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किसान आंदोलन: सरकार से फिर वार्ता संभव, किसान बोले- 'सम्मानजनक हल निकले'

Mon, 01 Feb 2021 04:01 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 01 Feb 2021 04:01 AM IST
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Naresh Tikait said, will respect the dignity of PM modi but also committed to protect self respect of  farmers
चौधरी नरेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला

तीनों कृषि कानूनों के विरोध में बीते 67 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों के आंदोलन में आई तेजी को देखते हुए सुरक्षा-व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। माना जा रहा है कि किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच अगले दौर की बातचीत दो फरवरी को हो सकती है।

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हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा ने इस बारे में अभी कोई पुष्टि नहीं की है। वहीं, किसान नेताओं ने कहा है कि सम्मानजनक हल निकलना चाहिए, मगर हम दबाव में किसी चीज पर राजी नहीं होंगे।
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भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रमुख नरेश टिकैत ने रविवार को इस बारे में संकेत देते हुए कहा, किसान प्रधानमंत्री की गरिमा का सम्मान करेंगे, लेकिन वे आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। 
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नरेश टिकैत ने कहा, एक शांतिपूर्ण हल की ओर पहुंचा जाना चाहिए। हम दबाव में कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। किसान नहीं चाहते कि सरकार या संसद उनके आगे झुके। बीच का कोई रास्ता खोजा जाना चाहिए. वार्ता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, 26 जनवरी को हुई हिंसा साजिश का हिस्सा थी। तिरंगा हर किसी से ऊपर है। हम किसी को इसका अपमान नहीं करने देंगे। इसे सहन नहीं किया जाएगा। इस बीच, गाजीपुर बॉर्डर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं।

प्रदर्शन कर रहे एक किसान श्याम ने कहा, सरकार नए कृषि कानूनों पर कोई निर्णय नहीं ले रही है। उसे इन कानूनों को वापस लेना चाहिए. यह सरकार और किसानों दोनों के लिए अच्छा होगा।

एक अन्य किसान रामबीर सिंह ने कहा, हम सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे। आंदोलन जारी रखेंगे। दरअसल, नरेश टिकैत का बयान उस वक्त आया है, जब एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सरकार बातचीत के लिए हमेशा तैयार है और 22 जनवरी को दिए गए प्रस्ताव पर अब भी कायम है। इस प्रस्ताव में कानूनों को डेढ़ साल तक लंबित किए जाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर साझा समिति बनाए जाने की बात थी।

राकेश टिकैत की शर्त, जब तक हमारे लोग रिहा नहीं, तब तक वार्ता नहीं
वहीं, भाकियू प्रवक्ता और नरेश टिकैत के भाई राकेश टिकैत ने कहा, जब तक हमारे लोगों को जेल से रिहा नहीं किया जाएगा, तब तक किसी से कोई बातचीत नहीं होगी।

उन्होंने भी कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहल की है और सरकार और हमारे बीच की एक कड़ी बने हैं। किसान की पगड़ी का भी सम्मान रहेगा और देश के प्रधानमंत्री का भी मान रहेगा। एक सम्मानपूर्ण समाधान निकलना चाहिए।

साथ ही कहा कि हम कभी दबाव में किसी चीज पर राजी नहीं होंगे। विपक्ष यहां पर वोट तलाशने नहीं आया। विपक्ष यहां हमदर्दी के लिए आता है। हम कोई चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। राकेश टिकैत ने कहा, जिसने तिरंगे का अपमान किया है उसको पकड़ा जाए।

किसी पार्टी विशेष को वोट देने के लिए नहीं कह सकते
किसान किसी को भी वोट करने के लिए आजाद हैं। हम उन्हें किसी खास पार्टी को वोट देने के लिए नहीं कह सकते। अगर किसी पार्टी ने किसानों को पीड़ा दी है तो वे फिर उसे सत्ता में क्यों लाएंगे।-नरेश टिकैत, भाकियू अध्यक्ष

सरकार को किसान आंदोलन के शांतिपूर्ण हल की उम्मीद: जावड़ेकर
 केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने रविवार को कहा, सरकार को किसान आंदोलन के शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद है। पीए नरेंद्र मोदी शनिवार को जो घोषणा की, वह बेहद महत्वपूर्ण है। पीएम ने कहा था कि तीनों कृषि कानूनों को डेढ़ साल के लिए लंबित किए जाने के प्रस्ताव पर सरकार अब भी कायम है।

मेघालय के राज्यपाल की चेतावनी, किसी भी आंदोलन का हल दमन से नहीं
मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, दुनिया में किसी भी आंदोलन को दमन से हल नहीं किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे का जल्द से जल्द हल निकालने की अपील की है।


उन्होंने कहा, मुद्दे का शीघ्र हल निकालना राष्ट्र के हित में है। मैं सरकार से किसानों की चिंताओं को सुनने का आग्रह करता हूं। दोनों पक्षों को जिम्मेदारी से बातचीत में शामिल होना चाहिए।

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