चिकित्सा प्रमुख डॉ. संदीप सेवलिकर ने कहा, एनएटी जांच को लेकर ज्यादातर राज्यों को गंभीर होने की आवश्यकता है। देश में पहली बार एनएटी परीक्षण ओडिशा में शुरू हुआ। यहां नियम है कि एनएटी जांच के बाद रक्त रोगियों को प्रदान किया जाता है। इस तरह का कार्य दूसरे राज्य भी कर सकते हैं।
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दान में मिले रक्त की जांच जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, आपात स्थितियों का सामना करने वाले अनगिनत लोगों के लिए रक्तदान जीवन रेखा के रूप में कार्य करता है। यह निस्वार्थता और करुणा का कार्य है जिसमें जीवन बचाने की शक्ति है। हालांकि दान किए रक्त की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। एचबीवी, एचआईवी और एचसीवी को लेकर बड़े पैमाने पर रक्त जांच सीरोलॉजिकल परीक्षणों द्वारा की जाती है। हालांकि इस जांच में मिलने वाले सिरोनिगेटिव में भी रक्ताधान संचारित संक्रमणों का जोखिम रहता है। इसलिए संवेदनशील जांच की जरूरत होती है।
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रक्तदान पर भ्रांतियां दूर करना जरूरी : एसपी सिंह बघेल
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ने बुधवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि रक्तदान के जरिए सेवा और सहयोग दोनों को आगे बढ़ाया जा सकता है। एक यूनिट रक्त कई लोगों का जीवन बचा सकता है। हमें रक्तदान को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है।