Maharashtra: ‘मवेशियों के साथ किसी भी तरह से नहीं कर सकते क्रूरता’, जानिए क्यों बॉम्बे HC ने क्यों कही यह बात
कुछ समय पहले पुलिस ने 49 जानवरों को जब्त किया था। इसके खिलाफ जानवरों के मालिकों ने निचली अदालत में याचिका लगाई थी, जिसे रद्द कर दिया गया था। इसके बाद मालिकों ने हाईकोर्ट में मामले की याचिका लगाई।
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जानवरों में भी इंसानों के तरह ही भावनाएं होती है। अंतर बस इतना है कि इंसान बोलकर अपनी बात रख सकते हैं और जानवर बोल नहीं सकते। इसलिए उनके अधिकारों के लिए कानून बनाए गए हैं। जानवरों का भी ध्यान रखना होगा। यह कहना है बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच का।
जानिए, क्या है पूरा मामला
मामले की जानकारी देते हुए एक अधिवक्ता ने बताया कि कुछ समय पहले पुलिस ने 49 जानवरों को जब्त किया था। इसके खिलाफ जानवरों के मालिकों ने निचली अदालत में याचिका लगाई थी, जिसे रद्द कर दिया गया था। इसके बाद मालिकों ने हाईकोर्ट में मामले की याचिका लगाई। मालिकों का कहना है कि उनके पास जानवरों के स्थानांतरण के लिए दस्तावेज भी हैं। इसी मामले की सुनवाई करते हुए नागपुर बेंच के जस्टिस जीए सनप ने कहा कि जानवरों को अमानवीय तरीके से ट्रकों में भरकर ले जाया जा रहा था। पुलिस ने इसी मामले में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 49 जानवरों को जब्त किया। कोर्ट ने कहा कि जानवरों के साथ किसी भी तरह से क्रूरता नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने मालिक को हिरासत में रखना बताया अनुचित
उच्च न्यायालय ने कहा कि जब्त जानवर में अधिकांश दुधारू भैंस थी, जिन्हें ठूंस रखा था। गाड़ी में चारे और पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। मवेशियों को क्रूरता से ले जाया जा रहा था। जस्टिस सनप ने अंतिम फैसले आने तक एक गौशाला को मवेशियों के रखरखाव और उनके कल्याण के लिए आदेश दिया है। बता दें, सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार, जानवरों के साथ क्रूरता के मामले में जानवरों के मालिकों को हिरासत में रखना उचित नहीं है।