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Indus Waters Treaty: ' देश से बड़ा कोई नहीं', अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बयान पर नारायण राणे ने दी नसीहत
Sun, 27 Apr 2025 05:20 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 27 Apr 2025 05:20 PM IST
सार
Indus Waters Treaty: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की तरफ से सिंधु जल संधि पर दिए गए बयान पर पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से लिए गए सुरक्षा संबंधी फैसलों पर सार्वजनिक तौर पर बहस नहीं होनी चाहिए।
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नारायण राणे और अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
- फोटो : ANI
विस्तार
पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने रविवार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की उस टिप्पणी से असहमति जताई जिसमें उन्होंने सिंधु नदी के जल प्रवाह को रोकने की भारत की क्षमता पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से लिए गए सुरक्षा संबंधी फैसलों पर सार्वजनिक रूप से बहस नहीं होनी चाहिए। 22 अप्रैल को कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद केंद्र ने पाकिस्तान को दंडित करने के लिए कई कदम उठाए, जिसमें 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित रखना भी शामिल है।
यह भी पढ़ें - Pahalgam Attack: खरगे बोले- आतंकी हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे केंद्र, कांग्रेस का पूरा समर्थन
शंकराचार्य ने केंद्र सरकार पर साधा था निशाना
वहीं शंकराचार्य के वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए नारायण राणे ने कहा, 'हम उनका सम्मान करते हैं, लेकिन यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है। देश से बड़ा कोई नहीं है।' बता दें कि, आध्यात्मिक नेता ने दावा किया था कि भारत में सिंधु नदी के पानी को मोड़ने या बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे की कमी है और उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाओं के निर्माण में दो दशक लग सकते हैं। वीडियो संदेश में सरस्वती ने संधि पर केंद्र के कदम को लोगों को बेवकूफ बनाने वाला बताया।
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संधि के तहत भारत को विशेष अधिकार
विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों - सतलुज, ब्यास और रावी - के पानी पर विशेष अधिकार दिए गए थे, जिसका औसत वार्षिक प्रवाह लगभग 33 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) है। पश्चिमी नदियों - सिंधु, झेलम और चिनाब - का पानी, जिसका औसत वार्षिक प्रवाह लगभग 135 एमएएफ है, का अधिकांश हिस्सा पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। अब संधि स्थगित होने के बाद, सरकार सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी का उपयोग करने के तरीकों पर विचार कर रही है।
यह भी पढ़ें - Pahalgam Attack: सिद्धारमैया ने पुराने बयान पर दी सफाई, बोले- पाकिस्तान को सिखाएं सबक, दोबारा न करे ऐसे कृत्य
सिंधुदुर्ग में विकास योजनाओं की रूपरेखा
वहीं स्थानीय मुद्दों पर बोलते हुए राणे ने सिंधुदुर्ग जिले के लिए विकास योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि वह सिंधुदुर्ग के सबसे छोटे तालुका डोडामार्ग के पास 1,000-1,200 एकड़ के भूखंड पर 500 विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए उद्योगपतियों गौतम अदाणी, सज्जन जिंदल और अन्य के साथ बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा, 'इससे एक लाख नौकरियां पैदा होंगी और जिले की प्रति व्यक्ति आय 2.50 लाख रुपये से बढ़कर 3 लाख रुपये से अधिक हो जाएगी।' उन्होंने कहा कि निवासियों को कृषि-व्यवसाय और विपणन में विविधता लानी चाहिए।
शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे पर भी बोले नारायण राणे
नागपुर और सिंधुदुर्ग को जोड़ने वाले प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के बारे में चिंताओं को संबोधित करते हुए राणे ने कहा कि अगर मुआवजे का मुद्दा उठता है तो वह किसानों का समर्थन करेंगे। सह्याद्री टाइगर कॉरिडोर और वन्यजीव आवासों पर संभावित प्रभावों का आकलन करते हुए उन्होंने कहा, 'अगर उचित मुआवजे के बिना उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया जाता है, तो मैं किसानों के साथ खड़ा रहूंगा।'
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शंकराचार्य ने केंद्र सरकार पर साधा था निशाना
वहीं शंकराचार्य के वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए नारायण राणे ने कहा, 'हम उनका सम्मान करते हैं, लेकिन यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है। देश से बड़ा कोई नहीं है।' बता दें कि, आध्यात्मिक नेता ने दावा किया था कि भारत में सिंधु नदी के पानी को मोड़ने या बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे की कमी है और उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाओं के निर्माण में दो दशक लग सकते हैं। वीडियो संदेश में सरस्वती ने संधि पर केंद्र के कदम को लोगों को बेवकूफ बनाने वाला बताया।
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संधि के तहत भारत को विशेष अधिकार
विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों - सतलुज, ब्यास और रावी - के पानी पर विशेष अधिकार दिए गए थे, जिसका औसत वार्षिक प्रवाह लगभग 33 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) है। पश्चिमी नदियों - सिंधु, झेलम और चिनाब - का पानी, जिसका औसत वार्षिक प्रवाह लगभग 135 एमएएफ है, का अधिकांश हिस्सा पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। अब संधि स्थगित होने के बाद, सरकार सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी का उपयोग करने के तरीकों पर विचार कर रही है।
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सिंधुदुर्ग में विकास योजनाओं की रूपरेखा
वहीं स्थानीय मुद्दों पर बोलते हुए राणे ने सिंधुदुर्ग जिले के लिए विकास योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि वह सिंधुदुर्ग के सबसे छोटे तालुका डोडामार्ग के पास 1,000-1,200 एकड़ के भूखंड पर 500 विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए उद्योगपतियों गौतम अदाणी, सज्जन जिंदल और अन्य के साथ बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा, 'इससे एक लाख नौकरियां पैदा होंगी और जिले की प्रति व्यक्ति आय 2.50 लाख रुपये से बढ़कर 3 लाख रुपये से अधिक हो जाएगी।' उन्होंने कहा कि निवासियों को कृषि-व्यवसाय और विपणन में विविधता लानी चाहिए।
शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे पर भी बोले नारायण राणे
नागपुर और सिंधुदुर्ग को जोड़ने वाले प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के बारे में चिंताओं को संबोधित करते हुए राणे ने कहा कि अगर मुआवजे का मुद्दा उठता है तो वह किसानों का समर्थन करेंगे। सह्याद्री टाइगर कॉरिडोर और वन्यजीव आवासों पर संभावित प्रभावों का आकलन करते हुए उन्होंने कहा, 'अगर उचित मुआवजे के बिना उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया जाता है, तो मैं किसानों के साथ खड़ा रहूंगा।'
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