इलाहाबाद: प्रधानमंत्री जी, अब तो जवाब दो, नैनी के अच्छे दिन कब आएंगे?
- औद्योगिक नगरी के विकास पर देना होगा पीएम मोदी को जवाब
- लोकसभा चुनाव की सभा में नरेंद्र मोदी ने किया था वादा
- लंबे समय से हो रही है कई कंपनियों को नया जीवन देने की मांग
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इलाहाबाद के नैनी स्थित औद्योगिक नगरी तकरीबन उजाड़ सी हो गई है। भारत पम्प्स एंड कंप्रेशर लिमिटेड (बीपीसीएल) बंदी की कगार पर है। इसे बचाने के लिए कर्मचारी केंद्र सरकार से गुहार लगा रहे हैं। कॉटन मिल, त्रिवेणी स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग लिमिटेड, त्रिवेणी इंजीनियरिंग वर्क्स, आईटीआई जैसे उपक्रमों को भी नया जीवन देने की मांग लंबे समय से हो रही हैं, लेकिन सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रही।
यह हाल तब है जब लोकसभा चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी ने केंद्र में भाजपा की सत्ता बनने पर औद्योगिक नगरी के विकास का ऐलान किया था। इसके बाद से ही बंद हो चुके एवं बीमार सरकारी, गैरसरकारी उपक्रमों के 50 हजार से अधिक कर्मचारी इस सपने के साकार होने की बाट जोह रहे हैं। अब भाजपा कार्य समिति की दो दिवसीय बैठक में प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री और उद्योग मंत्री भी मौजूद रहेंगे, सो बंद हो चुके उपक्रमों के कर्मचारी औद्योगिक नगरी को जीवन देने की किसी घोषणा की आस लगाए हैं, क्योंकि बीपीसीएल समेत अन्य कंपनियों के श्रमिक मोदी से अब भी अच्छे दिन की उम्मीद संजोए बैठे हैं।
पिछले 20-25 वर्ष में नैनी औद्योगिक नगरी के दुर्दिन चल रहे हैं। एक-एक कर बड़ी-छोटी काफी कंपनियां बंद हो गईं। जो बची हैं उनकी भी स्थिति अच्छी नहीं है। कई छोटी कंपनियां तो इस उम्मीद पर चल रही हैं कि कभी तो स्थिति सुधरेगी।
औद्योगिक नगरी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। चौपट बिजली व्यवस्था, ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था अच्छी न होने से उद्योग बंद हुए तो नेतागिरी ने भी काफी नुकसान पहुंचाया। इसकी वजह से उपक्रम बंद होते गए, लेकिन केंद्र से लेकर प्रदेश सरकारों ने कभी नैनी औद्योगिक नगरी के विकास और नया जीवन देने के बारे में कभी विचार नहीं किया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले वर्ष दो सितंबर को नैनी के सड़वा में सरस्वती हाईटेक टाउनशिप का शिलान्यास किया लेकिन नौ माह बाद भी कोई काम नहीं शुरू हुआ।
इन कंपनियों से गुलजार थी औद्योगिक नगरी
नैनी औद्योगिक नगरी का एक समय में देश विदेश में नाम था। औद्योगिक नगरी त्रिवेणी स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग लिमिटेड, त्रिवेणी इंजीनियरिंग वर्क्स, आईटीआई, हिन्दुस्तान केबिल्स, त्रिवेणी शीट एवं ग्लास वर्क्स, इलाहाबाद ग्लास वर्क्स, नैनी ग्लास वर्क्स, लिप्टन चाय, चैम्पियन साइकिल्स, संगम स्ट्रक्चरल, मेजा कताई मिल, कॉटन मिल, रिलायंस जैसी सरकारी, गैर सरकारी बड़ी और सैकड़ों छोटी कंपनियों से गुलजार थी।
बीपीसीएल पीएम से मांग रहा 213.46 करोड़ का पैकेज
बीपीसीएल जो एक समय ओएनजीसी, आईओसीएल, ईआईएल, बीपीसीएल, बीएचईएल, एनपीसीआईएल, तेल शोधक प्रतिष्ठान, उवर्रक क्षेत्र, प्राकृतिक गैस, न्यूक्लीयर ऊर्जा प्लांट, विद्युत उत्पादन से जुड़े संस्थानों के लिए पंप एवं कंप्रेशर के साथ उपकरण निर्माण, स्पेयर पार्ट्स एवं मरम्मत की जिम्मेदारी संभालती थी, आज वह बदहाल है।
ऐसे वक्त में भी बीपीसीएल के पास वर्तमान में 146 करोड़ के वर्कआर्डर हैं और करीब 200 करोड़ का वर्कआर्डर मिलने वाला है। शनिवार को बीपीसीएल गेस्टहाउस में हुई बैठक में कर्मियों ने कहा कि मोदी ने चुनावी सभा में औद्योगिक नगरी को नया जीवन देने का वादा किया था। तभी से कर्मचारी अच्छे दिन की आस लगाए हैं।
यूनियन के अध्यक्ष शिव प्रसाद यादव एवं महामंत्री जीपी सिंह ने कहा कि बीपीसीएल पूरी क्षमता से चले तो तेल एवं गैस, पेट्रोलियम, रिफाइनरी, आणविक ऊर्जा प्लांट के लिए बड़े आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकती है। बीपीसीएल को 213.43 करोड़ के पुन: संरचना पैकेज की दरकार है। यह प्रस्ताव भारी उद्योग मंत्रालय के बाद नीति आयोग एवं प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रस्तुत हो चुका है।
फिलहाल पीएम कार्यालय में विचाराधीन है। उधर, औद्योगिक कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मंगला तिवारी ने भी औद्योगिक नगरी के उद्धार के लिए प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है।
एशिया की बेहतर कंपनियों में शुमार थी त्रिवेणी ग्लास
नैनी औद्योगिक नगरी में त्रिवेणी शीट एवं ग्लास वर्क्स एशिया में सबसे बेहतर क्वालिटी की ग्लास बनाने के लिए विख्यात थी। शंकरगढ़ से निकलने वाले सिलिका सैंड से बेहद उच्च क्वालिटी का ग्लास बनता था। वह भी समय था जब त्रिवेणी ग्लास देशभर की आटोमोबाइल कंपनियों को विंड ग्लास बेचने वाली बड़ी कंपनियों में शुमार थी। यही नहीं नैनी ग्लास, इलाहाबाद ग्लास जैसे कंपनियां भी उच्च श्रेणी का उत्पाद तैयार करती थीं लेकिन यह कंपनियां बंद हो गईं।