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मौत से जूझ रही अपनी हिंदू दोस्त को किडनी देगी मुस्लिम महिला
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 30 Jul 2016 06:00 PM IST
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शमशाद बेगम मानती हैं कि व्यक्ति का धर्म हमेशा मानवता होनी चाहिए।
- फोटो : Times of India
सांप्रदायिक तनाव की खबरों के बीच कुछ खबरें ऐसी होती है, जो मानवता में विश्वास को बनाए रखती हैं। ऐसी ही एक खबर आई है यूपी के फतेहपुर जिले से, यहां की एक मुस्लिम महिला ने पुणे (महाराष्ट्र) की एक हिंदू महिला को अपनी किडनी देने का फैसला किया है। हिंदू महिला पिछले एक साल से मौत से लड़ रही है।
40 वर्षीय शमशाद बेगम और 38 वर्षीय आरती का मेडिकल परीक्षण चल रहा है। शमशाद बेगम फतेहपुर जिले के बिंदकी तहसील में रारीबुजुर्ग गांव की रहने वाली हैं। बेगम ने सारे दस्तावेज डिस्ट्रिक्ट हेल्थ डिपार्टमेंट में जमा करा दिए हैं और अब राज्य सरकार की अनुमति का इंतजार कर रही है।
शमशाद बेगम की छोटी बहन जुनैदा खातून की दोस्त आरती पुणे में ही हैं।
बेगम ने कहा, 'मौत से लड़ रहा व्यक्ति बहुत दर्द का सामना करता है और यह मुझसे सहा नहीं गया। मैंने अपना ब्लड ग्रुप टेस्ट कराया, जो आरती से मिल गया।' टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस आशय की खबर प्रकाशित की है।
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उन्होंने कहा, 'मैं ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए तैयार हूं। व्यक्ति का धर्म हमेशा मानवता होनी चाहिए। यह एक दूसरे के लिए सिर्फ एक छोटी कोशिश है।'
दस साल पहले पति की मौत के बाद शमशाद बेगम बिटिया संग अपने पिता के पास रारीबुजुर्ग गांव लौट आई।
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40 वर्षीय शमशाद बेगम और 38 वर्षीय आरती का मेडिकल परीक्षण चल रहा है। शमशाद बेगम फतेहपुर जिले के बिंदकी तहसील में रारीबुजुर्ग गांव की रहने वाली हैं। बेगम ने सारे दस्तावेज डिस्ट्रिक्ट हेल्थ डिपार्टमेंट में जमा करा दिए हैं और अब राज्य सरकार की अनुमति का इंतजार कर रही है।
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शमशाद बेगम की छोटी बहन जुनैदा खातून की दोस्त आरती पुणे में ही हैं।
बेगम ने कहा, 'मौत से लड़ रहा व्यक्ति बहुत दर्द का सामना करता है और यह मुझसे सहा नहीं गया। मैंने अपना ब्लड ग्रुप टेस्ट कराया, जो आरती से मिल गया।' टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस आशय की खबर प्रकाशित की है।
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उन्होंने कहा, 'मैं ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए तैयार हूं। व्यक्ति का धर्म हमेशा मानवता होनी चाहिए। यह एक दूसरे के लिए सिर्फ एक छोटी कोशिश है।'
दस साल पहले पति की मौत के बाद शमशाद बेगम बिटिया संग अपने पिता के पास रारीबुजुर्ग गांव लौट आई।
आरती की दोनों किडनी फेल हो गई हैं।
फाइल फोटोः शमशाद की बहन की दोस्त हैं आरती।
- फोटो : Getty Images
गंगा जमुनी तहजीब की इस कहानी ने तब आकार लिया, जब शमशाद बेगम अपनी छोटी बहन के पास पुणे गई। यहां उनकी मुलाकात अपनी बहन की दोस्त आरती से हुई, जो डायलिसिस पर थी। आरती की दोनों किडनी फेल हो गई है। शमशाद बेगम ने पल भर में आरती को अपनी किडनी देने का फैसला कर लिया।
बाद में, ट्रांसप्लांट और डोनेशन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वो अस्पताल पहुंची। जांच में सभी टेस्ट पॉजिटिव आए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शमशाद का ब्लड ग्रुप आरती से मिल गया है।
शमशाद के पिता जाकिर खान ने कहा, 'अब सिर्फ कुछ काउंसिलिंग सेशन और राज्य सरकार की ऑर्गन ट्रांसप्लांट कमिटी की अनुमति बाकी है।'
उन्होंने आगे कहा कि कागजी काम पूरे कर लिए गए हैं। दोनों परिवारों को किडनी ट्रांसप्लांट पर कोई आपत्ति नहीं है। शमशाद ने इस बारे में मुख्य मेडिकल अधिकारी को अंडरटेकिंग दे दी है।
फतेहपुर के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनय कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हेल्थ विभाग को शमशाद के एफिडेविट और अन्य दस्तावेज मिले हैं, जिन्हें अनुमति के लिए हेल्थ डायरेक्टर को भेज दिया गया है।
बाद में, ट्रांसप्लांट और डोनेशन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वो अस्पताल पहुंची। जांच में सभी टेस्ट पॉजिटिव आए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शमशाद का ब्लड ग्रुप आरती से मिल गया है।
शमशाद के पिता जाकिर खान ने कहा, 'अब सिर्फ कुछ काउंसिलिंग सेशन और राज्य सरकार की ऑर्गन ट्रांसप्लांट कमिटी की अनुमति बाकी है।'
उन्होंने आगे कहा कि कागजी काम पूरे कर लिए गए हैं। दोनों परिवारों को किडनी ट्रांसप्लांट पर कोई आपत्ति नहीं है। शमशाद ने इस बारे में मुख्य मेडिकल अधिकारी को अंडरटेकिंग दे दी है।
फतेहपुर के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनय कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हेल्थ विभाग को शमशाद के एफिडेविट और अन्य दस्तावेज मिले हैं, जिन्हें अनुमति के लिए हेल्थ डायरेक्टर को भेज दिया गया है।