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कलकत्ता हाईकोर्ट: शेर-शेरनी के नाम को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई, कोर्ट ने कहा- हमें विवादों से बचना चाहिए
Thu, 22 Feb 2024 08:12 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Thu, 22 Feb 2024 08:12 PM IST
सार
त्रिपुरा से बंगाल सफारी पार्क में लाए गए शेर और शेरनी के नाम को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। विश्व हिंदू परिषद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी जानवर का नाम किसी देवता या किसी भी धर्म से संबंधित व्यक्ति के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए।
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कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : Social Media
विस्तार
12 फरवरी को त्रिपुरा के सेपाहिजाला जूलॉजिकल पार्क से शेर और शेरनी को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के बंगाल सफारी पार्क में लगाया गया था। विश्व हिंदू परिषद ने सर्किट बेंच के सामने एक याचिका दायर में शेर और शेरनी के नाम बदलने की मांग की है, जिसमें कहा गया कि नागरिकों के एक वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत हुई है। इस मामले पर गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट पीठ में सुनवाई हुई। इस दौरान पीठ ने गुरुवार को कहा कि विवाद से बचने के लिए शेरनी का नाम सीता और शेर का नाम अकबर रखने से बचना चाहिए था।
प्राधिकरण को नाम बदलने का फैसला लेना चाहिए- कोर्ट
शेर का नाम स्वामी विवेकानंद या रामकृष्ण परमहंस के नाम को लेकर पीठ ने सुझाव दिया कि पश्चिम बंगाल चिड़ियाघर प्राधिकरण दोनों जानवरों का नाम बदल का फैसला करें। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पूछा कि क्या किसी जानवर का नाम देवताओं, पौराणिक नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों या नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम पर रखा जा सकता है। न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि विवाद से बचने के लिए जानवरों के इस तरह के नामकरण से बचना चाहिए था। यह कहते हुए कि पश्चिम बंगाल पहले से ही स्कूल में नौकरियों की नियुक्तियों से लेकर कई अन्य मुद्दों पर विवादों से घिरा हुआ है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस विवाद से बचें, जल्द एक फैसला लें।न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि किसी जानवर का नाम किसी देवता या किसी भी धर्म से संबंधित व्यक्ति के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए।
मां सीता की देश के कई हिस्सों में पूजा होती है- कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। हर समुदाय के लोगों को अपना धर्म मानने का अधिकार है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पूछा कि आपको सीता और अकबर के नाम पर एक शेरनी और एक शेर का नाम रखकर विवाद क्यों खड़ा करना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों का एक बड़ा वर्ग सीता की पूजा करता है, जबकि अकबर एक बहुत ही सफल और धर्मनिरपेक्ष मुगल सम्राट था। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि वह दोनों जानवरों के नामों का समर्थन नहीं करते हैं। सरकारी वकील ने दावा किया कि जानवरों का नाम त्रिपुरा में रखा गया था, न कि पश्चिम बंगाल में, हमारे पास यह साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज हैं।
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कोर्ट ने कहा कि अगर नामकरण वहां किया गया है तो त्रिपुरा में चिड़ियाघर प्राधिकरण को मामले में एक पक्ष बनाया जाना जरूरी है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि एक सामाजिक संगठन और दो व्यक्ति याचिकाएं लेकर आए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि नामकरण से देश के नागरिकों के एक वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है, इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ताओं के व्यक्तिगत अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने भारत के लोगों के एक बड़े वर्ग के हित का समर्थन किया है, जो एक विशेष धर्म से संबंधित हैं।
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प्राधिकरण को नाम बदलने का फैसला लेना चाहिए- कोर्ट
शेर का नाम स्वामी विवेकानंद या रामकृष्ण परमहंस के नाम को लेकर पीठ ने सुझाव दिया कि पश्चिम बंगाल चिड़ियाघर प्राधिकरण दोनों जानवरों का नाम बदल का फैसला करें। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पूछा कि क्या किसी जानवर का नाम देवताओं, पौराणिक नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों या नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम पर रखा जा सकता है। न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि विवाद से बचने के लिए जानवरों के इस तरह के नामकरण से बचना चाहिए था। यह कहते हुए कि पश्चिम बंगाल पहले से ही स्कूल में नौकरियों की नियुक्तियों से लेकर कई अन्य मुद्दों पर विवादों से घिरा हुआ है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस विवाद से बचें, जल्द एक फैसला लें।न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि किसी जानवर का नाम किसी देवता या किसी भी धर्म से संबंधित व्यक्ति के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए।
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मां सीता की देश के कई हिस्सों में पूजा होती है- कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। हर समुदाय के लोगों को अपना धर्म मानने का अधिकार है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पूछा कि आपको सीता और अकबर के नाम पर एक शेरनी और एक शेर का नाम रखकर विवाद क्यों खड़ा करना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों का एक बड़ा वर्ग सीता की पूजा करता है, जबकि अकबर एक बहुत ही सफल और धर्मनिरपेक्ष मुगल सम्राट था। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि वह दोनों जानवरों के नामों का समर्थन नहीं करते हैं। सरकारी वकील ने दावा किया कि जानवरों का नाम त्रिपुरा में रखा गया था, न कि पश्चिम बंगाल में, हमारे पास यह साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज हैं।
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कोर्ट ने कहा कि अगर नामकरण वहां किया गया है तो त्रिपुरा में चिड़ियाघर प्राधिकरण को मामले में एक पक्ष बनाया जाना जरूरी है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि एक सामाजिक संगठन और दो व्यक्ति याचिकाएं लेकर आए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि नामकरण से देश के नागरिकों के एक वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है, इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ताओं के व्यक्तिगत अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने भारत के लोगों के एक बड़े वर्ग के हित का समर्थन किया है, जो एक विशेष धर्म से संबंधित हैं।