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मुजफ्फरपुर आश्रयगृह: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा- नेताजी, अंकलजी की करें पहचान

Tue, 04 Jun 2019 09:22 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 04 Jun 2019 09:22 AM IST
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Muzaffarpur Shelter Home: Supreme Court told CBI to identify Tondwale and Mooch Wale Uncle Ji
मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर (फाइल फोटो)

बिहार के मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले में सोमवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई। अदालत ने बच्चियों के बयान के आधार पर सीबीआई को मूंछवाले अंकलजी और तोंदवाले नेताजी की पहचान करके उन्हें तीन महीने के अंदर पकड़ने का निर्देश दिया है। दो बच्चियों ने इन दोनों व्यक्तियों पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और एमआर शाह की  पीठ ने सीबीआई की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने जांच के लिए छह महीने का और समय मांगा था।

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अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के अंदर अपना कार्य खत्म करे। पीठ के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता माधवी दीवान ने कहा कि एजेंसी ने दो शवों को निकाला है और वह मृतकों की पहचान के लिए फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। दीवान ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि एजेंसी कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों पर हत्या का आरोप न लगाकर उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। 
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उन्होंने पीठ को बताया कि 11 लड़कियों के गायब होने को लेकर जांच चल रही है। जिन्हें कथित तौर पर मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर ने मार दिया था। मामले से जुड़े 21 आरोपियों पर जघन्य अपराध के तहत धाराएं लगाई गई हैं और यौन शोषण, दुष्कर्म मामले में ट्रायल चल रहा है। अदालत पटना स्थित सामाजिक कार्यकर्ता निवेदिता झा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। झा ने वकील फौजिया शकील के जरिए अदालत में याचिका दाखिल करके सीबीआई जांच पर सवाल उठाए थे। 
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उन्होंने कहा कि पीड़िताओं ने अपने बयान में कहा है कि उन्हें होटल भेजा जाता था, बाहरी लोग और बृजेश के दोस्तों ने उनके साथ दुष्कर्म किया है जो बालिका गृह आया करते थे। एजेंसी उन लोगों को पकड़ने में नाकामयाब रही है। झा ने आरोप लगया कि पीड़िताओं ने अपने बयान में कथित तौर पर तोंदवाले नेताजी अंकल और मूंछवाले अंकलजी का जिक्र किया था जो बालिका गृह आया करते थे लेकिन एजेंसी उन्हें ढूंढ नहीं पाई है।


जांच एजेंसी ने अपने हलफनामे में दावा किया था कि मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर और उसके साथियों ने 11 लड़कियों की कथित रूप से हत्या की थी। एजेंसी ने यह भी कहा था कि मुजफ्फरपुर में एक श्मशान भूमि से उसने ‘हड्डियों की पोटली’ बरामद की है। शीर्ष अदालत ने इस साल फरवरी में इस मामले को बिहार की अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून के तहत सुनवाई करने वाली अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।


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