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Cheetah: चीते की मौत पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश, टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों की मांगी जानकारी
Wed, 29 Mar 2023 01:48 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 29 Mar 2023 01:48 AM IST
सार
जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने केंद्र से टास्क फोर्स के उन विशेषज्ञों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा जो चीता प्रबंधन के विशेषज्ञ हैं, उनसे उनका अनुभव और योग्यता से जुड़े दस्तावेज दो सप्ताह के भीतर जमा करने को कहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबियाई चीते की मौत के एक दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चीता कार्यबल के विशेषज्ञों से उनकी योग्यता और अनुभव के बारे में जानकारी मांगी। नामीबिया से आई फीमेल चीता साशा सोमवार सुबह कूनो नेशनल पार्क स्थित अपने बाड़े में मृत मिली थी। उसकी किडनी खराब थी और उसका इलाज चल रहा था।
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जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने केंद्र से टास्क फोर्स के उन विशेषज्ञों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा जो चीता प्रबंधन के विशेषज्ञ हैं, उनसे उनका अनुभव और योग्यता दो सप्ताह के भीतर जमा करने को कहा है।
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शीर्ष अदालत में केंद्र सरकार की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र ने कोर्ट से यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के लिए अब विशेषज्ञ समिति से दिशा-निर्देश और सलाह लेने की जरूरत नहीं है। इस विशेषज्ञ समिति का गठन उच्चतम न्यायालय के 28 जनवरी, 2020 के आदेश पर किया गया था।
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आदेश पारित करते हुए शीर्ष अदालत ने तब कहा था कि वन्यजीव संरक्षण के पूर्व निदेशक एमके रंजीत सिंह, उत्तराखंड में मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव प्रशासन धनंजय मोहन और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में डीआईजी (वन्यजीव) की सदस्यता वाली तीन सदस्यीय समिति भारत में अफ्रीकी चीतों को लाए जाने पर एनटीसीए का मार्गदर्शन करेगी।
समिति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांतो चंद्र सेन ने कहा कि चीता टास्क फोर्स के पास पैनल में कोई चीता विशेषज्ञ नहीं है। उन्होंने कहा कि चूंकि चीतों को लाया गया है, इसलिए एनटीसीए को कम से कम शुरुआती स्तर के लिए शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के साथ काम करना जारी रखना चाहिए।
जनवरी में हुई थी बीमार
22 जनवरी को नामीबिया से लाकर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ी गई मादा चीता साशा को मॉनीटरिंग टीम ने उसे सुस्त पाया था। चीतों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए तैनात तीन पशु चिकित्सकों ने साशा की स्वास्थ्य जांच की। यह पाया कि उसे उपचार की आवश्यकता है। उसी दिन उसे क्वारेंटाइन बाड़े में लाया गया। क्वारेंटाइन बाड़े में लाने की प्रक्रिया में साशा का ब्लड सैम्पल भी लिया गया। इसका परीक्षण वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में स्थित लैब में अत्याधुनिक मशीनों से किया गया। खून के नमूने की जांच से पता चला कि साशा को किडनी में संक्रमण है। वन विहार भोपाल से वन्यप्राणी चिकित्सक एवं एक अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक को पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के साथ कूनो राष्ट्रीय उद्यान भेजा गया। साशा के परीक्षण से किडनी की बीमारी की पुष्टि हुई।