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पीएम मोदी ने आवास मंत्रालय से पूछा- खाली पड़े सरकारी दफ्तर बन सकता है गरीबों का घर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 31 Aug 2018 08:26 AM IST
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- फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आवास मंत्रालय से कहा है कि वह खाली पड़े सरकारी दफ्तरों, गैर उपयोगी या छोड़े गए कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र की जमीन को गरीबों के लिए घर में तब्दील करने की संभावना पर विचार करे। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की एक बैठक की अध्यक्षता की थी।
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मोदी ने सरकार के फ्लैगशिप में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत शहरों और गांवों में बनने वाले घरों की प्रगति पर रिव्यू बैठक की। इस योजना के तहत 2022 तक शहरों में एक करोड़ और गांवों में दो करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सूत्रों का कहना है कि पीएम ने शहरी आवास मंत्रालय से पूछा है कि कैसे मुंबई की खाली पड़ी जमीन को लोगों के सिर पर छत मुहैया करवाने के उपयोग में किया जा सकता है।
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नरेंद्र मोदी ने ग्रामीण विकास मंत्रालय आवास योजना की ग्रामीण घटक है, उसे निर्देश दिए हैं कि वह 3.94 लाख जमीन विहिन परिवारों को दिसंबर तक जमीन आवंटित करे। इसके लाभार्थियों को घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता तभी मिलेगी जब उनके पास जमीन होगी। इस बात का ध्यान रखते हुए कि शहरों में 1.1 करोड़ खाली पड़े हुए हैं, शहरी विकास मंत्रालय को अक्टूबर तक किरायेदार अधिनियम के तहत एक मॉडल तैयार करने को कहा गया है।
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इस कानून के अंतर्गत किरायेदार और मकान मालिक के हितों की रक्षा करते हुए उन्हें शोषण से बचाया जाएगा। पीएमो ने राष्ट्रीय शहरी किराया नीति को अंतिम रूप देने के लिए अक्टूबर की डेडलाइन दी है, जिसके तहत लोगों को सस्ती दरों पर किराए का मकान मिल सके। इसका प्राथमिक उद्देश्य प्रवासी कर्मचारियों और कामगारों की जरुरत का ध्यान रखते हुए उन्हें किराए पर घर उपलब्ध कराना है।