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नगालैंड हिंसा: गोलीबारी में लिप्त जवानों के बयान दर्ज होंगे, सेना ने दी एसआईटी को जोरहाट यूनिट में जाने की इजाजत

Wed, 29 Dec 2021 04:24 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 29 Dec 2021 04:24 PM IST
सार

Nagaland Violence: चार दिसंबर को हुई हिंसा व गोलीबारी की घटना में नगालैंड के मोन जिले में 14 नागरिक मारे गए थे। इसमें शामिल रहे जवान सेना की जोरहाट इकाई के थे। 

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Nagaland Violence: Statements of soldiers involved in firing will be recorded, Army allows SIT to access Jorhat unit
नगालैंड हिंसा - फोटो : Social media

विस्तार

भारतीय सेना ने इस माह के आरंभ में नगालैंड के मोन जिले में हुई हिंसा की घटना में शामिल अपने जवानों के बयान दर्ज करने की इजाजत दे दी है। बुधवार को सैन्य सूत्रों ने बताया कि नगालैंड का विशेष जांच दल असम के जोरहाट जिले में स्थित सैन्य इकाई के जवानों के बयान दर्ज कर सकेगा। 

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सैन्य सूत्रों ने कहा कि हिंसा की घटना को लेकर सेना पहले दिन से सरकार को जांच में सहयोग करने के लिए आश्वस्त कर रही है। चार दिसंबर को हुई हिंसा व गोलीबारी की घटना में नगालैंड के मोन जिले में 14 नागरिक मारे गए थे। इसमें शामिल रहे जवान सेना की जोरहाट इकाई के थे। 
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इस बीच जांच के लिए गठित सेना की 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' (सीओआई) टीम ने बुधवार को तिरु-ओटिंग इलाके में घटनास्थल का निरीक्षण किया। हालांकि, स्थानीय लोगों ने उनके साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया। मोन जिले के पुलिस एवं प्रशासन के प्रतिनिधि भी टीम के साथ मौजूद रहे। गोलीबारी की घटना में कथित तौर पर शामिल रहे सुरक्षा बलों के कम से कम तीन कर्मी भी मौके पर मौजूद रहे।
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सूत्रों ने बताया कि मोन जिले में आदिवासी समुदाय के शीर्ष संगठन कोन्याक संघ द्वारा लिए गए निर्णय का अनुसरण करते हुए मारे गए लोगों के परिजनों और ग्राम परिषद के सदस्यों ने टीम से मुलाकात नहीं की। कोन्याक संघ के अध्यक्ष होइंग कोन्याक ने दोहराया कि न्याय मिलने तक सेना के साथ असहयोग जारी रहेगा।

इस बीच, कोहिमा के जनसंपर्क अधिकारी (रक्षा) लेफ्टिनेंट कर्नल सुमित शर्मा ने बुधवार शाम को एक बयान में कहा कि मोन घटना की जांच के लिए सेना द्वारा गठित सीओआई ने ओटिंग गांव में घटनास्थल का दौरा किया।

सेना कर रही कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी 
नगालैंड हिंसा की घटना के बाद सेना ने एक कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश जारी किया था। इसकी जिम्मेदारी उत्तरपूर्व में तैनात एक मेजर जनरल को दी गई है। सेना ने कहा कि हम इस मामले की जांच के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित किए गए विशेष जांच दल (एसआईटी) का पूरा सहयोग कर रहे हैं और जो भी जानकारियां मांगी जा रही हैं वह समय से साझा की जा रही हैं। 

14 ग्रामीणों की हुई थी मौत
जिले में चार दिसंबर को हुई इस घटना में 14 ग्रामीणों की मौत हो गई थी, वहीं एक सैनिक भी शहीद हो गया था। सुरक्षाबलों को उग्रवादियों की खुफिया जानकारी मिली थी, लेकिन गलती से ग्रामीणों उग्रवादी समझ लिया गया और उन पर गोलीबारी की गई थी। 


अफ्स्पा हटाने की उठी मांग
सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 14 नागरिकों की मौत के बाद पूरे नगालैंड में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे और विवादास्पद अफ्स्पा (सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम) को हटाने की मांग ने एक बार फिर से जोर पकड़ लिया। इस विवादित कानून को हटाने पर फैसला लेने के लिए अब केंद्र सरकार की ओर से एक समिति का गठन करने का फैसला किया गया है जो 45 दिनों में अपनी रिपोर्ट जमा करेगी।

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