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Nagaland Killing: नागरिकों की मौत मामले में 30 जवानों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, पुलिस महानिदेशक ने दी जानकारी
Sat, 11 Jun 2022 07:26 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 11 Jun 2022 07:26 PM IST
सार
मामले की जांच में पता चला है कि 21 पैरा स्पेशल फोर्सेज की ऑप्स टीम ने लड़ाई के एसओपी के नियमों का पालन नहीं किया था। उनकी गैर-आनुपातिक गोलीबारी में ग्रामीणों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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डीजीपी टीजे लोंगकुमेर
- फोटो : ANI
विस्तार
नगालैंड के मोन जिले में उग्रवाद विरोधी अभियान में नागरिकों की मौत की घटना पर नागालैंड के डीजीपी टीजे लोंगकुमेर ने जानकारी दी है। नगालैंड पुलिस ने 4 दिसंबर, 2021 को मोन जिले के ओटिंग-तिरू इलाके में सेना के ऑपरेशन के दौरान 13 नागरिकों की मौत मामले में मेजर रैंक के एक अधिकारी सहित 21 पैरा स्पेशल फोर्स के 30 जवानों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
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चार्जशीट दाखिल होने से पहले हुई जांच में पाया गया कि स्पेशल फोर्स ऑपरेशन टीम ने मानक संचालन प्रक्रिया और लड़ाई के नियमों का पालन नहीं किया था। घटना के दौरान अंधाधुंध और अनुपातहीन गोलीबारी की गई, जिससे छह नागरिकों की तत्काल मौत हो गई और दो और गंभीर रूप से घायल हो गए। शनिवार को नगालैंड के पुलिस महानिदेशक टी जॉन लोंगकुमर ने कहा कि राज्य अपराध पुलिस ने 5 दिसंबर को भारतीय सेना के अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धारा 302, 304 और 34 आईपीसी के तहत मामला फिर से दर्ज किया था। इसके बाद जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दी गई थी।
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क्या हुआ था?
बीते साल दिसंबर माह में नगालैंड के मोन जिले मेंकथित तौर पर सुरक्षाबलों ने ग्रामीणों को उग्रवादी समझकर उन पर गोलियां चला दी थी। इस घटना में कम से कम 13 ग्रामीणों की मौत हो गई थी, जबकि 11 अन्य घायल हो गए थे। ये सभी ग्रामीण म्यांमार से सटे गांव ओटिंग के थे। घटना के बाद मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने शांति की अपील करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया था। इस घटना में एक सुरक्षा बल के जवान की भी मौत हुई थी।
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जानकारी के अनुसार, तिरु-ओटिंग रोड पर एक गुप्त सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने डेरा डाला था। इसी दौरान ग्रामीण उधर से आ गए थे, आरोप है कि गलती से सुरक्षा बलों ने उन्हें उग्रवादी समझ लिया और गोलियां बरसा दीं। इसमें कई लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल भी हो गए थे। सुरक्षाकर्मियों की ओर की गई कार्रवाई के बाद ग्रामीण आक्रोश में आ गए और सुरक्षाबलों का घेराव कर उनकी गाड़ी में आग लगा दी थी। मामले में नगालैंड सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।
असम राइफल ने बिठाई कोर्ट ऑफ इंक्वायरी
असम राइफल्स की ओर से घटना पर बयान जारी किया गया था। जिसमें कहा गया था कि उग्रवादियों के एक संभावित आंदोलन की खुफिया जानकारी के आधार पर सोम जिले में विशेष अभियान की योजना बनाई गई थी। इस दौरान हुई मौतों के कारण की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बिठाई गई है। घटना पर असम राइफल्स ने खेद व्यक्त किया था।
इस बीच नगालैंड के राज्यपाल जगदीश मुखी ने घटना की निंदा करते हुए कहा था कि एसआईटी इस घटना की हर एंगल से जांच करेगी।