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नगालैंड में गोलीबारी: 'संदिग्ध भरोसे' का घाव लेकर वहां के लोग 1944 से कर रहे हैं 'थैंक्यू' का इंतजार!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 06 Dec 2021 06:42 PM IST
सार

सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में जो उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है, उसके सदस्य डॉ. वेखो स्वूरो कहते हैं, कारगिल की लड़ाई में भी नगालैंड के जवानों ने अपनी बहादुरी दिखाई, मगर 'धन्यवाद' नहीं मिला। उस धन्यवाद में 'भरोसा' छिपा है। जब तक यह भरोसा संदिग्ध है, तब तक नगालैंड के लोगों को लगता है कि भारत सरकार उन्हें अपना नहीं समझती...

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Nagaland firing incident: Nagaland helped Netaji Subhaschand bose, even also faught in kargil battle, but people of Nagaland feel that the Indian government does not consider them their own
नगालैंड में गोलीबारी - फोटो : Agency

विस्तार

भारतीय सेना की गोलीबारी में नगालैंड के 13 नागरिकों की मौत हो गई। सड़क से लेकर संसद तक लोगों का गुस्सा देखने को मिला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस घटना को लेकर सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा में बयान दिया है। इसके बावजूद विपक्षी सांसदों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। शाह ने कहा, विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। यह टीम एक माह के अंदर जांच पूरी करेगी। सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में जो उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है, उसके सदस्य डॉ. वेखो स्वूरो कहते हैं, दरअसल आज तक नगालैंड के लोग संदिग्ध 'भरोसे' का घाव लेकर जी रहे हैं। नगालैंड के बहादुरों ने 1944 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। नेताजी खुद नगालैंड में कुछ समय तक रहे। उनकी तरफ से बहुत आश्वासन मिले। देश आजाद हो गया, मगर नगालैंड वाले आज तक भारत सरकार की तरफ से एक 'थैंक्यू' का इंतजार कर रहे हैं। कारगिल की लड़ाई में भी नगालैंड के जवानों ने अपनी बहादुरी दिखाई, मगर 'धन्यवाद' नहीं मिला। उस धन्यवाद में 'भरोसा' छिपा है। जब तक यह भरोसा संदिग्ध है, तब तक नगालैंड के लोगों को लगता है कि भारत सरकार उन्हें अपना नहीं समझती।

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नेताजी की फौज को दी थी मदद

डॉ. वेखो स्वूरो कहते हैं, नगालैंड में सुरक्षा बलों को जो इंटेलिजेंस इनपुट मिला था, उसे ठीक से नहीं समझा गया। दूसरी बात ये हो सकती है कि वह इनपुट गलत रहा। डॉ. वेखो, बीच में दोबारा से 1944 में पहुंच जाते हैं। वे कहते हैं, मौजूदा नगालैंड की स्थिति को समझने के लिए अतीत को जानना आवश्यक है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने नगालैंड के लोगों को जो भरोसा दिया था, उस पर काम ही नहीं हुआ। भारत सरकार ने अभी तक एक बार भी ये नहीं कहा, हम नगालैंड के लोगों के आभारी हैं, उन्होंने देश की आजादी में योगदान दिया है। अंग्रेजों को मार भगाने में मदद की है। नगालैंड के लोगों ने नेताजी को अपना राशन व मुर्गी तक दे दी थी। हमारे लोग भूखे रहे, मगर उन्होंने नेताजी की फौज को कष्ट नहीं होने दिया। आज उसी नगालैंड के कई हिस्सों में मोबाइल फोन के टावर तक नहीं हैं।

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स्थानीय लोगों को फौज में करें भर्ती

नगालैंड के लोगों पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जो भरोसा किया था, वह भारत सरकार नहीं कर पाई। बतौर डॉ. वेखो, नेताजी के भरोसे को भारत सरकार 'मान्यता' नहीं दे सकी। अगर ये सरकार नगालैंड के लोगों को अपना मानती तो आज तक एक 'थैंक्यू' कम से कम अवश्य आ जाता। नगालैंड में बहुत गरीबी है, बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। यहां के लोगों पर केंद्र सरकार को विश्वास नहीं है, इसलिए भारतीय सेना ने लोगों पर गोली चला दी। वे बर्मा से आए उग्रवादी नहीं थे। उनकी गाड़ी चेक कर सकते थे। सीधे ही गोली चलाकर उन्हें मार डाला। वे मजदूर कोयले की खान में काम करते थे। उन्हें उग्रवादी समझकर मार दिया गया। इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई। नगालैंड में स्थानीय युवाओं को पुलिस, अर्धसैनिक बल और फौज में भर्ती किया जाए। उसके बाद देखें कि यहां उग्रवादी कैसे आता है।

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बतौर डॉ. वेखो, यहां पर बाहर की पुलिस, बाहर की सेना नहीं चाहिए। मेरा मतलब है कि नगालैंड में जो भी पुलिस या सेना रहे, मगर उसमें नगालैंड वाले हों। आज सेना पर लोगों का कथित शोषण करने के आरोप लगते हैं। महिलाओं के आरोप तो बताने लायक ही नहीं हैं। यहां इंडस्ट्री है नहीं। सरकार को चाहिए कि वह युवाओं को सुरक्षा बलों में भर्ती करे। इससे उग्रवाद पर भी अंकुश लग सकेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा, सरकार स्थिति पर सुक्ष्मता से नजर रख रही है। क्षेत्र में शांति और सौहार्द सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। राज्य प्राधिकारियों ने एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाकों में निषेधाज्ञा लागू की है।

ड्राइवर को दिया था रुकने का संकेत

भारत सरकार, नगालैंड में हुए इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर अत्यंत खेद व्यक्त जताती है और मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है। भारतीय सेना को नगालैंड के मोन जिले के तिजित क्षेत्र में तिरू गांव के पास उग्रवादियों की आवाजाही की सूचना मिली थी। इसके आधार पर, सेना के 21 पैरा-कमांडो के एक दस्ते ने चार दिसंबर की शाम संदिग्ध क्षेत्र में घात लगाई। इस दौरान, एक वाहन उस स्थान के समीप पहुंचा एवं उसे रुकने का ईशारा किया। लेकिन ड्राइवर ने रुकने की बजाए वाहन तेजी से निकलने का प्रयास किया। जिसके बाद इस आशंका पर की वाहन में संदिग्ध विद्रोही जा रहे थे, वाहन पर गोली चलाई गई।

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