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यूपी में OBC वोटरों को लुभाने की तैयारी, आय सीमा बढ़ाने पर विचार

Sun, 31 Jul 2016 12:08 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 31 Jul 2016 12:08 PM IST
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Narendra Modi govt looking to widen OBC quota net ahead of UP Polls
उत्तर प्रदेश में ओबीसी कुल जनसंख्या का 40 फीसद हैं।  - फोटो : getty images
केंद्र सरकार ओबीसी के एक बड़े समुदाय को आरक्षण की छतरी तले लाने की तैयारी में है। केंद्र इसके लिए सालाना आय की सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख कर सकती है। 
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यह प्रस्ताव कैबिनेट के उस नोट का हिस्सा है जिसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने तैयार किया है। इस प्रस्ताव से स्पष्ट है कि बीजेपी अगले साल होने वाले राज्य चुनावों में ओबीसी वोटरों को लुभाने की तैयारी में है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में, जहां ओबीसी कुल जनसंख्या का 40 फीसद हैं। 
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मौजूदा समय में सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में और उच्च शिक्षा में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि इसके साथ सालाना आय 6 लाख से कम होनी चाहिए। 
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हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक 12 अगस्त को मानसून सत्र खत्म होने के बाद कैबिनेट इस प्रस्ताव को मंजूर कर सकता है। 

1980 में मंडल कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक ओबीसी की आबादी देश की जनसंख्या का 52 फीसद है। हालांकि इस रिपोर्ट में आंकड़े 1931 में हुई जनगणना से लिए गए थे। 80 सालों बाद 2011 में एक बार फिर जाति जनगणना हुई, लेकिन सार्वजनिक हो पाई। 

नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) ने 2006 में ओबीसी की जनसंख्या 41 फीसद बताई थी। हालांकि इसे प्रामाणिक नहीं माना गया क्योंकि एनएसएसओ उपभोग व्यय को दर्ज करता है, जनसंख्या को नहीं। 

कांग्रेस के मनीष तिवारी ने इसे बीजेपी की चाल बताते हुए पिछड़ा वर्ग, दलित, और गरीबों के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया है। समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।

'छवि सुधारने की कोशिश'

Narendra Modi govt looking to widen OBC quota net ahead of UP Polls
बिहार चुनाव से पहले संघ प्रमुख ने आरक्षण की समीक्षा की बात कही थी। - फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बीते सितंबर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की टिप्पणी के बाद बीजेपी की कोशिश अपनी छवि सुधारने की है। बिहार चुनाव से पहले आरएसएस प्रमुख ने आरक्षण की समीक्षा की बात कही थी। हालांकि बाद में उन्होंने इस पर सफाई दी। 

आखिरी बार 2013 में क्रीमीलेयर इनकम कैप की समीक्षा हुई थी, जब इसे 4.5 लाख से बढ़ाकर 6 लाख किया गया था। 2015 में कार्मिक विभाग ने मंत्रालय से ओबीसी क्रीमीलेयर की समीक्षा की सिफारिश की थी। मंत्रालय ने इस काम को नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लास (एनसीबीसी) को सौंप दिया। एनसीबीसी ने इसे 6 लाख से बढ़ाकर 15 लाख सालाना करने की सिफारिश की। 

मंत्रालय ने इसे संशोधित कर 8.16 लाख सालाना कर दिया। सूत्रों के मुताबिक यह आंकड़ा थोड़ा और कम हो सकता है। एनसीबीसी की सिफारिश ग्रुप ए अधिकारियों की सैलरी पर आधारित है। अधिकारियों का कहना है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर आय की सीमा संशोधित की गई है। 

एनसीबीसी के सदस्य अशोक कुमार सैनी ने कहा, 'जातिगत आरक्षण के 23 सालों बाद भी आंकड़े बताते हैं कि कई विभागों में ओबीसी का प्रतिनिधित्व 0-12 प्रतिशत है। ऐसा क्रीमीलेयर के लिए सालाना आय की अवास्तविक गणना के चलते हुआ है। 

हालांकि उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि सालाना आय की सीमा को 8 लाख तक बढ़ाने से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 
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