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अदालत ने जी एन साईबाबा की जमानत याचिका खारिज की
Tue, 28 Jul 2020 07:32 PM IST
मुकेश कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Tue, 28 Jul 2020 07:32 PM IST
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bombay high court
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बम्बई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने माओवादियों के साथ संबंधों के लिए एक कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जी एन साईबाबा की जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।
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साईबाबा ने चिकित्सा आधार पर एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि अन्य बीमारियों से ग्रस्त होने और खराब सेहत के कारण जेल में उसके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का अधिक जोखिम है।
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विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर को माओवादियों के साथ संबंधों के लिए मार्च 2017 में दोषी ठहराया गया था और इस समय वह नागपुर केन्द्रीय कारागार में बंद है। न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एक खंडपीठ ने मंगलवार को कहा कि उनकी जमानत याचिका खारिज की जाती है।
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साईबाबा ने, वकील निहाल सिंह राठौड़ के माध्यम से दायर अपनी याचिका में, चिकित्सा आधार पर 45 दिनों के लिए जमानत मांगी थी, ताकि वे बाहर इलाज करा सकें और हैदराबाद में अपनी कैंसर से पीड़ित मां से भी मिल सकें।
याचिकाकर्ता ने कहा था कि वह गंभीर बीमारियों से ग्रस्त है और जेल में कोविड-19 से उसके संक्रमित होने का अधिक खतरा है। उसने कहा था कि जेल में उसे समुचित इलाज नहीं मिल रहा है।
हालांकि, विशेष सरकारी वकील पी के सथ्यनाथन ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को जेल की एक अलग विंग में रखा गया था, जहां उनका जेल की अन्य विंग में बंद कैदियों से संपर्क नहीं होता है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के भाई उनकी मां की देखभाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'इस तरह सभी आधारों पर चाहे चिकित्सा हो , महामारी या उनकी मां का स्वास्थ्य हो, वह जमानत पर रिहा होने के हकदार नहीं है।'