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यूएन में मोदी: आठ साल में चार संबोधन, 2014 में बातचीत की पेशकश, फिर कभी पाकिस्तान का जिक्र भी नहीं

Sat, 25 Sep 2021 05:55 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 25 Sep 2021 05:55 PM IST
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सार
संयुक्त राष्ट्र महासभा भारत और पाकिस्तान के बीच वार-पलटवार का मंच रहा है। खासकर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर दोनों देश आमने-सामने रहे हैं। हम आपको बता रहे हैं कि कैसे पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत ने पाकिस्तान को जवाब देने के रुख में बदलाव किया।
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Narendra Modi speeches at UNGA in years Pakistan Terrorism Nawaz Sharif and Imran Khan absent news and updates
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री इमरान खान। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (25 सितंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) को संबोधित किया। 2014 और 2019 के बाद यह तीसरी बार है, जब मोदी ने न्यूयॉर्क में यूएनजीए के मंच से भाषण दिया। प्रधानमंत्री 2020 में वर्चुअल तौर पर आयोजित बैठक को भी संबोधित कर चुके हैं। उन्होंने जब-जब यूएन में भाषण दिया है, तब-तब उन्होंने अलग-अलग थीम चुनीं। 


खास बात यह रही कि पहली बार (2014 में) उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद की परछाई से निकलकर साथ आने की पेशकश की थी, लेकिन उसकी ओर से यूएन के मंच से बार-बार कश्मीर मुद्दे को उठाने और सीमापार से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के बाद मोदी ने पाकिस्तान का जिक्र करना ही बंद कर दिया था। उन्होने हर बार आतंकवाद पर बात की, लेकिन न तो पाकिस्तान के पीएम और न ही वहां की सरकार के बारे में कोई बयान दिया। 2021 के अपने संबोधन में भी उन्होंने आतंकवाद का जिक्र कर पाकिस्तान पर इशारों में निशाना साधा, लेकिन उसका नाम नहीं लिया। 

साल दर साल कैसा रहा यूएनजीए में भारत का संबोधन?

संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच बीते सालों में लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच वार-पलटवार का मंच बना रहा है। खासकर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नजर रखता है। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ से उनकी बढ़ती करीबी (मोदी के शपथग्रहण में पहुंचे थे नवाज शरीफ) के बीच उम्मीद की जा रही थी कि यूएनजीए में दोनों देश पुरानी खटास को भुलाकर आगे बढ़ेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जहां शरीफ ने यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए वहां मौलिक अधिकारों के हनन और हिंसा का आरोप लगाया, तो वहीं मोदी ने उनके साथ यूएनजीए के इतर होने वाली द्विपक्षीय बैठक रद्द कर दी। 

इसी तरह 2019 में जब मोदी दोबारा चुनाव जीतकर भारत की सत्ता पर काबिज हुए, तो उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 के तहत मिलने वाला विशेष दर्जा छीनने का एलान कर दिया। इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच यूएनजीए में बहस और बढ़ गई। 2018 में ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने इमरान खान के लिए कश्मीर मुद्दा सिरदर्द बन गया और उन्होंने यूएनजीए से लेकर सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और मोदी के खिलाफ निजी तौर पर आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया। अब 2021 की संयुक्त राष्ट्र महासभा स्पीच में इमरान ने एक बार फिर कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के झूठे आरोपों को दोहराया है। 

2014: मोदी ने दिया आतंकवाद छोड़ साथ आने का प्रस्ताव, पाक पीएम पीछे हटे

2014 में देश में भाजपा की सरकार आने के बाद से ही कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान जबरदस्त तरीके से उलझे हैं। हम आपको बता रहे हैं कि बीते सालों में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दे पर उठी बहस किस हद तक गर्म रही।

क्या थी मोदी की पेशकश?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सरकार गठन के बाद भारत के पड़ोसी देशों को अहमियत देने की ठानी। इसी के तहत उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के बाद पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता की योजना भी बनाई। तब उन्होंने कहा था- "भारत अपनी विकास यात्रा के लिए शांतिपूर्ण और स्थायित्व भरा वातावरण चाहता है। एक देश का भाग्य उसके पड़ोस से जुड़ा होता है। इसलिए मेरी सरकार ने अपने पड़ोसियों के साथ सहयोग को सबसे ज्यादा महत्व दिया है।"

मोदी ने कहा था, "इसमें पाकिस्तान भी शामिल है। इसलिए मैं पाकिस्तान के साथ आतंकवाद की परछाई के बिना शांतिपूर्ण माहौल में द्विपक्षीय वार्ता करना चाहता हूं, ताकि हमारी दोस्ती और सहयोग आगे बढ़ सकें। पाकिस्तान को भी एक बेहतर माहौल बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से समझनी चाहिए।"

"इस मंच पर मुद्दे उठाना हम दोनों देशों के बीच किसी भी मुद्दे का हल नहीं है। बल्कि आज हमें जम्मू-कश्मीर में बाढ़ पीड़ितों के बारे में सोचना चाहिए। भारत में हमने बाढ़ पीड़ितों के लिए जबरदस्त तरीके से राहत और बचाव ऑपरेशन चलाए और हमने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी अपनी मदद की पेशकश की।" 

नवाज शरीफ ने नहीं माना मोदी का प्रस्ताव
नवाज शरीफ ने मोदी के संबोधन के बाद कहा था कि हम कश्मीर के मुद्दे को ढांक नहीं सकते। उन्होंने कहा था- "कश्मीर की कई पीढ़ियां लंबे समय से कब्जे में रह रही हैं और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। खासकर कश्मीरी महिलाओं को भयानक पीड़ा का सामना करना पडा है।"

पाक पीएम ने आगे कहा था, "दशकों तक संयुक्त राष्ट्र और द्विपक्षीय तौर पर इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की गई। जम्मू-कश्मीर के केंद्रीय मुद्दे को सुलझाने की जरूरत है। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है। हम कश्मीर के मुद्दे को तब तक ढांक नहीं सकते, जब तक इस पर चर्चा न हो।"

2019: इमरान खान ने पहले संबोधन में दी परमाणु युद्ध की धमकी, मोदी ने कर दिया नजरअंदाज

यूएन महासभा में इस साल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पहली बार भाषण देने पहुंचे थे। खास बात यह रही कि इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के आम चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की थी और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द करा दिया था। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर मुद्दे को उठाने की बात तय थी। इस मौके पर इमरान को जवाब देने के लिए खुद प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूयॉर्क जाने का फैसला किया। 

अपने पहले संबोधन में क्या बोले थे इमरान?
यूएन में इमरान खान ने इस बार धर्म को हथियार बनाया। प्रधानमंत्री मोदी की दोबारा जीत पर इमरान की बौखलाहट साफ दिखी। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा फिदायीन हमले तमिल टाइगर्स ने किए कि वो हिंदू थे। लेकिन हिंदुओं को कोई दोष नहीं देता। उन्होंने कश्मीर मुद्दा उठाते हुए कहा, "मोदी सरकार ने गैरकानूनी तरीके से कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया। 80 लाख लोगों को जबरन कर्फ्यू लगाकर घरों में कैद किया गया है। हजारों युवा गायब हैं। लोग जानवरों से बदतर हालात में हैं। घाटी से कर्फ्यू हटने पर खून खराबा होगा। कश्मीरी ज्यादा कट्टर होंगे। पुलवामा जैसे हमले होंगे।"

इमरान ने कश्मीर को इस्लाम से जोड़ते हुए कहा, "वहां जो हो रहा है, वह मुस्लिमों को हथियार उठाने के लिए उकसाने वाला है। भारत के 18 करोड़ मुस्लिम कश्मीर के चलते कट्टरता की ओर बढ़ेंगे। दुनिया के 1.3 अरब मुस्लिम भी देख रहे हैं। इमरान ने युद्ध की गीदड़भभकी देते हुए कहा, "अगर हम परमाणु युद्ध की ओर बढ़ते हैं तो संयुक्त राष्ट्र इसका जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा था- "अगर दोनों देशों के बीच परंपरागत युद्ध होता है तो कुछ भी हो सकता है। कोई देश पड़ोसी देश के मुकाबले छोटा है तो उसके सामने दो ही रास्ते होते हैं या सरेंडर करना या लड़ते हुए मरना। हम आखिरी सांस तक लड़ेंगे।"

मोदी ने किया आतंकवाद का जिक्र, पर पाकिस्तान नजरअंदाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार उम्मीद से उलट पाकिस्तान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने आतंक की बात करते हुए कहा कि आतंकवाद की समस्या पूरी दुनिया की है। आतंक के खिलाफ पूरी दुनिया को एक होना होगा। भारत के पास आतंक के खिलाफ आवाज भी है और आक्रोश भी। मानवता की खातिर पूरे विश्व का आतंकवाद के खिलाफ होना अनिवार्य है। पीएम मोदी ने आतंकवाद की बात करते हुए कहा कि आतंक के खिलाफ दुनिया संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों की ठेस पहुंचाती है।

2020: कोरोना संकट को छोड़ भारत के खिलाफ बोले इमरान, भारत ने फिर नजरअंदाज किया

2020 वो साल था, जब संयुक्त राष्ट्र की बैठक वर्चुअल तौर पर आयोजित की गई थी। वजह थी कोरोना महामारी, जिसे लेकर पूरी दुनिया में चर्चा जारी थी। हालांकि, तब भी इमरान खान ने अपने 2019 के बयान को दोहराया और कश्मीर पर भारत को घेरने की कोशिश करने लगे।

इमरान बोले- कश्मीर की जनसांख्यिकी बदल रहा भारत
अपने संबोधन में इमरान खान ने कश्मीर राग अलापा। उन्होंने कहा, "जब तक कि जम्मू और कश्मीर का विवाद अंतरराष्ट्रीय वैधता के आधार पर हल नहीं हो जाता, तब तक दक्षिण एशिया में शांति और स्थायित्व नहीं होगा। सुरक्षा परिषद को इस ख़तरनाक विवाद को रोकना चाहिए और अपने ही प्रस्तावों को लागू करना चाहिए जैसा कि पूर्वी तिमोर में किया गया था।" इमरान खान ने जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाने की आलोचना की। साथ ही कहा कि भारत सरकार राज्य में जनसांख्यिकी में बदलाव करने की कोशिश कर रही है, ताकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में उल्लिखित जनमतसंग्रह का परिणाम प्रभावित हो सके।

मोदी ने फिर नहीं किया पाकिस्तान का जिक्र, लेकिन आतंकवाद पर चेताया
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएन में इस साल भी पाकिस्तान को पूरी तरह नजरअंदाज करने का फैसला किया। अपने भाषण के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे पर सवाल उठाए और आतंकवाद को रोकने में असफलता को भी उजागर किया। पीएम ने कहा था- "कहने को तो तृतीय विश्वयुद्ध नहीं हुआ। पर अनेकों युद्ध हुए, गृह युद्ध हुए, आतंकी हमलों ने दुनिया को थर्रा कर रख दिया, खून की नदियां बहती रहीं। इन हमलों में जो मारे गए, वो हमारे आपकी तरह इंसान ही थे। वो लाखों मासूम बच्चे, जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़कर चले गए। कितने ही लोगों को अपने जीवन भर की पूंजी गंवानी पड़ी, घर छोड़ना पड़ा।"

मोदी ने इस सत्र में संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था, प्रक्रिया में बदलाव की मांग रख दी। साथ ही कहा कि भारत की आवाज हमेशा शांति सुरक्षा और समृद्धि के लिए उठेगी। भारत की आवाज मानवता, मानवजाति और आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ रही है।
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