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नरोदा पाटिया केस में बड़ा फैसला: पूर्व मंत्री कोडनानी बरी, बाबू बजरंगी को 21 साल की जेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 20 Apr 2018 12:28 PM IST
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माया कोडनानी
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गुजरात के नरोदा पाटिया केस में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। बाबू बजरंगी को 21 साल की जेल हुई है। हालांकि पहले हाईकोर्ट ने बजरंगी को ताउम्र जेल की सजा सुनाई थी, बाद में इसे बदल दिया गया। इस मामले में हरीश छारा और सुरेश लंगड़ा को भी दोषी करार दिया गया है। वहीं हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री कोडनानी को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। वारदात की जगह कोडनानी की मौजूदगी साबित नहीं हो पायी। कोर्ट ने इस मामले में हरीश छारा और सुरेश लंगड़ा को दोषी करार करते हुए कुल 31 लोगों में से 17 लोगों को बरी कर दिया है।
आपको बता दें कि साल 2002 में गुजरात के अहमदाबाद में नरोदा पाटिया में हुए नरसंहार के मामले में यह फैसला आया है। इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने भाजपा विधायक माया कोडनानी और बाबू बजरंगी सहित 32 लोगों को दोषी ठहराया था।
28 फरवरी 2002 को नरोदा पाटिया इलाके में सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था। 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगियां जलाने की घटना हुई थी। उसके अगले ही दिन दंगे की लपटों ने नरोदा पाटिया में दस्तक दी। जिसके बाद यहां नरसंहार हुआ था। जिसमें 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 33 लोग जख्मी हुए थे। नरोदा पाटिया के नरसंहार को जहां गुजरात दंगों के दौरान सबसे भीषण नरसंहार कहा जाता है वहीं यह उतना ही विवादास्पद भी है। यह दंगों के दौरान का एक ऐसा केस है जिसकी जांच एसआईटी ने की थी।
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इस मामले की सुनवाई अगस्त 2009 में शुरू हुई थी और इस मामले में 62 लोगों को आरोपी बनाया गया था। सुनवाई के दौरान एक आरोपी विजय शेट्टी की मौत हो गई थी। पिछले साल इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी सहित 32 लोगों को दोषी करार दिया गया था। जबकि 29 लोगों को रिहा कर दिया गया था।
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आपको बता दें कि साल 2002 में गुजरात के अहमदाबाद में नरोदा पाटिया में हुए नरसंहार के मामले में यह फैसला आया है। इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने भाजपा विधायक माया कोडनानी और बाबू बजरंगी सहित 32 लोगों को दोषी ठहराया था।
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28 फरवरी 2002 को नरोदा पाटिया इलाके में सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था। 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगियां जलाने की घटना हुई थी। उसके अगले ही दिन दंगे की लपटों ने नरोदा पाटिया में दस्तक दी। जिसके बाद यहां नरसंहार हुआ था। जिसमें 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 33 लोग जख्मी हुए थे। नरोदा पाटिया के नरसंहार को जहां गुजरात दंगों के दौरान सबसे भीषण नरसंहार कहा जाता है वहीं यह उतना ही विवादास्पद भी है। यह दंगों के दौरान का एक ऐसा केस है जिसकी जांच एसआईटी ने की थी।
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इस मामले की सुनवाई अगस्त 2009 में शुरू हुई थी और इस मामले में 62 लोगों को आरोपी बनाया गया था। सुनवाई के दौरान एक आरोपी विजय शेट्टी की मौत हो गई थी। पिछले साल इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी सहित 32 लोगों को दोषी करार दिया गया था। जबकि 29 लोगों को रिहा कर दिया गया था।
2002 Gujarat riots case(Naroda Patiya): Gujarat High Court acquits Maya Kodnani, Babu Bajrangi's conviction upheld. pic.twitter.com/XPCejIsE64
— ANI (@ANI) April 20, 2018